How To Plan Your 
Retirement at Various Life Stages?

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Queries- Business Bhaskar

पहली बार म्यूचुअल फंडों में निवेश करते वक्त नो योर कस्टमर (केवाईसी) की किस तरह की औपचारिकताएं पूरी करनी होती हैं? क्या केवाईसी के लिए कोई विशेष फॉर्म भरना होता है या मुझे पैन कार्ड के अतिरिक्त केवल अपना फोटो-पहचान पत्र और निवास का प्रमाण देना होगा? दूसरे मैंने कई म्यूचुअल फंडों में छोटी-छोटी राशि का निवेश किया हुआ है। क्या प्रत्येक फंड के लिए केवाईसी की औपचारिकता पूरी करनी होगी?

-असफाक अंसारी, जालंधर
-एक जनवरी 2011 से सभी म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए नो योल कस्टमर (केवाईसी) औपचारिकता पूरी करना अनिवार्य कर दिया गया है। निवेश की राशि चाहे छोटी हो या बड़ी, केवाईसी अनिवार्य है। आप एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया या किसी संबंधित म्यूचुअल फंड कंपनी की वेबसाइट से केवाईसी फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं।

आप आवेदन पत्र के साथ पैन और निवास प्रमाणपत्र का स्व-सत्यापित प्रति जरूर संलग्र करें। दस्तावेजों को या तो नोटरी या राजपत्रित अधिकारी से सत्यापित करवा लें या आवेदन पत्र देने के समय सत्यापन के लिए ओरिजिनल दस्तावेज प्रस्तुत करें। केवाईसी औपचारिकता केवल एक बार पूरी करनी होती है। इसके पूरे होने के बाद किसी भी तरह के निवेश के आवेदन के लिए केवाईसी का साक्ष्य संलग्र करें।


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http://business.bhaskar.com/article/कहां-से-मिलेगी-एनपीएस-के-लेन-देन-की-जा��.html



मैं आयकर अधिनियम की धारा 80सी के अंतर्गत कर बचत हेतु निवेश करना चाहता हूं। मुझे किस ईएलएसएस योजना में निवेश करना चाहिए, जो प्रमुख रूप से लार्ज कैप शेयरों में निवेश करता हो?   -राजीव कुमार, चंडीगढ़

—धारा 80सी के अंतर्गत आप जीवन बीमा, पीपीएफ, एनएससी, केवीपी और ईएलएलएस में 1 लाख रुपये तक का निवेश कर सकते हैं। इन सभी में ईएलएसएस एक अच्छा विकल्प है। यह दीर्घावधि में अधिक रिटर्न देता है। लेकिन महज एक पहलू चयन का मापदंड नहीं होना चाहिए। आप किसी भी योजना का चयन अपने जोखिम प्रोफाइल, फंड प्रबंधन और योजना के प्रदर्शन, एक्सपेंस रेश्यो आदि सभी पहलूओं को ध्यान में रखकर करें। केनरा रोबेको टैक्स सेवर, एचडीएफसी टैक्स सेवर और फिडिलिटी टैक्स एडवांटेज ये कुछ अच्छी 
योजनाएं हैं, जिनका लार्ज कैप में 60-80 फीसदी प्रतिनिधित्व है



मेरी उम्र 45 साल है और मेरे दो बच्चे हैं। मेरी सालाना आय 7 लाख रुपये है और मेरी पत्नी घरेलू महिला है। मेरा मासिक खर्च 30,000 रुपये प्रति महीना है। मैंने अभी तक कोई जीवन बीमा नहीं ली है। मैं 60 साल की उम्र में 50,000 रुपये की मासिक आय के साथ सेवानिवृत्त होना चाहता हूं। कृपया मुझे बताएं कि अपनी सेवानिवृत्ति के लक्ष्य के लिए मुझे कितना निवेश करना चाहिए?

-बलदेव राज, चंडीगढ़
—सेवानिवृत्ति की योजना किसी व्यक्ति का प्राथमिक लक्ष्य होता है। वर्तमान में महंगाई दर 10 प्रतिशत के आसपास चल रही है और इसलिए सेवानिवृत्ति के बाद के खर्च अनुमान से कहीं अधिक होंगे। अगर हम आपकी जीवन प्रत्याशा 85 साल मान कर चलें और और आपको सेवानिवृत्ति के बाद 50,000 रुपये प्रति महीने की जरूरत हो तो आपके निवेश पर 8 प्रतिशत का रिटर्न और 6 प्रतिशत महंगाई दर के हिसाब से आपको 1.74 करोड़ रुपये की जरूरत होगी।

इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आपको 36,544 रुपये प्रति माह निवेश 60 साल की आयु तक निवेश करना चाहिए। हम 12 प्रतिशत का रिटर्न मान कर चल रहे हैं। लेकिन आपने जानकारी दी है कि आपका कोई जीवन बीमा भी नहीं है, जिसका मतलब है कि आपने अपने लिए अभी तक कोई ठोस आर्थिक लक्ष्य निर्धारित नहीं किया है। आप किसी सर्अिफायड फाइनेंशियल प्लानर से मिलें और अपने लिए योजना बनवाएं। इससे आपको न केवल लक्ष्य निर्धारण बल्कि उसकी प्राप्ति में काफी मदद मिलेगी।


http://business.bhaskar.com/article/the-goal-of-retirement-investment-tell-1811946.html


मेरे दो बच्चे हैं और मैंने उनकी उच्च शिक्षा के लिए यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान (यूलिप) में निवेश किया हुआ है। कुछ दिनों पहले जब मैंने फंड वैल्यू देखा तो मुझे लक्ष्य प्राप्ति को लेकर चिंता होने लगी है। कृपया, मेरा मार्गदर्शन करें।

-जीवन सिंह, दिल्ली
—किसी भी माता-पिता के लिए बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना प्राथमिक लक्ष्य होता है। लेकिन, इस लक्ष्य के लिए कोई एक ऐसा माध्यम उपलब्ध नहीं है। जहां तक मैं समझ पा रहा हूं, आपने निवेश से पहले यह तय नहीं किया कि बच्चों की शिक्षा में कुल खर्च कितना आएगा। यूलिप, विशेष रूप से जीवन बीमा कंपनियों के चिल्ड्रेंस प्लान, महंगे हैं और इनसे अपेक्षित रिटर्न नहीं मिल पाता है।


मेरी सलाह होगी कि आप किसी फाइनेंशियल प्लानर से मिलें और अपने लिए एक योजना तैयार करवाएं। इस प्रकार आप अपने वित्तीय लक्ष्य और उद्येश्य निर्धारित कर पाएंगे। फिर, अपनी जोखिम उठाने की क्षमता को देखते हुए परिसंपत्तियों का आवंटन करें। वर्तमान यूलिप के संदर्भ में फाइनेंशियल प्लानर की सलाह के अनुसार निर्णय लें।


मैं एक सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल हूं और मुझे नियोक्ता  द्वारा हेल्थ इंश्योरेंस कवर उपलब्ध कराया गया है। क्या मुझे अलग से कोई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेनी चाहिए? मेरे माता-पिता की उम्र 60 साल से अधिक है, उन्हें हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल करने के क्या विकल्प हैं? हमारी कंपनी ग्रुप हेल्थ इेश्योरेंस के तहत माता-पिता को कवर उपलब्ध नहीं कराती है।
-मंजूर आलम, जयपुर
—नियोक्ता द्वारा उपलब्ध कराया जाने वाला हेल्थ इंश्योरेंस ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम है। कंपनियों के लिए यह महंगा है इसलिए अधिकांश कंपनियों ने अपनी नीतियों में बदलाव किया है। अधिकांश कंपनियां अब कर्मचारी के माता-पिता को हेल्थ इंश्योरेंस कवर उपलब्ध नहीं कराती हैं। हालांकि, जब आप नौकरी छोड़ेंगे तो आपकी पॉलिसी भी समाप्त हो जाएगी और आपको अलग से पॉलिसी लेनी होगी। याद रखिए, कोई भी पॉलिसी सारे लाभ पहले से साल से ही देना नहीं शुरू करती हैं।

जब आपकी पॉलिसी 4-5 साल पुरानी होती है तो आपको अधिकतम लाभ मिलने शुरू होते हैं। इसलिए, मेरी सलाह होगी कि आप जितनी जल्दी हो सके, अपने लिए अलग से एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले लें। अपने माता-पिता के लिए आप स्टार हेथ एंड अलायड इंश्योरेंस और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी की सीनियर सिटिजेन पॉलिसी ले सकते हैं।


http://business.bhaskar.com/article/childrens-higher-education-will-be-possible-through-what-ulips-1811944.html


मैं मूथूट फाइनेंस से कर्ज लेने की सोच रहा हूं। लेकिन उलझान इस बात को लेकर है कि यह एक निजी कंपनी है। कृपया मेरी उलझन दूर करने की कृपा करें। यहां से कर्ज लेने में कोई जोखिम तो नहीं है?
-कृपालु, पलवल

—आपने अपने संदेश में यह नहीं बताया है कि आप ऋण किस उद्येश्य से लेना चाहते हैं। आपने ऋण लेने के लिए मुथूट फाइनेंस को चुना है, इसलिए जहां तक मैं समझ पा रहा हूं आप गोल्ड या पर्सनल लोन लेना चाहते हैं वह भी कम अवधि के लक्ष्य के लिए। होम लोन को छोड़ कर बाकी सभी लोन काफी महंगे होते हैं। इसकी दो वजह है। पहला ऐसे कर्ज पर आयकर में कोई लाभ नहीं मिलता है और दूसरा इससे आप परिसंपत्ति नहीं बना पाते हैं। फाइनेंशियल प्लानिंग के नजरिये से बेहतर होता है कि आप अल्पकालिक और दीर्घकालिे लक्ष्यों के लिए योजनाबद्ध तरीके से बचत और निवेश करें। मेरी सलाह होगी कि आप किसी सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर से मिलें। इससे आपके वास्तविक लक्ष्यों का पता चल पाएगा साथ लक्ष्य की पूर्ति के लिए विभिन्न विकल्पों के बारे में सलाह भी मिल जाएगी।

मैं जानना चाहता हूं कि भारत का कौन सा बैंक जमाओं पर सबसे अधिक ब्याज देता है। मैं अपनी जमा पर ब्याज से प्रति महीने अधिकतम 15,000 रुपये प्राप्त करना चाहता हूं। क्या आप यह जानकारी देंगे कि भारत का कौन सा बैंक मेरी जमा राशि पर सबसे अधिक रिटर्न दे सकता है? -बिट्टू, जोधपुर

—बिट्टूजी आपने अपेक्षिम आय के लिए समयावधि का जिक्र अपने पत्र में नहीं किया है। बैंक केवल दीर्घावधि की जमाओं पर ही अधिक ब्याज दरों की पेशकश करते हैं। अधिकतम ब्याज दरें 7 से 10 सान की जमाओं पर मिलती हैं। लेकिन अगर आपका लक्ष्य तीन साल के लिए है तो हो सकता है ब्याज की रकम आपकी आवश्यकताओं को पूरी न कर सके। इसके अतिरिक्त बैंक जमा से प्राप्त ब्याज पर लगने वाला कर भी कमाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। 

फिक्स्ड डिपॉजिट से प्राप्त होने वाले 5,000 रुपये से अधिक सालाना ब्याज पर कर लगाया जाता है। आयकर, आप जिस कर दायरे में आते हैं, उस हिसाब से लगाया जाता है। अगर आप इन महत्वपूर्ण कारकों पर गौर नहीं फरमाते हैं तो इससे निवेश की राशि बढ़ानी पड़ सकती है। मेरी सलाह होगी आप अपेक्षित आय के लिए निवेश के अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।
मेरा स्टेट बैंक ऑप इंडिया (एसबीआई) में बचत खाता है जिसका इस्तेमान मैंने पिछले 8 महीने से नहीं किया है। इस खाते में पैसे भी नहीं हैं। क्या मुझे अपना यह खाता बंद करवा देना चाहिए या यह खुद ही बंद हो जाएगा? अगर मैं इस खाते को बंद नहीं करवाता हूं तो क्या परिणाम होगा?

किसी भी बचत खाते में अगर न्यूनतम राशि रखते हुए उसका का इस्तेमाल एक निश्चित समय तक नहीं किया जाता है तो वह अक्रिय हो जाता है। 
लेकिन अगर आप न्यूनतम राशि अपने बचत खाते में बरकरार नहीं रखते हैं तो बैंक प्रत्येक तिमाही आपसे न्यूनतम बैंलेंस नहीं रखने के एवज में शुल्क वसूलता है। अगर आप खाता बंद नहीं करवाते हैं तो यह शुल्क तब तक लगता लगता रहेगा जब तक कि बैंक उसे बंद नहीं करता है। हालांकि, इससे आपका बैंकिंग रिकॉर्ड प्रभावित हो सकता है और भविष्य में जब आप दूसरे बैंक में कभी खाता खुलवाने जाएंगे तो थोड़ी परेशानी हो सकती है। इसलिए, बेहतर यह होगा कि अगर आप खाते का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो उसे बंद ही करवा दें।



http://business.bhaskar.com/article/muthut-risk-in-lending-to-finance-not-1834533.html

मुझे अप्रैल, 2010 में मेरी कंपनी द्वारा परफॉर्मेंस बोनस दिया गया। मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या मेरी कंपनी ने पहले ही इस रकम पर टीडीएस काट लिया है या मुझे इस साल की कर गणना में इसे दिखाना होगा। संक्षिप्त में, मेरा आपसे सवाल है कि क्या बोनस टीडीएस काटकर दिया जाता है या नहीं? -अभिनव पालीवाल, नई दिल्ली

—आयकर अधिनियम के अनुसार, परफॉर्मेंस बोनस आयकर के दायरे में आता है। जिस वर्ष में बोनस मिलता है, वह उस वर्ष की कुल आय में शामिल होगा। अगर बोनस एरियर्स में प्राप्त होता है तो आयकर अधिनियम की धारा ८९ के अंतर्गत आयकर में छूट के लिए क्लेम किया जा सकता है। आपके मामले में आपको परफॉर्मेंस बोनस अप्रैल, २०१० में मिला, तो यह आपकी वर्ष २०१०-११ की सकल आय में जोड़ लिया जाएगा और इसी के आधार पर आयकर गणना की जाएगी। इस बारे में पूरी विस्तृत गणना आपकी कंपनी से मिले फॉर्म-१६ में दी जाएगी। 

मैं रियल एस्टेट में निवेश करना चाहता हूं। मेरा अपना एक मकान है। मैं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी में काम करता हूं। कृपया मुझे बताएं कि क्या यह निवेश का सही समय है?
-राजेश कुमार, चंडीगढ़

-रियल एस्टेट के निवेश में तरलता की कमी होती है। आपके जीवन में कोई भी निवेश आपके आर्थिक लक्ष्यों के अनुसार होना चाहिए न कि महज शौकिया। लक्ष्य तय कर उनकी प्राप्ति हेतु निवेश में लग जाइए और शेष सरप्लस का निवेश आप विभिन्न परिसंपत्ति वर्गों में करें। 



http://business.bhaskar.com/article/what-bonuses-are-cut-tds-1837778.html

मेरी उम्र 40 साल है और मैं सरकारी सेवा में हूं। मुझे सेवानिवृत्ति के बाद ही सरकार से पेंशन मिल पाएगा। मेरे दो बच्चे हैं और मैंने पब्लिक प्रोविडेंट फंड तथा जीवन बीमा में निवेश किया हुआ है। इसके अतिरिक्त 25,000 रुपये का निवेश मैंने शेयरों में भी किया हुआ है। सुखद सेवानिवृत्ति के लिए मुझे और क्या करना चाहिए? -पुनीत धवन, भोपाल

—आप एक सरकारी कर्मचारी हैं और सेवानिवृत्ति की अधिकांश चिंताएं सरकार की तरफ से मिलने वाली निश्चित पेंशन और पीपीएफकी वजह से कम हो जाती है। हालांकि, आपको अपनी वित्तीय योजना बना कर चलना चाहिए ताकि जीवन के अन्य वित्तीय लक्ष्यों की पूर्ति हो सके। 

बच्चों की पढ़ाई के खर्चे भविष्य में बढ़ते जाएंगे और यह जरूरी है कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आप परिसंपत्ति आवंटन करते चलें। आपने अपने बच्चों की उम्र नहीं बताई है लेकिन आपके परिसंपत्ति आवंटन को देखते हुए लगता है कि ऋण में निवेश की तरफ आपका रुझान अधिक है जो उचित नहीं जान पड़ता है। 

सभी परिसंपत्ति वर्गो में इक्विटी ही एक ऐसा परिसंपत्ति वर्ग है जिसमें दीर्घावधि में महंगाई को मात देते हुए बेहतर रिटर्न देने की क्षमता होती है। इक्विटी लंबी समयावधि में धन-कोष बनाने में मदद करता है। किसी फइनेंशियल प्लानर के साथ बैठ कर आपको अपने लक्ष्यों की पहचान करनी चाहिए तथा उसी हिसाब से निवेश की शुरुआत करनी चाहिए। 

आम तौर पर डाइवर्सिफायड म्यूचुअल फंडों का सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान इक्विटी में निवेश करने का सबसे बेहतर माध्यम माना जाता है। इसके अतिरिक्त आपको समय-समय पर अपने जीवन बीमा की समीक्ष करनी चाहिए और जरूरत होने पर टर्म इंश्योरेंस के जरिये पर्यापत बीमा लेना चाहिए। हालांकि, आपको सरकार की तरफ से स्वास्थ्य बीमा मिला होगा लेकिन आप अपनी जरूरत के हिसाब से अलग से बीमा कवर लेने पर विचार कर सकते हैं।

मेरी उम्र 60 साल है और मेरे पास निवेश के लिए 7 लाख रुपये हैं। मेरा साला एनआरआई है और वह काफी पहले से म्यूचुअल फंडों में निवेश करता आ रहा है। उसने मुझे दो म्यूचुअल फंड निवेश के लिए सुझाए। उसका कहना है कि दो फंडों ने उसे बीते वर्षों में 50 फीसदी से अधिक का रिटर्न दिया है। क्या मुझे उसके सुझाव मानने चाहिए? -राजीव अस्थाना, दिल्ली

—ऐसा लगता है कि आपके साले ने बाजार से उस दौरान रिटर्न का स्वाद चखा है जब सेंसेक्स 8000-10000 के स्तर से 20000 के स्तर तक पहुंचा है। कोई भी निवेश जिसने उस स्तर पर निवेश किया होगा उसे 50 फीसदी से अधिक का लाभ हुआ होगा। हालांकि, भविष्य में ऐसे ही रिटर्न की उम्मीद करना बुद्धिमानी नहीं होगी। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक निवेशक की वित्तीय परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं। हो सकता है कि आपका साला आपसे अधिक जोखिम उठा सकता हो। 

शेयर बाजार अस्थिरता से भरा होता है इसलिए निवेशकों को परिसंपत्ति आवंटन की नीति अपनानी चाहिए। अगर आप शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं तो आपकी समय-सीमा कम से कम 5 साल की होनी चाहिए। अगर आप 1-2 साल के निवेश करना चाहते हैं तो फिर मंथली इनकम प्लान का चयन कीजिए। मंथली इनकम प्लान मूल रूप से ऋण उपकरण हैं लेकिन ये थोड़े परिमाण में इक्विटी में भी निवेश करते हैं। बिड़ला सन लाइफ एमआईपी सेविंग्स 5, एचडीएफसी एमआईपी एलटीपी और रिलायंस एमआईपी कुछ अच्छे फंड हैं, निवेश के लिए इन पर विचार किया जा सकता है।

मैं इन्फ्रास्ट्रक्चर बांडों में कर-बचत के लिए निवेश करना चाहता हूं क्योंकि कुछ इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियां 18 फीसदी का रिटर्न देने का दावा कर रही हैं। क्या इन्फ्रा बांड इतना अधिक रिटर्न दे सकते हैं? -सुशील गुप्ता, जालंधर

—आपके द्वारा यह प्रश्र पूछे जाने से मुझे खुशी हुई है। कुछ कंपनियां, जिसने इंफ्रास्ट्रक्चर बांड लांच किया है, 16-18 फीसदी के रिटर्न का दवा कर रही हैं। हालांकि, यह गुमराह करने जैसी बात है। जब आप इन्फ्रा बांडों में निवेश करते हैं तो आपको निवेश के दौरान मिलने वाली टैक्स छूट और बांड की परिपक्वता पर आप द्वारा दिए दिए जाने वाले कर पर विचार करना चाहिए। 18 प्रतिशत का रिटर्न मार्केटिंग की नीति है। इस पर भरोसा मत कीजिए। अब तक बाजार में जितने भी इन्फ्रा बांड उपलब्ध हैं उनमें से एल एंड टी इंफ्रा बांड 10.30 फीसदी का कर-पश्चात लाभ देता है जो सबसे अधिक है। इसलिए निवेश जब भी कीजिए, वास्तविक कमाई को ध्यान मे रखते हुए कीजिए। कंपनियों की मार्केटिंग नीति के झांसे में मत आइए।



http://business.bhaskar.com/article/where-do-other-than-ppf-and-insurance-for-retirement-investment-1868259.html

मेरा भाई एक आईटी कंपनी में पिछले 3 साल से काम कर रहा है और अब वह पढ़ाई करना चाहता है जिसमें तकरीबन 50,000 रुपये खर्च होंगे। क्या वह पर्सनल लोन लेकर अपनी पढ़ाई कर सकता है?       -राजेश धवन, इंदौर

– पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड लोन सबसे महंगे कर्ज की श्रेणी में आते हैं। ये न केवल आपके व्यक्तिगत जीन को प्रभावित करते हैं बल्कि इसका असर अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्यों जैसे बच्चों की पढ़ाई, सेवानिवृत्ति योजना पर भी असर पड़ता है। यद्यपि, फइनेंशियल प्लानिंग के जरिए आप शिक्षा सहित अपने सभी महत्वपूर्ण लक्ष्यों के लिए योजना बना सकते हैं और उस हिसाब से संसाधनों को आवंटित कर सकते हैं। अपनी पढ़ाई के लिए उन्हें शिक्षा ऋण लेना चाहिए जो सस्ते होते हैं।

मैंने साल 2005 में एक घर खरीदा था और इसे 2011 में बेच दिया। इन पैसों से मैंने अपनी पत्नी के नाम से एक घर खरीदा है। क्या मुझे कैपिटल गेन टैक्स में छूट नहीं मिलेगी? कृपया मार्गदर्शन करें।        -राजेंद्र चौहान, चंडीगढ़

-आपने प्रॉपर्टी तीन साल बाद बेची है इसलिए आप छूट के हकदार हैं लेकिन नियम के मुताबिक जिसके नाम की प्रॉपर्टी बिकी है उसी के नाम से दूसरी प्रॉपर्टी खरीदी या बनाई जानी चाहिए। आपने पत्नी के नाम मकान लिया है इसलिए लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का लाभ नहीं ले पाएंगे।
पिछले छह साल से मैं एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में काम कर रहा था। और अब मैंने एक दूसरी कंपनी में नौकरी शुरू की है। मैं कुछ जरूरी काम से अपने प्रोविडेंट फंड से कुछ पैसों की निकासी करना चाहता हूं। क्या निकासी की राशि पर मुझे टैक्स देना होगा?-सत्येंद्र सिंह, दिल्ली
—आयकर नियमों के अनुसार, अगर किसी कर्मचारी ने लगातार किसी एक नियोक्ता के साथ पांच साल या अधिक समय तक नौकरी की है या नौकरी चली गई है या कर्मचारी कहीं और नौकरी पा लेता है और पुराने नियोक्ता के प्रोविडेंट फंड की राशि नए नियोक्ता के पास ट्रांसफर हो जाती है और उसे किसी प्रमाणित प्रोविडेंट फंड खाते में रखा जाता है तो प्रोविडेंट से की जाने वाली निकासी पर कर नहीं लगता है। आपने पांच वर्ष की सेवा पूरी कर ली है इसलिए निकासी की जाने वाली राशि कर-मुक्त होगी। लेकिन फाइनेंशियल प्लानिंग के नजरिये से प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी सेवानिवृत्ति के लिहाज से बेहतर परिसंपत्ति मानी जाती है क्योंकि ये कोष बनाने के नजरिये से महत्वपूर्ण हैं। किसी फाइनेंशियल प्लानर के साथ मिल कर अपने लक्ष्य निर्धारित करें और फिर अपने दीर्घावधि और अल्पावधि के हिसाब से परिसंपत्तियों का आवंटन करें।

मैंने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस की एक हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी अपने परिवार के लिए ली थी और इसे पिछले छह साल से रिन्यू कराता आ रहा हूं। अब कुछ कारणों से मैं इस पॉलिसी को किसी प्राइवेट बीमा कंपनी के यहां शिफ्ट कराना चाहता हूं। क्या शिफ्ट कराने के बाद मुझे वर्तमान में यूनाइटेड इंडिया से मिल रही सारे लाभ मिलेंगे?-करण सिंह, जोधपुर

—अभी हेल्थ इंश्योरेंस पोर्टेबिलिटी आई नहीं है लेकिन हाल ही में बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण ने इसे 1 जुलाई से लागू करने का प्रस्ताव किया है। इसके लागू होने के बाद यह स्पष्ट होगा कि आप सभी लाभों के साथ बीमा कंपनी बदल सकते हैं या नहीं। वर्तमान में कुछ कंपनियां लैसे अपोलो म्यूनिख पोर्टेबिलिटी जैसा लाभ दे रही हैं। हालांकि, आपको सभी लाभ मिलेंगे या नहीं यह उस स्वास्थ्य बीमा कंपनी के निर्णय पर निर्भर करता है जिसके पास आप अपनी पॉलिसी शिफ्ट करा रहे हैं। उदाहरण के लिए, अगर आप अपनी पॉलिसी अपोलो म्यूनिख के पास शिफ्ट कराते हैं तो पहले से मौजूद किसी बीमारी को कवर करने के लिए आपको एक साल का इंतजार करना होगा। इस प्रकार आप अपनी पॉलिसी किसी दूसरी बीमा कंपनी को ट्रांसफर तो कर सकते हैं लेकिन पॉलिसी शिफ्ट कराने से पहले लाभों को देखते हुए निर्णय लें।

मैं एक व्यवसायी हूं और मेरे पास कुछ पैसे हैं जिनका निवेश 1-2 साल के लिए करना चाहता हूं। अभी तक मैं फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करता आ रहा था लेकिन बिजनेस भास्कर में एफएमपी और एमआईपी के बारे में पढ़ा जो अपेक्षाकृत अधिक रिटर्न देते हैं। कृपया सलाह दें कि निवेश के लिए कौन सा विकल्प बेहतर रहेगा?-राजन रहेजा, चंडीगढ़

—म्यूचुअल फंडों का फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान फिक्स्ड इन्कम योजना है जिनकी एक खास अवधि होती है। ये क्लोज्ड एंडेड होते हैं और परिपक्वता के बाद ये जारी नहीं रहते। यद्यपि, एफएमपी रिटर्न की गारंटी नहीं देते हैं लेकिन इनके रिटर्न फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर होते हैं। फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में ये ज्यादा कर-प्रभावी होते हैं। दूसरी तरफ एमआईपी या मंथली इन्कम प्लान ऋण उपकरणों में निवेश करते हैं जिनकी परिपक्वता अवधि अलग-अलग होती है। साथ ही ये इक्विटी बाजार में भी थोड़ा निवेश करते हैं। मेरी सलाह होगी कि आप फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने की जगह एफएमपी को तरजीह दें क्योंकि रिटर्न और आयकर दोनों नजरिये से यह आकर्षक है।

http://business.bhaskar.com/article/pf-will-give-you-the-income-tax-on-withdrawals-1903130.html

मैं जीवन बीमा के लिए एक टर्म इंश्योरेंस खरीदना चाहता हूं। मैंने कुछ जीवन बीमा एजेंटों से संपर्क किया था। उन्होंने मुझे प्रीमियम रिटर्न टर्म पॉलिसियों के बारे में बताया। क्या मुझे रिटर्न-ऑफ-प्रीमियम पॉलिसी खरीदनी चाहिए?
-अशोक कुमार, रायपुर
—जब आप परिवार के लिए एक सुरक्षा कवर खरीदना चाहते हैंं तो टर्म इंश्योरेंस सबसे सस्ता विकल्प रहेगा। जीवन बीमा पॉलिसी कई प्रकार के होते हैं। रिटर्न ऑफ प्रीमियम एक ऐसा विकल्प है, जिसमें अगर पॉलिसी लेने वाला व्यक्ति पॉलिसी अवधि के खत्म होने के बाद भी जीवित रहता है तो पॉलिसी अवधि में चुकाया गया कुल प्रीमियम, पॉलिसी लेने वाले व्यक्ति को चुका दिया जाता है। इंश्योंरेंस कंपनी भुगतान के लिए १०० से १२५ प्रतिशत समेत कई विकल्प देती है।

वैसे देखने में यह काफी लुभावना विकल्प लगता है पर ऐसा है नहीं। पहली बात, जब आप बिना रिटर्न की प्रीमियम पॉलिसी खरीदते हैं तो आप इतने ही प्रीमियम पर अधिक कवरेज या इससे कम प्रीमियम पर इतनी ही कवरेज पाएंगे। वहीं दूसरी चीज है कि अगर आप प्रीमियम विकल्प में बिना किसी रिटर्न वाली पॉलिसी लेते हैं तो आप प्रीमियम की अच्छी-खासी रकम बचा पाएंगे और इस राशि को किसी अन्य जगह निवेश कर आप अपने निवेश को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

मेरी मासिक आमदनी ५०,००० रुपये है। घर का कुल खर्च ३०,००० रुपये प्रति माह है। मैं विवाहित हूं और मेरी एक बेटी है। मैंने फिक्स्ड डिपॉजिट में ५०,००० रुपये का निवेश किया हुआ है और ५,०००-५,००० रुपये एचडीएफसी टॉप २०० और डीएसपी ब्लैकरॉक टॉप १०० इक्विटी में सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट योजना (सिप) के माध्यम से निवेश कर रहा हूं। मैं आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ टाइम में ५०,००० रुपये सालाना प्रीमियम का यूलिप भी चला रहा हूं। अपनी कमाई के शुरुआती दिनों में मैंने अपने क्रेडिट कार्ड के जरिए ट्रांजेक्शन करने की गलती की थी और अब यह कर्ज बढ़ते-बढ़ते ४०,००० रुपये हो गया है। मैं अपने लक्ष्यों की प्राथमिकता तय नहीं कर पा रहा हूं। कृपया मुझे सलाह दें। 
-अरुण चौधरी, नई दिल्ली
—क्रेडिट कार्ड ऋण आपके वित्तीय लक्ष्यों को प्रभावित करने वाला सबसे महंगा ऋण है। ऐसे अधिकांश ऋण कमाईशुदा जिंदगी की शुरुआत में ही लिए जाते हैं, जैसा कि आपके मामले में हुआ है। आपका खर्च, आपकी कमाई जितना ही है, इसलिए ये ऋण आपके लिए चिंता का विषय है। मैं यह देखकर हैरान हूं कि आपने अपनी एफडी का उपयोग ऋण चुकाने में करने के बजाए अपने कर्ज को सालाना ४० प्रतिशत की दर से बढऩे दिया। सबसे पहले तो आप अपने फिक्स्ड डिपॉजिट में से २५,००० रुपये निकालकर अपना क्रेडिट कार्ड ऋण चुकाएं।

इसके अलावा आपको अपना कर्ज चुकाने के लिए १५,००० रुपये और चाहिए होंगे तो इसके लिए आप अपनी आमदनी में से हर महीने ५,००० रुपये बचाएं और अगले तीन महीनों में अपना कर्ज पूरी तरह चुका दें। इससे आप कर्ज के बोझ से आजाद हो पाएंगे। आपने मुझे अपनी उम्र और जीवन लक्ष्यों के बारे में नहीं बताया है। इसलिए बिना जानकारी के मेरे लिए आपको बचत योजना के बारे में डिटेल देना मुमकिन नहीं होगा।

चूंकि आप विवाहित और एक बच्ची के पिता हैं, इसलिए जीवन बीमा के रूप में एक सुरक्षा कवर खरीदें। आपको अपने परिवार के लिए ५० लाख रुपये के जीवन बीमा कवर की जरूरत होगी। अनचाही या दुर्भाग्यपूर्ण इमरजेंसी की स्थितियों में अपने परिवार को कवर करने के लिए एक हेल्थ इंश्योरेंस या एक्सीडेंट पॉलिसी लें। आपका म्यूचुअल फंड निवेश अच्छे फंडों में है और इसमें किसी तरह के पुनर्संतुलन की जरूरत नहीं है।

लेकिन आपका यूलिप निवेश आपकी आय के लिहाज से ज्यादा है। इस पर पुनर्विचार करें और अगर यह किसी तरह के नुकसान की भरपाई नहीं कर पा रहा है तो इसमें से पैसा निकाल लें। इससे आप सालाना ५०,००० रुपये बचा पाएंगे, जिसे आप अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इस्तेेमाल करें। अपने लक्ष्यों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करने के लिए किसी सर्टिफाइड फाइनेंशिल प्लानर से संपर्क करें और अपने लिए एक वित्तीय योजना बनाएं।
http://business.bhaskar.com/article/what-policy-should-return-on-premiums-1917523.html

मैंने और मेरी पत्नी ने १ जनवरी, २०१० को चालीस लाख रुपये का हाउसिंग लोन लिया था। घर फिलहाल निर्माणाधीन है और २०११ के अंत तक वह हमारे अधिकार में आ जाएगा। हमने इस संपत्ति के लिए संयुक्त हाउसिंग लोन (५०:५०) लिया है और प्रति माह २०,००० रुपये की मासिक किस्त (ईएमआई) का भुगतान कर रहे हैं। मैं उच्चतम टैक्स दायरे में आता हूं और मेरी पत्नी २० प्रतिशत स्लैब में। क्या मैं २०१०-११ में चुकाई गई ईएमआई पर कर में छूट ले सकता हूं?     -रचित अमरोही, जयपुर
—जब आप संयुक्त होम लोन लेते हैं तो दोनों ही पक्ष लोन के ब्याज और मूलधन पर समान अनुपात में कर छूट का फायदा ले सकते हैं। हालांकि यह कर फायदा संपत्ति के अधिकार में आने के वर्ष से ही लिया जा सकता है। इसलिए अगर वित्त वर्ष २०१०-११ के अंत तक मकान आपके अधिकार में नहीं आया तो आप कर फायदे लेने के योग्य नहीं होंगे।

लेकिन ध्यान रखें कि कर में समान अनुपात में कटौती हेतु क्लेम के लिए ईएमआई भी आप दोनों को आधी-आधी चुकानी होगी। जैसे कि अगर आपने अपने बैंक खाते से ऑटो डेबिट फॉर्म का विकल्प चुना है तो सुनिश्चित कर लें कि दूसरा व्यक्ति हर महीने अपने खाते में से अपने हिस्से की ईएमआई चुका रहा है।
http://business.bhaskar.com/article/what-would-the-tax-advantage-of-home-loan-emi-1921837.html

मैं पिछले ३० सालों से सरकारी कर्मचारी हूं। मेरी सालाना आमदनी ४.५ लाख रुपये है। मैंने एलआईसी की जीवन आनंद लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ले रखी है, जो अगले चार सालों में परिपक्व हो जाएगी। मैंने दो साल पहले ही एक मेडिक्लेम फ्लोटर पॉलिसी खरीदी है। मुझे खुद को सुरक्षित रखने के लिए अन्य कौन सी पॉलिसियों में निवेश करना चाहिए? -शांतिलाल जैन, अलवर
—आपने हमे अपने खर्चों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, जिसके बगैर हमारे लिए किसी निवेश के बारे में आपको जानकारी देना मुश्किल होगा। हालांकि आपने जीवन बीमा को निवेश उपकरण मानने की गलती की है। सबसे पहले तो जीवन बीमा आपके साथ किसी तरह की अनहोनी होने पर आपके आश्रितों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए है। आपकी जिम्मेदारियों के हिसाब से ही आपके इंश्योरेंस की जरूरतों में भी बढ़ोतरी होती जाती है।
दूसरी बात यह है कि इस उत्पाद के साथ जुड़ी उच्च लागत के चलते किसी भी इंश्योरेंस पॉलिसी के साथ संलग्न निवेश कभी भी अपेक्षित रिटर्न नहीं देता। अपनी इंश्योरेंस जरूरतों के लिए टर्म प्लान खरीदें और म्यूचुअल फंड व पीपीएफ को निवेश उपकरण के तौर पर इस्तेमाल करें। ध्यान रखें कि निवेश उपकरण के लिए उम्र की भी समय-सीमा निर्धारित की जाती है। मैं आपको सलाह दूंगा कि आप किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर के साथ बैठकर अपने उद्देश्यों पर काम करें। इससे आपको अपनी जोखिम क्षमता और समयावधि के अनुसार सही उत्पाद का चयन करने में भी मदद मिलेगी।

हाल ही में मेरी शादी हुई है। मेरी उम्र ३० साल है और एक आईटी कंपनी में काम करता हूं। मेरी मासिक आय ५०,००० रुपये है। मेरी पत्नी एक स्कूल टीचर है। क्या आप मुझे ऐसी इंश्योरेंस पॉलिसियों के बारे में बता सकते हैं, जिसमें मैं और मेरी पत्नी दोनों ही कवर हो सकें। -दिवाकर यादव, फरीदाबाद

— महज आपकी मासिक आमदनी की जानकारी के आधार पर किसी उत्पाद के बारे में सलाह देना मुश्किल है। आपके खर्च और जिम्मेदारियों सरीखे कुछ ऐसे पहलू भी हैं, जिन पर आपके इंश्योरेंस की राशि निर्भर करती है। आपने अपने मौजूदा निवेशों के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी है। हालांकि ऐसे दो आधारभूत इंश्योरेंस हैं, जिन्हें सभी को खरीदना चाहिए। ये हैं- टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योरेंस। आप एक्सीडेंट पॉलिसी के साथ आने वाला ४ लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस अपनी पत्नी व अपने लिए लें। टर्म इंश्योरेंस की कुल राशि के बारे में जानने के लिए आप किसी फाइनेंशियल प्लानर से सलाह लें। अपनी इंश्योरेंस जरूरतों के लिए यूलिप या एन्डोमेंट उत्पाद लेने से बचें।

मैं यूके में रहने वाला एक एनआरआई हूं। मैं भारत में एक लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना चाहता हूं। क्या मैं किसी भारतीय इंश्योरेंस कंपनी से टर्म इंश्योरेंस लेने के योग्य हूं? -हरीश जाधव, चंडीगढ़
—एनआरआई भारतीय कंपनियों से लाइफ इंश्योरेंस लेने के लिए पूरी तरह योग्य हैं। इनमें टर्म इंश्योरेंस भी शामिल होता है। लेकिन, इसके लिए कुछ शर्तें भी निर्धारित की गई हैं। प्रीमियम का भुगतान महज भारतीय रुपयों में ही किया जाना चाहिए और इंश्योरेंस के लिए आवेदन करते समय जरूरी है कि आप भारत में ही हों। क्लेम किए जाने पर भुगतान भी भारतीय रुपयों में ही किया जाएगा।

मैं एक निजी कंपनी में काम करता हूं और ५ लाख रुपये के गु्रप टर्म इंश्योरेंस के जरिए कवर्ड हूं। कर-पश्चात् मेरी सालाना आय ३ लाख रुपये है। मैं और इंश्योरेंस कवरेज खरीदना चाहता हूं। मुझे परंपरागत इंश्योरेंस उत्पाद लेने चाहिए या फिर टर्म और एमएफ कॉम्बिनेशन लेना चाहिए? -अमित जैन, नई दिल्ली

—जानकर अच्छा लगा कि आप टर्म इंश्योरेंस की महत्ता जानते हैं। लेकिन, आप किसी कॉम्बिनेशन को लेकर भ्रम में बिल्कुल न पड़ें। इंश्योरेंस कवरेज के लिए, टर्म इंश्योरेंस सबसे बेहतर है। आपने अपनी उम्र, खर्च व जिम्मेदारियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, इसलिए हमारे लिए आपको इंश्योरेंस की राशि के बारे में कोई आंकड़ा देना संभव नहीं होगा। लेकिन, निश्चित सिद्धांत के आधार पर आपको अपनी सालाना आय के कम-से-कम ८-१० गुना के बराबर इंश्योरेंस कवर तो लेना ही चाहिए। मैं आपको सलाह दूंगा कि आप समयावधि, जोखिम क्षमता सरीखी जानकारियों के साथ किसी फाइनेंशियल प्लानर के पास जाएं और अपने लिए उपयुक्त निवेश उपकरण का चयन करें।

http://business.bhaskar.com/article/mediclaim-policy-than-what-looan-1987603.html

मैं एक सरकारी कर्मचारी हूं। मेरे दो बच्चे हैं। चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान के जरिए मैं अपने बच्चों की फ्यूचर प्लानिंग के लिए निवेश कर रहा हूं। हाल ही में मैंने अपनी बड़ी बेटी की शादी की योजना के इरादे से एक घर खरीदा है। क्या मैं सही निवेश कर रहा हूं? -अतुल सहगल, शाहदरा, दिल्ली

—चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान के खर्च अधिक होते हैं। ऐसा कोई भी एकल उत्पाद नहीं है, जो आपकी सभी जरूरतें पूरी कर सके। चाइल्ड प्लानिंग करते समय आपके दो उद्येश्य होते हैं- उनकी शिक्षा एवं विवाह पर आने वाला खर्च और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में उनकी आर्थिक सुरक्षा। आपके ये सरोकार कोई भी चाइल्ड इंश्योरेंस उत्पाद पूरे नहीं करता। इनमें आप बहुत अधिक लाइफ कवरेज नहीं पाते हैं। लंबी अवधि हेतु रियल एस्टेट एक शानदार निवेश विकल्प है। भविष्य में इसकी कीमत बढऩा तय है। याद रखें कि यह एक गैर-नकदी निवेश है और बेचते समय उचित कीमत पाने में थोड़ी परेशानी भी हो सकती है।

http://business.bhaskar.com/article/plan-to-invest-in-the-childs-right-1990330.html

मैं एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूं। मेरी सालाना आय चार लाख रुपये है। हाल ही में मैंने बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस का २० वर्ष की अवधि के लिए बचत एंडोमेंट प्लान लिया है। इसमें मुझे 25,000 रुपये का वार्षिक प्रीमियम चुकाना होते हैं। मैंने इसे २० सालों के बाद पेंशन के उद्देश्य से लिया है। मैंने सही प्लान लिया है या नहीं? कृपया मेरा मार्गदर्शन करें। -सुदर्शन गुप्ता, पिंजौर

—बिड़ला सन लाइफ बचत एन्डोमेंट प्लान बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस का एक ट्रेडिशनल प्लान है। इसमें आपको तय अवधि तक निर्धारित प्रीमियम अदा करने पर मैच्योरिटी पर सम एश्योर्ड, अतिरिक्त बचत (बोनस) व लॉयल्टी का लाभ मिलेगा। यह उत्पाद साधारण ब्याज फॉर्मूले का अनुसरण करता है। साल-दर-साल मूलधन पर महज ५-५.५ प्रतिशत ब्याज अर्जित होता है। ऐसे में, इसमें १०-२० सालों तक टिके रहने पर आप कंपाउडिंग का लाभ लेने से वंचित रह जाएंगे।

सुदर्शनजी, चूंकि आप अपने जीवन की शुरुआती पड़ाव में ही रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग कर रहे हैं, तो मेरी सलाह होगी कि आप ऐसा निर्णय लेकर बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। हालांकि, मैं आपके उत्पादों के चयन से सहमत नहीं हूं। जब आप रिटायरमेंट सरीखे दीर्घकालिक उद्देश्यों के लिए विचार करते हैं, तो आपको कम-से-कम १२-१५ फीसदी रिटर्न देने वाले उत्पाद में निवेश करना चाहिए।

परपंरागत लाइफ इंश्योरेंस प्लान आपको महज ५-६ फीसदी सालाना रिटर्न देते हैं, जो न तो मुद्रास्फीति को मात दे सकते है और हो सकता है कि आप लंबे समय में अपने पैसे का मूल्य भी गंवा बैठें। रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग करते समय आपके पास दो उद्देश्य होते हैं- ऊंचे इंश्योरेंस कवर के जरिए अपने परिवार को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध करना और तमाम निवेश साधनों के जरिए अपने अपने लिए अपेक्षित कोष को इकट्ठा करना। चूंकि आपने अपनी उम्र और अपने रिटायरमेंट उद्देश्यों के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी है, इस कारण मेरे लिए आपको कोई आंकड़ा बताना मुश्किल होगा।

लेकिन, मैं आपको टर्म प्लान के जरिए ऊंचा इंश्योरेंस कवर लेने की सलाह दूंगा, जो काफी सस्ता होगा। साथ ही आप लागत वाले निवेश उत्पादों जैसे इक्विटी म्यूचुअल फंडों उत्पादों में निवेश करें ताकि आपको अधिक रिटर्न उपलब्ध कराएगा। अपने आर्थिक लक्ष्यों के विस्तृत विश्लेषण और उसके अनुरूप उत्पादों के चयन के लिए किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर से मिलें।

मैं गुजरात की एक फार्मा कंपनी के सेल्स डिपार्टमेंट में पिछले साढ़े पांच से काम कर रहा हूं। वे मेरी सैलरी से प्रोविडेंट फंड के लिए पैसे काटते हैं। क्या एंप्लॉई प्रोविडेंट फंड से पेंशन लेने का कोई प्रावधान है? कृपया मुझे किसी अच्छी पेंशन योजना का सुझाव दें, साथ ही केंद्र सरकार द्वारा लांच की गई न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) के बारे में भी जानकारी दें, जिसमें हम अपना खाता खोल सकें और आयकर मुक्त जमा कर सकें।
-आर. के नागर, इंदौर

—जब आपकी कंपनी आपकी सैलरी में से पीएफ काटती है, तो उसका ८.३३ फीसदी हिस्सा एंप्लॉई पेंशन स्कीम, १९९५ में जमा होता है। इस योजना के जरिये आप जितनी भी राशि संचित करते हैं, वह आपको पेंशन के तौर पर प्राप्त होती है।
हालांकि, यह सहयोग राशि बेहद कम होने के कारण रिटायरमेंट आवश्यकताओं के लिए नाकाफी होती हैं। मन-मुताबिक पेंशन पाने के लिए आपके पास रिटायरमेंट पर पर्याप्त निधि संचित होनी चाहिए। परिसंपत्ति वर्ग में किया गया निवेश एक छोटे से सहयोग से ही आपका पैसे को समृद्ध कर सकता है। लंबे समय में, इक्विटी एक ऐसा परिसंपत्ति वर्ग हैं, जिसमें आप उच्चतम रिटर्न पाते हैं और समय-दर-समय आपका पैसा संयोजित होता जाता है।

एनपीएस एक बहुत कम लागत वाली पेंशन प्रणाली है, जिसमें रिकॉर्ड रखने वाली स्वतंत्र एजेंसियां ग्राहकों के पेंशन फंडों का जिम्मा संभालती हैं। इसमें ग्राहकों को पेंशन फंड मैनेजर व निवेश के लिए परिसंपत्ति वर्ग चुनने की स्वतंत्रता होती है। मौजूदा समय में, आयकर अधिनियम की धारा 80सीसीडी के तहत वेतनभोगियों को वेतन का 10 प्रतिशत तक इसमें जमा करने पर आयकर में छूट का लाभ मिलता है।

धन जोडऩे की इस अवधि के दौरान, एनपीएस अन्य कर बचत योजनाओं की तरह आयकर से मुक्त होता है। हालांकि इस योजना में इक्विटी में ५० फीसदी तक ही निवेश किया जा सकता है।
यह उत्पाद आपके रिटायरमेंट उद्देश्य के लिए ज्यादा उपयुक्त नहीं लगता। मैं आपको आपके लक्ष्य तक पहुंचने के लिए इक्विटी म्यूचुअल फंडों में सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान लेने और पब्लिक प्रोविडेंट फंड में निवेश करने की सलाह दूंगा।


मैं एक दुर्घटना बीमा पॉलिसी खरीदने की सोच रहा हूं। अपने मासिक खर्च और दूसरे पहलुओं की तुलना करने पर मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि मुझे स्थायी विकलांगता के लिए कम से कम ५० लाख रुपये का सम एश्योर्ड चाहिए। जहां तक मैंने पाया है तो कोई कंपनी ५० लाख रुपये की पॉलिसी नहीं देती। क्या मैं दो कंपनियों से २५-२५ लाख रुपये की पॉलिसी लेकर ऐसी स्थिति आने पर दोनों से क्लेम कर पाऊंगा? -वैभव श्रीवास्तव, इंदौर

—अस्थायी विकलांगता हेल्थ इंश्योरेंस कराने वाली कंपनियों की कंप्रिहेंसिव एक्सीडेंट इंश्योरेंस पॉलिसियों के साथ संलग्न होती है। शुरुआत में ये कंपनियां ऊंचा इंश्योरेंस कवर नहीं देती थीं। लेकिन अब अपोलो म्यूनिख हेल्थ इंश्योरेंस जैसी कंपनियां पॉलिसीधारक की कमाई के आधार पर ५ लाख रुपये से लेकर ५ करोड़ रुपये तक का कवरेज दे रही हैं।

वैसे आप दो अलग-अलग कंपनियों से २५-२५ लाख रुपये की दो पॉलिसियां खरीद सकते हैं। हालांकि, क्लेम के दौरान आपको अन्य पॉलिसियों की जानकारियों का ब्यौरा देना होगा। आपकी उपार्जन क्षमता और बाकी जानकारियां वेरीफाई करने के बाद इंश्योरेंस कंपनियां आपके दावे का निपटान करेंगी। अगर उन्हें आपकी उपार्जन क्षमता कम लगी तो क्लेम की राशि घट जाती है। यह दोनों कंपनियों के टीपीए पर भी निर्भर करती है। अगर दोनों कंपनियों में टीपीए एक जैसा है तब क्लेम सेट्लमेंट की प्रक्रिया तेजी से होती है। वरना एक टीपीए से दूसरे टीपीए को कागजात स्थानांतरित होने में ही काफी देरी हो जाती है। इसलिए मैं आपको एक ही पॉलिसी लेने की सलाह दूंगा।

कृपया वेल्थ टैक्स और इससे जुड़ी कटौतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दें। -माहिम शर्मा, चंडीगढ़ 
—आयकर की तरह वैल्थ टैक्स एक सालाना कर है, जो किसी प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक से होने वाले फायदों (चाहे प्रॉपर्टी से कोई आमदनी हो या नहीं) की मार्केट वैल्यू पर लगाया जाता है। वैल्थ टैक्स (संपदा कर) करदाता की कुल संपदा पर लगाया जाता है, जिसमें कुल आय का अर्थ मूल्यांकन तिथि पर कर चुकाने वाले व्यक्ति से जुड़ी सभी परिसंपत्तियों की कुल कीमत के अनुसार लिया जाता है। मौजूदा समय में वैल्थ टैक्स मूल्यांकन तिथि (३१ मार्च पर) ३० लाख रुपये से अधिक की संपदा पर सालाना एक फीसदी की दर से लगाया जाता है। ये प्रावधान १ अप्रैल, १९५७ से अधिकार में आए संपदा कर अधिनियम के तहत आते हैं। प्रत्येक व्यक्ति, अविभाजित हिंदू परिवार और कंपनियों को वित्त वर्ष की समाप्ति पर ३० लाख रुपये से अधिक की संपदा होने पर वेल्थ टैक्स का भुगतान करना होता है।

मौजूदा समय में संपदा कर बिल्डिंग, मकानों, किसी म्युनिसिपैलिटी या कैंटोनमेंट बोर्ड की स्थानीय सीमा से २५ किमी के दायरे में स्थित फार्म हाउसों, मोटर कारों, ज्वैलरी, याच और एयरक्राफ्ट या निजी और अविभाजित हिंदू परिवार के व्यक्ति के पास ५०,००० रुपये से अधिक कैश होने पर लगाया जाता है। हालांकि, इसमें आयकर योग्य परिसंपत्तियों के लिए कुछ कटौतियां और छूट हैं। जैसे एक घर, किसी का निजी या अविभाजित हिंदू परिवार का प्लॉट संपदा कर से मुक्त होता है। पूर्व के वर्ष में न्यूनतम ३०० दिनों तक छोड़ी गई रिहायशी प्रॉपर्टी आयकर के दायरे से मुक्त होती है। ऐसा ही रहने के लिए इस्तेमाल में लाए जा रहे मकानों या व्यावसायिक इस्तेमाल में आने वाले घरों के मामले में होता है।

भारत में सिप के जरिये निवेश करने के लिहाज से शीर्ष 5 म्यूचुअल फंड कौन से हैं? अब जब सेंसेक्स ऊंचे स्तर पर है तो क्या यह सिप शुरू करने का यह सही वक्त है? इनसे एक साल में मुझे कितना रिटर्न मिल सकता है? मुझे म्यूचुअल फंड में अपनी बचत के कितने फीसदी का निवेश करना चाहिए? -गौरव जैन, द्वारका, नई दिल्ली

—सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (सिप) एक लांग टर्म निवेश विकल्प है और अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों तक पहुंचना इसका उद्देश्य है। कोई भी सिप शुरू करने से पहले आपको अपने जोखिम प्रोफाइल व अपने फाइनेंशियल लक्ष्यों की परख कर लेनी चाहिए। सिप का सबसे बड़ा लाभ चक्रवृद्धि है। वक्त जितना ज्यादा होगा, आपका पैसा उतना ही बढ़ता जाएगा। मैं यह नहीं समझ पाया हूं कि आपने एक साल के रिटर्न के बारे में क्यों पूछा है? इक्विटी में निवेश के लिए यह काफी कम समय है। इक्विटी लंबे समय में अच्छा रिटर्न देती है और ऐसे में घाटे की संभावना भी घट जाती है। उदाहरण के लिए- दस साल के समय में पिछले रिकॉर्ड से साबित होता है कि नुकसान की संभावना शून्य रही है और निवेश पर १७-१८ प्रतिशत का सालाना चक्रवृद्धि ब्याज मिलता रहा है।

इसीलिए फाइनेंशियल प्लानर लंबे समय के लिए इक्विटी में निवेश की सलाह देते हैं।जहां तक इक्विटी या ऋण में प्रतिशत के हिसाब से बचत आवंटित करने की बात है तो यह आपकी निवेशावधि और आपके वित्तीय लक्ष्य पर निर्भर करता है। अगर आपके पास लक्ष्य तक पहुंचने के लिए १०-१५ साल हैं तो आपको अपनी ज्यादा से ज्यादा बचत इक्विटी में लगानी चाहिए। लेकिन अगर आप २-३ सालों के लिए निवेश करना चाहते हैं तो आप अपनी बचत को ऋण फंड में लगाएं क्योंकि पूंजी की सुरक्षा भी जरूरी होती है। मैं हमेशा यही कहूंगा कि आपका प्रत्येक निवेश आपके उद्देश्यों के अनुसार होना चाहिए। मैं आपको किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर से मिलने को कहूंगा ताकि आप परिसंपत्ति आवंटन में उसका मार्गदर्शन ले सकें।
http://business.bhaskar.com/article/what-can-be-taken-from-two-insurance-companies-accident-policy-2056790.html

मेरे पिता पिछले साल गुजर गए। उनके कागजात ढूंढते वक्त मुझे पता चला कि उन्होंने हमारे एक परिचित एडवाइजर के जरिए छह साल पहले म्यूचुअल फंडों में निवेश किया था। जब मैंने इस बारे में कंपनी से संपर्क किया तो उन्होंने मुझसे कहा कि मेरे पिता ने इस निवेश में किसी को अपना नॉमिनी नहीं बनाया था। मुझे उनके नाम के डिविडेंड मिल रहे हैं। लेकिन मैं उन्हें कैश नहीं करा सकता। क्या ऐसा हो सकता है कि उनके नाम का यह निवेश मेरे नाम पर ट्रांसफर किया जा सके। -सुरेंद्र सिन्हा, इंदौर

—न सिर्फ निवेश बल्कि बैंक खातों में भी नॉमिनी नियुक्त करना हमेशा अच्छा रहता है। ऐसे में निवेशक की मृत्यु की स्थिति में नॉमिनी को यह पैसा मिल जाता है। ऐसा लगता है कि आपके पिता के एडवाइजर ने उन्हें निवेश में नॉमिनी की अहमियत के बारे में नहीं बताया है। इसकी वजह इसका अनिवार्य न होना भी हो सकता है। हालांकि निवेशक की मौत के बाद पूरे पैसे को प्राप्त करने वाला नॉमिनी ही होता है। पैसे के कानूनी उत्तराधिकारी नॉमिनी से भिन्न होते हैं। ऐसे में आप फंड हाउस से बात कर उन्हें बताएं कि आपके पिता ने कोई नॉमिनी नहीं बनाया है। इसके बाद सक्सेशन डॉक्यूमेंट बनवाएं। इससे आपके कानूनी उत्तराधिकारी होने की पुष्टि होगी। एकबारगी फंड हाउस आपको कानूनी उत्तराधिकारी मान लेता है तो इसके बाद आप अपने पिता के निवेश को अपने नाम पर ट्रांसफर करा सकते हैं और डिविडेंड के लिए क्लेम कर सकते हैं।

मैं हर महीने १५-२० हजार रुपये निवेश करना चाहता हूं और मैं यह निवेश ३-५ साल के लिए करुंगा। इस बाबत मैंने कई एडवाजरों से बात की लेकिन इससे मैं कंफ्यूज हो गया हूं। कुछ एडवाइजरों ने मुझे शेयर बाजार का रुख कर स्टॉक खरीदने की सलाह दी है। वहीं एक ब्रोकर ने प्रॉपर्टी के लिए लोन लेने की सलाह दी है और इन पैसों को ईएमआई के तौर पर चुकाने को कहा है। मैंने म्यूचुअल फंडों के सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (सिप) के बारे में पढ़ा है। मुझे ऐसा कोई बढिय़ा विकल्प बताएं जिसमें ज्यादा से ज्यादा रिटर्न मिले। -रोहित शाह, भोपाल

—चलिए आपके प्रत्येक विकल्प को देखते हैं। रियल एस्टेट एक लांग टर्म निवेश है और लोन १५-२० सालों के लिए दिया जाता है। इसलिए रियल एस्टेट में निवेश आपके अनुकूल नहीं है। अगर आप खुद विश्लेषण कर सकते हैं तो आप ज्यादा संख्या में शेयरों की खरीदारी करें। हालांकि, हर महीने अपने निवेश को डाइवर्सिफाइ करना काफी मुश्किल है। इसलिए पैसे से पैसा बनाने के लिए कुछ बेहद अच्छे शेयरों की पहचान के मामले में आपका विश्लेषण काफी अच्छा होना चाहिए। निजी तौर पर मेरा मानना है कि कम समय में जोखिम ऊंचा होता है। म्यूचुअल फंड आपकी क्राइटेरिया पर खरा उतरता है। म्यूचुअल फंड में सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान के जरिये आप बड़ी संख्या में शेयरों में निवेश योजना की सामथ्र्य के चलते डाइवर्सिफिकेशन का फायदा ले सकते हैं।

दूसरी बात इसमें आपके पैसों का प्रबंधन कुशल मैनेजर करते हैं जिनके पास वक्त और संबंधित क्षेत्र में विशेषज्ञता होती है। आखिरी बात म्यूचुअल फंडों में बैलेंस्ड फंड सरीखे विकल्प भी होते हैं जो बाजार की विभिन्न श्रेणियों में निवेश कर आपके निवेश को जोखिम मुक्त कर देते हैं और कम समय में ज्यादा रिटर्न देते हैं। मेरी सलाह होगी कि आप किसी फाइनेंशियल प्लानर से मिलें। वह आपके जोखिम प्रोफाइल और समयावधि के अनुसार आपको अच्छी म्यूचुअल फंड योजनाओं को चुनने में मदद करेंगे।

http://business.bhaskar.com/article/how-will-the-father-of-the-amount-of-investment-2059714.html

मैं केंद्र सरकार का कर्मचारी हूं। मैंने 4 सितंबर 2010 को नौकरी ज्वाइन की थी। अक्टूबर 2010 से मेरे वेतन से 1475 रुपये नियोक्ता द्वारा काटे जा रहे हैं। मेरी जन्म तिथि 31 अगस्त 1974 है। मुझे सेवानिवृत्ति के समय कितने पैसे मिलेंगे और 60वें वर्ष से मुझे कितने पैसे पेंशन के रूप में मिलेंगे? कृपया मेरी मदद करें। -राहुल शर्मा, दिल्ली
—कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) एक अच्छी योजना है और सेवानिवृत्ति कोष बनाने का सबसे अच्छा जरिया है। अनुशासित निवेश के जरिये इसके अंतर्गत एक पूर्व-निर्धारित ब्याज पर आपके धन में चक्रवृद्धि होती है। आपकी सेवानिवृत्ति में अभी 24 साल शेष है। अगर हम यह मान कर चलें कि आपकी आय में सेवानिवृत्ति तक सालाना 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो आप ईपीएफ योगदान के जरिये लगभग 57 लाख रुपये जमा कर पाएंगे। इस कोष से आप एन्युइटी/पेंशन की खरीदारी किसी भी जीवन बीमा कंपनी से कर सकते हैं।
अगर हम एन्युइटी की वर्तमान दर 6 प्रतिशत के हिसाब से देखें तो आपको प्रति महीने लगभग 28,000 रुपये का पेंशन मिलेगा। हालांकि, जीवन बीमा कंपनियां एन्युइटी के विभिन्न विकल्प उपलब्ध कराती है जैसे ज्वाइंट पेंशन, एक खास अवधि तक के लिए पेंशन, नॉमिनी को खरीद मूल्य की वापसी के साथ पेंशन आदि। इन विकल्पों के तहत पेंशन की राशि भी अलग-अलग होती है। एन्युइटी खरीदते समय आपको उपलब्ध विकल्पों में से किसी एक का चयन करना होगा।
हाल ही में मैंने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ का 55 लाख रुपये का टर्म प्लान (आई प्रोटेक्ट) लिया है। मेरी मेडिकल जांच भी कराई गई और उम्मीद है कि सबकुछ ठीक-ठाक होना चाहिए। मुझे पॉलिसी के दस्तावेज मिल चुकी है। क्या यह कंपनी और पॉलिसी ठीक हैं?-राधेश्याम जुनेजा, जालंधर
—अपने आश्रितों को आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराने का सबसे सस्ता जरिया है टर्म इंश्योरेंस। डेथ क्लेम के दावों के अनुभव के हिसाब से कई बीमा कंपनियों ने मोर्टेलिटी रेट में कमी की है। ग्राहकों को और अधिक लाभ पहुंचाने के ख्याल से कई कंपनियों ने कम लागत पर ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस के खरीदारी की सुविधा उपलब्ध कराई है। आईसीआईसीआई प्रू का आई-प्रोटेक्ट भी एक टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी है जिसकी ऑनलाइन खरीदारी की जा सकती है। यद्यपि, ये सस्ते हैं लेकिन ऑनलाइन पॉलिसी खरीदते समय कुछ बातों पर गौर करना चाहिए।
पहला, आपको सेवा देने के लिए कोई एजेंट बीच में नहीं होता। इसका मतलब हुआ कि पॉलिसी के नियम और शर्तें आपको खुद ही समझनी पड़ती है। दूसरी बात यह है कि आपके परिवार वालों को डॉक्यूमेंटेशन और क्लेम प्रक्रिया की पूरी जानकारी होनी चाहिए ताकि आपके न रहने की दशा में क्लेम के दौरान कोई परेशानी नहीं हो। हालांकि, ऑनलाइन पॉलिसी की क्लेम प्रक्रिया का अभी कोई खास अनुभव किसी कंपनी को नहीं है, क्योंकि यह हाल ही में शुरू हुआ है, लेकिन अगर आपने उपरोक्त बातों पर विचार किया हुआ है तो आपकी पॉलिसी बिल्कुल फिट है।
मेरी आय प्रति माह 25,000 रुपये है। मैं मासिक 7,000-10,000 रुपये का निवेश अपनी सेवानिवृत्ति के समय तक लगातार करना चाहता हूं। कृपया मुझे अच्छे रिटर्न के साथ सुरक्षित निवेश के विकल्प बताएं। इसके अतिरिक्त मैं महंगाई भत्ता और वेतन में बढ़ोतरी की बदौलत प्रति वर्ष 1,000-2,000 रुपये का निवेश करना चाहूंगा। कृपया मेरा मार्गदर्शन करें।-हेमंत मालवीय, जोधपुर
—हेमंतजी कोई भी निवेश सुरक्षित या आदर्श नहीं होता है। आपका कोई भी निवेश निर्णय आपके लक्ष्यों से मेल खाता हुआ होना चाहिए। निवेश के विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं लेकिन प्रत्येक विकल्प के जोखिम और रिटर्न का स्तर निवेश की समय-सीमा के हिसाब से अलग-अलग होते हैं। सेवानिवृत्ति के लिए लंबी अवधि का निवेश किया जाता है हालांकि लोग इस लक्ष्य को ज्यादा तवज्जों नहीं देते हैं। जीवन प्रत्याशा में बढ़ोतरी के साथ ही सेवानिवृत्ति के बाद सुखमय जीवन जीने के लिए अच्छा कोष इका किया जाना चाहिए।
इसलिए निवेश ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स में किया जाना चाहिए जो न केवल महंगाई को मात दे बल्कि आपके संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए अधिक रिटर्न भी दे। एक परिसंपत्ति वर्ग के तौर पर इक्विटी लंबे समय में अच्छा रिटर्न देता आया है साथ ही अगर इसमें निवेश की समय-सीमा 10 साल से अधिक हो तो जोखिम भी घटता जाता है। इसलिए, सेवानिवृत्ति के लिए इक्विटी में ज्यादा निवेश किया जाना चाहिए और सेवानिवृत्ति का वक्त नजदीक आने के साथ ही इसमें निवेश घटाया जाना चाहिए। सही तरीके से निवेश राशि के आवंटन के लिए जरूरी है कि आप यह तय कर लें कि सेवानिवृत्ति के लिए आपको कितने राशि की जरूरत होगी। आपने अपने सेवानिवृत्ति की उम्र , वर्तमान खर्च और देनदारियों का जिक्र नहीं किया है इसलिए आप कहां और कितना निवेश करें यह बताना कठिन होगा।
हालांकि, अगर हम यह मान कर चलें कि आपकी सेवानिवृत्ति में अभी 15-20 साल शेष है तो आपको म्यूचुअल फंडों का रास्ता अख्तियार करना चाहिए और अच्छे इक्विटी डाइवर्सिफायड फंडों जैसे एचडीएफसी टॉप200, डीएसपीबीआर टॉप 100 इक्विटी, बिड़ला सन लाइफ फ्रंटलाइन इक्विटी और आईडीएफसी प्रीमियम इक्विटी फंडों का चयन करना चाहिए। इन फंडों से आपको अपेक्षित रिटर्न मिल पाएगा और आपको लक्ष्य प्राप्ति में मदद मिलेगी। आप पब्लिक प्रोविडेंट फंड और एनपीएस पर भी विचार कर सकते हैं जो सेवानिवृत्ति के लिए अच्छा कोष बनाने में मददगार साबित होंगे। कितने पैसे कहां निवेश किए जाएं, इसके लिए आप किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर से संपर्क करें।
मेरी उम्र 28 साल है और मैं अगले महीने सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान के जरिये म्यूचुअल फंडों में निवेश करना चाहता हूं। मुझे किन फंडों का चयन करना चाहिए और चयन के क्या मानदंड होने चाहिए। -सुरेंद्र, रायपुर

—धन कोष बनाने के ख्याल से सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान या सिप एक बहुत ही बढिय़ा माध्यम है। हालांकि, अधिकांश निवेशक इसे अल्पावधि के निवेश का जरिया समझते हैं और अपने ब्रोकर की सलाह पर इसमें हेर-फेर करते हैं। इसलिए, सबसे पहले अपने मन में ठान लें कि आप लंबे समय तक सिप के जरिये निवेश करते रहेंगे। सिप को अपने लक्ष्यों जैसे सेवानिवृत्ति आदि के साथ जोडि़ए। इस प्रकार आप सिप के अधिकतम लाभ पा सकेंगे। अच्छी बात यह है कि आप दीर्घावधि के लिए निवेश करना चाहते हैं और इसलिए आप लार्ज कैप और मिड कैप फंडों में निवेश करने पर विचार कर सकते हैं।

लार्ज कैप फंड जैसे बिड़ला सन लाइफ फ्रंटलाइन इक्विटी, एचडीएफसी टॉप 200, रिलायंस रेग्युलर सेविंग्स फंड इक्विटी जैसे फंड आपके निवेश पोर्टफोलियो को स्थिरता देंगे और आईडीएफसी प्रीमियर इक्विटी जैसे मिड-कैप फंड रिटर्न में इजाफा करेंगे। अपने निवेश को मॉनिटर करें और जरूरत पडऩे पर उसका पुनर्संतुलन करें। जब आप अपने लक्ष्य के करीब आ जाएं तो धन की सुरक्षा के लिए आप इक्विटी से ऋण में अपने निवेश को ट्रांसफर करें ताकि शेयर बाजार की अस्थिरता से आपका अर्जित लाभ सुरक्षित रहे।

एक ब्रोकर की सलाह पर मैं म्यूचुअल फंडों में निवेश करता रहा और मेरा अनुभव बड़ा बुरा रहा है। अब मैंने खुद ही कुछ इक्विटी फंडों में सीधे एएमसी से संपर्क कर निवेश करना शुरू किया है। क्या मेरी नीति सही है और इसका मेरे निवेश पर क्या प्रभाव होगा? -राजेश वर्मा, जोधपुर

—किसी परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) के जरिये सीधे निवेश करने का मतलब है कि बीच में कोई ब्रोकर या मध्यस्थ नहीं है और आपको सभी सेवाएं उन एएमसी से सीधे प्राप्त होंगी। इससे आपके निवेश पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, प्रत्येक अपेक्षित सेवा के लिए आपको स्वयं संबंधित एएमसी से संपर्क करना होगा। कोई दूसरा ब्रोकर या एडवाइजर आपको सेवाएं देने में सक्षम नहीं होगा क्योंकि जो निवेश एडवाइजर के जरिये नहीं आते उनके संदर्भ में कोई भी एएमसी विस्तृत जानकारी मुहैया नहीं कराती है। लेकिन इसके लिए आपको चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि एएमसी के अब कॉल सेंटर हैं जिसके जरिये निवेशक अपनी किसी भी समस्या का समाधान पा सकते हैं।

मैं रिटायरमेंट के लिए सालाना 20,000 रुपये का निवेश 20 साल के लिए करने की सोच रहा हूं। मेरे एडवाइजर ने बताया कि मुझे म्यूचुअल फंडों के पेंशन प्लान में निवेश करना चाहिए। क्या म्यूचुअल फंडों की कोई ऐसी योजना है? अगर हां तो उनमें सबसे बढिय़ा कौन सा है? ऐसी योजनाओं में निवेश कर मुझे 20 साल बाद प्रति माह कितने पैसे प्राप्त होंगे? -करमवीर सिंह, जालंधर

—हां, फ्रैंकलिन टेंपलटन, बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड और यूटीआई म्यूचुअल फंडों की ऐसी योजनाएं उपलब्ध हैं। ये सब हाइब्रिड स्कीम हैं जिसके अंतर्गत इक्विटी में 40 प्रतिशत का निवेश किया जाता है। समय के साथ राशि संचित होती रहती है और रिटायरमेंट के समय आपको इसका भुगतान किया जाता है। हालांकि, आयकर में छूट न मिलने की वजह से अधिकांश एसेट मैनेजमेंट कंपनियों ने ऐसी योजनाओं में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। इसके बावजूद आपको अन्य उत्पादों के साथ आयकर अधिनियम की धारा 80सी का लाभ मिलता है।

ऐसी योजनाओं का ऐतिहासिक रिटर्न 10-13 प्रतिशत रहा है। लिक्विडीटी के नजरिये से म्यूचुअल फंडों की ये योजनाएं जीवन बीमा कंपनियों की पेंशन योजनाओं से भिन्न हैं। अगर आप संतुष्ट नहीं हैं तो म्यूचुअल फंडों से 3 साल बाद निकासी कर सकते हैं जबकि बीमा कंपनियों के पेंशन प्लान में यह सुविधा नहीं है। मेरा सुझाव होगा कि रिटायरमेंट के लिए आप केवल पेंशन योजनाओं पर निर्भर न हों। बढिय़ा रहेगा कि आप अच्छे डाइवर्सिफायड फंडों में मासिक निवेश करें ताकि सेवानिवृत्ति के लिए एक अच्छा कोष बना पाएं। आप पब्लिक प्रोविडेंट फंड या पीपीएफ में निवेश करने पर भी विचार कर सकते हैं क्योंकि अच्छे रिटर्न के साथ-साथ परिपक्वता पर मिलने वाली रकम कर-मुक्त होती है। 

मैं एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हूं और मेरी उम्र 61 साल है। मैं एक रूढि़वादी निवेशक की तरह बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करता आया हूं। मुझे 50,000 रुपये का निवेश कर-बचत के लिए और 50,000 रुपये का निवेश ग्रोथ के लिए करना हे। मैंने आपके अखबार में म्यूचुअल फंडों के बारे में खूब पढ़ा है और मैं उनमें निवेश करना चाहता हूं। कृपया मुझे मरी उम्र के हिसाब से म्यूचुअल फंड योजनाओं के बारे में बताइए। मैं कम से कम 5 साल के लिए निवेश करना चाहता हूं। -तेजपाल सिंह, चंडीगढ़ 

—खुदरा निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड एक अच्छा विकल्प है क्योंकि बाजार में विभिन्न योजनाएं उपलब्ध हैं जिनका चयन डाइवर्सिफिकेशन और समय-सीमा के हिसाब से किया जा सकता है। पहली बार निवेश करने जा रहे लोगों के लिए योजना का चयन काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर गलत योजना का चयन किया गया तो असंतुष्टि हाथ लगेगी और इस प्रकार म्यूचुअल फंडों में निवेश से मोह भी भंग हो जाएगा।

जहां तक आयकर में बचत की बात है तो मैं आपको एचडीएफसी टैक्स सेवर फंड, फ्रैंकलिन इंडिया टैक्स शील्ड और फिडेलिटी टैक्स एडवांटेज की सलाह दूंगा। लार्ज कैप पर फोकस्ड ये फंड आपको स्थिर रिटर्न देते हैं। अन्य निवेश के विकल्प के तौर पर एचडीएफसी प्रूडेंस और रिलायंस रेग्युलर सेविंग्स बैलेंस्ड फंड पर विचार कर सकते हैं। ये फंड 30 से 35 प्रतिशत तक का निवेश डेट में करते हैं और बाजार में गिरावट आने के दिनों में घाटे से रक्षा करते हैं। इन फंडों के प्रदर्शन डाइवर्सिफायड इक्विटी फंडों के प्रदर्शन से बढिय़ा रहा है और आपके निवेश की समय-सीमा को देखते हुए इन पर विचार किया जा सकता है।

मेरी उम्र 65 साल है और 25 साल से मैं एक एनआरआई हूं। मैं अभी तक सारी बचत एफसीएनआर के जरिये करता आया हूं। अब ब्याज दरें घट कर काफी कम हो गई हैं। अब मैं म्यूचुअल फंडों में निवेश कर ज्यादा रिटर्न हासिल करना चाहता हूं। मैं मासिक रिटर्न पर विचार कर रहा हूं कृपया मेरा मार्गदर्शन करें। -जगदीश खट्टर, दिल्ली

—आप पहली बार निवेश करने की सोच रहे हैं ऐसे में बढिय़ा रहेगा कि आप कम से कम 5 साल की समय-सीमा लेकर चलें और अच्छे डाइवर्सिफायड इक्विटी फंडों में निवेश करें। बिड़ला सन लाइफ फ्रंटलाइन इक्विटी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फोकस्ड ब्लू-चिप इक्विटी, रिलायंस रेग्युलर सेविंग्स इक्विटी, डीएसपी बीआर टॉप 199 इक्विटी और एचडीएफसी टॉप 200 ऐसे फंड हैं जिन पर आप निवेश के नजरिये से विचार कर सकते हैं।

अपने पोर्टफोलियो का रिटर्न बढ़ाने के लिए आप आईडीएफसी प्रीमियर इक्विटी और डीएसपी ब्लैक रॉक स्मॉल और मिड कैप जैसे मिड कैप फंडों में कुछ पैसों का निवेश कर सकते हैं। एमआईपी या मंथली इनकम प्लान ऐसी योजनाएं हैं जो इक्विटी में 0-35 प्रतिशत और शेष का निवेश डेट में करते हैं। इनमें मासिक रूप से लाभांश घोषित करने का विकल्प होता है लेकिन यह जरूरी नहीं हैं। जब बाजार परिस्थितियां अनुकूल नहीं होतीं तो ऐसी योजनाएं लाभांश नहीं देती हैं।

हालांकि, कुछ अच्छी एमआईपी योजनाएं भी हैं तो लगातार लाभांश देती आई हैं भले ही बाजार परिस्थितियां बुरी ही क्यो न रही हों। एक एनआरआई होने के नाते आपके पास और कोई विकल्प नहीं है इसलिए आप एमआईपी पर विचार कर सकते हैं।

मैं 5-10 साल की अवधि के लिए 8,000 रुपये प्रति महीेन का निवेश करना चाहता हूं। मैं अभी एचडीएफसी टॉप 200 फंड में सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (सिप) के जरिये प्रति महीने 2,000 रुपये का निवेश कर रहा हूं। मेरी उम्र 30 साल है। कृपया सलाह दें कि क्या सिप शुरू करने की यह सही उम्र है और कौन सा स्कीम मुझे अच्छा रिटर्न दे पाएगा? -अवनीत, जयपुर

—सबसे पहली बात तो यह है कि जब आप सिप के जरिये इक्विटी में निवेश की शुरुआत करते हैं तो कोई भी वक्त सही या गलत नहीं होता है। समय-सीमा निवेश को प्रभवित करता है और इसी के आधार पर योजनाओं का चयन भी किया जाता है। आपके निवेश की समय-सीमा लंबी है और अगर आप आज निवेश की शुरुआत करते हैं तो आपके पैसों में अच्छी बढ़ोतरी होगी। एचडीएफसी टॉप 200 एक मल्टी-कैप फंड है जो प्रमुख रूप से लार्ज कैप शेयरों में निवेश करता है। रिस्क-रिटर्न के नजरिये से देखें तो यह एक अच्छा फंड है। इसके प्रदर्शन ने किसी निवेश को निराश नहीं किया है।

आप रिलायंस रेग्युलर सेविंग्स फंड या आईसीआईसीआई प्रू फोकस्ड ब्लू-चिप पर भी विचार कर सकते हैं। इससे आपके निवेश पोर्टफोलियो में स्थिरता आएगी। आपके निवेश की समय-सीमा 10 वर्षों की है इसलिए मिड कैप फंडों में निवेश कर आप अधिक रिटर्न अर्जित कर सकते हैं। आईडीएफसी प्रीमियर इक्विटी, डीएसपी ब्लैक रॉक स्मॉल एंड मिड कैप फंड और आईसीआईसीआई डिस्कवरी कुछ ऐसे फंड हैं जिनमें सिप के जरिये निवेश करने पर आप विचार कर सकते हैं। हालांकि, आपको मिड और स्मॉल कैप सेक्टर में अपने कुल पोर्टफोलियो के 25 से 30 प्रतिशत का ही निवेश करना चाहिए।

मैं सिप के जरिये प्रति महीने 1,000 रुपये रिलायंस ग्रोथ, एसबीआई कॉन्ट्रा और सुंदरम एनर्जी फंड में निवेश कर रहा हूं। क्या इन फंडों में निवेश जारी रखा जा सकता है? इसके अतिरिक्त मैं बीएसएल डिविडेंड यील्ड, डीएसपी टॉप 100 इक्विटी और रिलायंस स्मॉल कैप फंड में निवेश करना चाहता हूं। कृपया उचित पोर्टफोलियो बनाने में मेरी मदद करें। -रंजीत, पानीपत

—रिलायंस ग्रोथ एक मिड कैप फंड है जिसने बीते दिनों में निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। साल 2009 केवल अपवाद रहा है, शेष वर्षों में इसने लगातार अच्छा रिटर्न दिया है। दूसरी तरफ एसबीआई कॉन्ट्रा वैसे अंडरवैल्यूड शेयरों में निवेश करता है जिनके कल लार्ज कैप बनने की संभावना अधिक है।

हालांकि, दो वर्षों का समय किसी म्यूचुअल फंड योजना के बारे में निर्णय लेने के लिए काफी कम है। आपको इन दोनों फंडों में अपना सिप जारी रखना चाहिए लेकिन नियमित तौर पर इनकी समीक्षा जरूर कीजिए। सुदरम एनर्जी एक सेक्टोरल फंड है जिसका प्रदर्शन तभी बेहतर होगा जब सेक्टर का प्रदर्शन अच्छा होता है। अगर इसमें तेजी नहीं आती तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी।

आपके पोर्टफोलियो में पहले से ही मिड कैप फंड हैं इसलिए आपको बिड़ला सन लाइफ फ्रंटलाइन इक्विटी, डीएसपी बीआर टॉप 100 इक्विटी जैसे लार्ज कैप फंडों को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करना चाहिए ताकि डाइवर्सिफिकेशन का लाभ मिल पाए।

अन्य जिन फंडों का आपने चयन किया है उनमें पहले दो अच्छे फंड हैं जिससे आपके पोर्टफोलियो को स्थिरता मिलेगी। रिलायंस स्मॉल कैप नया फंड है और अभी इसका प्रदर्शन देखा जाना बाकी है। हालांकि, यह आपके रिटर्न में इजाफा कर सकता है। कुल मिला कर आपका पोर्टफोलियो अच्छा है। मेरी सलाह होगी कि आप 70-75 प्रतिशत का निवेश लार्ज कैप फंडों में करें और मिड तथा स्मॉल कैप फंडों में 20 से 25 प्रतिशत का ही निवेश करें।

मैंने सिप के जरिये टैक्स सेविंग स्कीम में 1,00,000 रुपये का निवेश किया है। जून में इस निवेश के तीन साल पूरे हो जाएंगे। क्या मैं अपने यूनिटों को भुना सकता हूं? अगर हां तो इसकी क्या प्रक्रिया है। -नीरज वर्मा, जयपुर

ईएलएसएस या इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम धारा 80सी के तहत आपको अधिकतम एक लाख रुपये तक का लाभ आयकर में देते हैं। आप चाहें तो एकमुश्त निवेश करें या सिप के जरिये निवेश करें। हालांकि, जब आप सिप के जरिये निवेश करते हैं तो तो आपके निवेश की प्रत्येक किस्त 3 साल के लिए लॉक हो जाती है। उदाहरण के लिए आपने दो सालों तक सिप के जरिये निवेश किया और अंतिम किस्त आपने जून 2010 में दी तो उस किसत को आप जून 2013 में ही भुना सकते हैं। आप अपनी परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी से संपर्क कर यूनिटों को भुना सकते हैं।

लंबी समयावधि के लिए (१० से १५ साल) गोल्ड ईटीएफ में निवेश करना बेहतर होगा या रिलायंस गोल्ड सेविंग फंड में? -घनश्याम, भोपाल

—गोल्ड ईटीएफ या एक्सचेंज ट्रेडेड योजनाओं की लिस्टिंग स्टॉक एक्सचेंजों में होती है और इनका शेयरों की तरह ही कारोबार किया जाता है। एनएवी सूचीबद्ध कीमतों में जो रियल टाइम अंतर होता है उसके माध्यम से निवेशक अधिक लाभ कमा सकता है। ईटीएफ में निवेश करने के लिए आपको डीमैट खाता खुलवाना जरूरी होता है। रिलायंस गोल्ड सेविंग फंड एक ऐसा फंड है जो स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध विभिन्न गोल्ड ईटीएफ योजनाओं में निवेश करता है। आपको इसके लिए डीमैट या ट्रेडिंग खाता खुलवाने की आवश्यक्ता नहीं होती है।

दोनों योजनाओं में लगने वाले खर्चों में भिन्नता है। गोल्ड ईटीएफ में ट्रैकिंग एरर सबसे कम होती है। गोल्ड सेविंग योजना में आपको दो बार पैसा खर्च करना पड़ता है। दोनों योजनाओं में १० से १५ साल की अवधि में खर्चों का अंतर लगभग ०.५ प्रतिशत रहता है। यदि आप स्टॉक एक्सचेंज की ट्रेडिंग पर लगातार नजर रखते हैं तो आपके लिए ईटीएफ बेहतर है और यदि आप नियमित रूप से एसआईपी जैसी योजनाओं में निवेश करते हैं तो रिलायंस गोल्ड सेविंग योजना को चुनें।

मैं एफएमपी में होने वाले इंडेक्सेशन बेनिफीट को उचित प्रकार से समझ नहीं पाता लेकिन यदि मैं १३ माह का एफएमपी साल के किसी भी समय लेता हूं तो यह दो वित्तीय वर्षों में बंट जाएगा और इंडेक्सेशन से अधिक लाभ प्राप्त होगा? मैंने आपके अखबार में एक आर्टिकल पढ़ा था कि इंडेक्सेशन का ज्यादा लाभ लेने के लिए मार्च के महीने में एफएमपी में निवेश करना ज्यादा अच्छा रहता है।
– राधिक गुप्ता, चंडीगढ़

—इंडेक्सेशन का लाभ वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) के आधार पर दिया जाता है, कैलेंडर वर्ष (जनवरी-दिसंबर) के आधार पर नहीं। यदि आप मार्च २००९ में निवेश करती हैं तो अपका समय अप्रैल २०११ में पूरा होता है। आपका निवेश तीन वित्त वर्षों मे रहा अत: आपको दोहरे इंडेक्सेशन का लाभ प्राप्त होगा। यदि आप मार्च में १३ माह के एफएमपी में निवेश करती हैं तो यह अगले साल के अप्रैल माह में परिपक्व होगा अर्थात तीन वित्त वर्ष में। अत: आपको दोहरे इंडेक्सेशन का लाभ अवश्य प्राप्त होगा। किंतु यदि आपका एफएमपी अप्रैल २००९ में प्रारंभ हो रहा है तो फंड में निवेश दो वित्तीय वर्षों के लिए होगा और आपको दोहरे इंडेक्शन का लाभ प्राप्त नहीं होगा। अत: यह सलाह है कि १३ माह के एफएमपी में मार्च माह के दौरान निवेश करना उचित होगा।

डिविडेंड (लाभांश) ऑप्शन व ग्रोथ ऑप्शन का क्रूा अर्थ होता है। निम्न टैक्स दर के लिए क्या सदैव ग्रोथ ऑप्शन बेहतर रहता है? -ओमकार, जयपुर

—प्रत्येक म्यूचुअल फंड में ग्रोथ व डिविडेंड दो प्रकार के विकल्प उपलब्ध रहते हैं। ग्रोथ ऑप्शन में आपकी कैपिटल गेन का पुन: निवेश कर दिया जाता है। इस प्रकार से आपके एमएफ का निवेश लगातार बढ़ता रहता है। आपको इस योजना सेलाभ या हानि तभी प्राप्त होती है जब आप इससे निकासी करते हैं। इस पर लगने वाला टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि ग्रोथ योजना इक्विटी है या डेट। वहीं डिविडेंड ऑप्शन में जब किसी योजना से एएमसी को पर्याप्त लाभ प्राप्त होता है तो वह निवेशकों को लाभांश के रूप में मुनाफे को बराबर बांट देता है।

यह लाभांश कर मुक्त होता है। डिविडेंड योजना में अंतर यह होता है कि कंपनी पहले लाभांश वितरण कर का भुगतान करती है उसके बाद निवेशकों को लाभांश बांटती है। आप अपनी आवश्यकता के अनुसार योजना का चुनाव कर सकते हैं। यदि आप लगातार लाभ चाहते हैं तो डिविडेंड ऑप्शन बेहतर है और यदि आप लंबी अवधि १० से १५ साल का निवेश व अधिक रिटर्न चाहते हैं तो ग्रोथ ऑप्शन का चुनाव करें।

मैंने जनवरी २००८ में एक यूलिप प्लान खरीदा था जिसकी सालाना प्रीमियम १५,००० रुपये है। मैने प्रीमियम भुगतान की अनिवार्य अवधि पूरी कर ली है। इसके तहत मुझे ३ लाख रुपये का बीमा कवर मिला हुआ है। क्या मुझे इसमें अपना निवेश जारी रखना चाहिए? – अंकुर, रायपुर 

—आर्थिक जीवन में बीमा योजनाओं का स्थान काफी महत्वपूर्ण होता है। आपको यह जानना चाहिए की इस प्लान से आपके परिवार को कितनी सुरक्षा प्राप्त हो रही है। आपने अपने बीमा योजनाओं का कोई उल्लेख नहीं किया है। यदि आपने बेहतर बीमा प्लान ले रखा है तो मेरा यह मानना है कि यूलिप में निवेश रोका जा सकता है। अब आपने इस योजना का अनिवार्य हिस्सा पूरा कर लिया है अत: अब यदि आप इसमें से पैसा निकालते हैं या इस योजना को सरेंडर करते है तब भी आपके टैक्स छूटों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वैसे यूलिप योजना १५ साल या उससे अधिक समय के लिए होती है।

यदि आपने कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से इसमें निवेश किया है तो यह गलत निर्णय है। यदि आप इसमें लंबे समय तक बने रहेंगे तो यह आपको बेहतर रिटर्न देने में सक्षम है। इसके लिए आप किसी बेहतर वित्तीय योजनाकार से संपर्क करें।

मेरे पास भारतीए एक्सा लाइफ इंश्योरेंस की एक पॉलिसी है। यह प्लान 10 साल का है और यह 7वें साल के बाद से रिटर्न देना शुरू करेगा। साथ ही मेरी इस पॉलिसी पर 5 साल में एक बार 5 प्रतिशत का रिटर्न दिया जाएगा। मुझे इस पॉलिसी का नाम याद नहीं है। मैं अपने बच्चे के लिए 2,000 रुपये प्रति महीने का निवेश करना चाहता हूं। कृपया कोई अच्छी पॉलिसी सुझाएं।
-राघवेंद्र यादव, पानीपत

—आप जिस पॉलिसी का जिक्र कर रहे हैं उसका नाम भारती एक्सा ट्रू वेल्थ प्लान है। यह 10 साल की पॉलिसी है जो आपको शुरुआती 7 वर्षों के अधिकतम एनएवी या 12 रुपये के एनएवी की गारंटी देती है। बीते दिनों ऐसी पॉलिसियों ने लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया है। एनएवी की गारंटी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती रही है क्योंकि ये इसे इक्विटी बाजार की गारंटी समझते हैं। हालांकि, यह याद रखें कि न तो कोई कंपनी और न ही कोई फंड प्रबंधक शेयरों से रिटर्न की गारंटी दे सकता है। इसके अतिरिक्त गौर कीजिएगा कि यह पॉलिसी आपको एनएवी की गारंटी दे रही है न कि रिटर्न की।

इसलिए अगर १० साल में अगर अधिकतम एनएवी 15 रुपये हो जाता है तो वे अपने वादे के मुताबिक आपको भुगतान करेंगे लेकिन आपको मिलने वाला प्रभावी रिटर्न केवल 3-4 प्रतिशत होगा। गारंटीड एनएवी की कीमत चुकानी होती है और इस पॉलिसी के तहत आप अपने फंड से सालाना 0.35 प्रतिशत का भुगतान करते हैं।

अगर आपने पॉलिसी के दस्तावेज गंभीरता से पढ़ें तो मालूम होगा कि फंड मैनेजर अगर चाहे तो इक्विटी में निवेश घटा कर शून्य भी कर सकता है। ऐसा अंतर्निहित नीति के तहत होता है जहां फंड मैनेजर न्यूनतम एनएवी की सुरक्षा के लिए निवेश को इक्विटी से डेट में स्विच कर सकता है। इसलिए, फंड प्रबंधक पॉलिसी के शेष वर्षों में डेट में निवेशित रह सकता है। इस प्रकार फंड मैनेजर आपको एनएवी की गारंटी डेट के बलबूते देता है न कि इक्विटी के भरोसे।

आपका लक्ष्य अपने बच्चे के भविष्य के लिए निवेश करना है इसलिए जरूरत इस बात की है कि आपको निवेश का अधिकतम ग्रोथ हो। किसी पॉलिसी में निवेश करने की जगह आप अपेक्षित रिटर्न के लिए 2,000 रुपये प्रति माह का निवेश सिसटेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान के जरिये म्यूचुअल फंडों में कीजिए। निवेश के लिए आप बिड़ला सन लाइफ फ्रंटलाइन इक्विटी, आईसीआईसीआई फोकस्ड ब्लूचिप इक्विअी, एचडीएफसी टॉप 200 या डीएसपी बीमआर टॉप 100 इक्विटी पर विचार कर सकते हैं।

मैं पिछले 4 साल से एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम कर रहा हूं और मेरी उम्र 25 साल है। इसके बावजूद अभी तक न तो मेरी कोई बचत है और न ही कोई बीमा। उल्टे मेरे ऊपर कर्ज है। मेरा वेतन 5्50 लाख रुपये सालाना है। मैंने इसी महीने बिड़ला सन लाइफ (बीएसएलआई) विजन पॉलिसी 20 साल के लिए ली है, सम एश्योर्ड 7.5 लाख रुपये है और इसका सालाना प्रीमियम 30,000 रुपये है। मैंने पहला प्रीमियम 5,000 रुपये का दिया है। मैं यह स्वीकार करना चाहूंगा कि समाधान पढऩे के बाद मेरी आंखें खुली है। कृपया निम्रलिखित मसलों पर मेरा मार्गदर्शन करें-

1. क्या मुझे बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस विजन में निवेश जारी रखूं या रोक दूं?
2. एनपीएस के बारे में आपकी क्या सलाह है जहां हम बेसिक सैलरी के 10 प्रतिशत का निवेश कर सकते हैं लेकिन 260 रुपये का सालाना शुल्क मुझे ज्यादा लगता है। मैं समझ नहीं पा रहा कि यह एक अच्छा निवेश होगा या नहीं।
3. कंपनी की तरफ से 1 लाख रुपये का मेडिक्लेम मुझे और मेरे माता-पिता को मिला हुआ है। मैं अविवाहित हूं क्या मुझे अलग से मेडिक्लेम पॉलिसी लेनी चाहिए?
4. मैं एक लाख रुपये सालाना बचाना चाहता हूं। मैंने 50,000 रुपये पीपीएफ में निवेश करने का निर्णय किया है। शेष 30,000 रुपये का निवेश कहां करूं?
-राजेश चौहान, जोधपुर

बीएसएलआई विजन एक पारंपरिक व्होल लाइफ प्लान है जो 100 साल की उम्र तक जारी रहता है। आप इस प्रोडक्ट से सालाना 5-6 प्रतिशत के रिटर्न की उम्मीद कर सकते हैं। यही एक कारक इसे अन्य प्रोडक्ट्स की तुलना में महंगा बनाता है क्योंकि आप निवेश के अन्य उपकरणों से कहीं अधिक रिटर्न पा सकते हैं। पारंपरिक जीवन बीमा योजनाओं के सरेंडर शुल्क शुरुआती वर्षों में काफी अधिक होते हैं। इसे सरेंडर करना संभव नहीं है क्योंकि आपने जो प्रीमियम दिया है उससे हाथ धोना होगा। तीन साल तक प्रीमियम देने के बाद आप अपनी पॉलिसी को पेड-अप करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, उम्र के जिस पड़ाव में आप हैं उसमें विशुद्ध जीवन बीमा पॉलिसी आपको काफी सस्ती मिलेगी। आपके ऊपर माता-पिता निर्भर हैं, इसलिए एक उचित सम एश्योर्ड का टर्म इंश्योरेंस सबसे पहले खरीदें। शादी होने या जिम्मदारियां बढऩे के बाद इसमें और इजाफा करें।

इस उम्र में आपके पास अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पर्याप्त समय है। चक्रवृद्धि के जरिये धन बनाने के लिए समय की जरूरत होती है। यही वह उम्र है जब आपको अपने जीवन के लक्ष्यों का निर्णय करने के बाद उसके लिए आवंटन शुरू कर देना चाहिए। आपने अपने खर्च के बारे में नहीं बताया है इसलिए मैं आपको बचत के बारे में पूरी तरह तो नहीं बता सकता लेकिन यह सलाह दूंगा कि आपकी अधिकांश बचत इक्विटी में होनी चाहिए। इस उम्र में 80 प्रतिशत इक्विटी में और 20 फीसदी डेट में निवेश किया जा सकता है।

एनपीएस एक अच्छी योजना है। यह सेवानिवृत्ति योजना में सहायक है और इसके खर्चे काफी कम हैं। सालाना 260 रुपये का शुल्क किसी भी अन्य योजना के मुकाबले कम है। हालांकि, एनपीएस के तहत आप 50 प्रतिशत से अधिक का निवेश इक्विटी में नहीं कर सकते। लेकिन अभी आपके पास वक्त है। आप एनपीएस में निवेश करने के साथ-साथ सिप के जरिये इक्विटी म्यूचुअल फंडों में निवेश करते रहें।

लंबी समयावधि के लिए (१० से १५ साल) गोल्ड ईटीएफ में निवेश करना बेहतर होगा या रिलायंस गोल्ड सेविंग फंड में? -घनश्याम, भोपाल

—गोल्ड ईटीएफ या एक्सचेंज ट्रेडेड योजनाओं की लिस्टिंग स्टॉक एक्सचेंजों में होती है और इनका शेयरों की तरह ही कारोबार किया जाता है। एनएवी सूचीबद्ध कीमतों में जो रियल टाइम अंतर होता है उसके माध्यम से निवेशक अधिक लाभ कमा सकता है। ईटीएफ में निवेश करने के लिए आपको डीमैट खाता खुलवाना जरूरी होता है। रिलायंस गोल्ड सेविंग फंड एक ऐसा फंड है जो स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध विभिन्न गोल्ड ईटीएफ योजनाओं में निवेश करता है। आपको इसके लिए डीमैट या ट्रेडिंग खाता खुलवाने की आवश्यक्ता नहीं होती है।

दोनों योजनाओं में लगने वाले खर्चों में भिन्नता है। गोल्ड ईटीएफ में ट्रैकिंग एरर सबसे कम होती है। गोल्ड सेविंग योजना में आपको दो बार पैसा खर्च करना पड़ता है। दोनों योजनाओं में १० से १५ साल की अवधि में खर्चों का अंतर लगभग ०.५ प्रतिशत रहता है। यदि आप स्टॉक एक्सचेंज की ट्रेडिंग पर लगातार नजर रखते हैं तो आपके लिए ईटीएफ बेहतर है और यदि आप नियमित रूप से एसआईपी जैसी योजनाओं में निवेश करते हैं तो रिलायंस गोल्ड सेविंग योजना को चुनें।

मैं एफएमपी में होने वाले इंडेक्सेशन बेनिफीट को उचित प्रकार से समझ नहीं पाता लेकिन यदि मैं १३ माह का एफएमपी साल के किसी भी समय लेता हूं तो यह दो वित्तीय वर्षों में बंट जाएगा और इंडेक्सेशन से अधिक लाभ प्राप्त होगा? मैंने आपके अखबार में एक आर्टिकल पढ़ा था कि इंडेक्सेशन का ज्यादा लाभ लेने के लिए मार्च के महीने में एफएमपी में निवेश करना ज्यादा अच्छा रहता है।
– राधिक गुप्ता, चंडीगढ़

—इंडेक्सेशन का लाभ वित्त वर्ष (अप्रैल-मार्च) के आधार पर दिया जाता है, कैलेंडर वर्ष (जनवरी-दिसंबर) के आधार पर नहीं। यदि आप मार्च २००९ में निवेश करती हैं तो अपका समय अप्रैल २०११ में पूरा होता है। आपका निवेश तीन वित्त वर्षों मे रहा अत: आपको दोहरे इंडेक्सेशन का लाभ प्राप्त होगा। यदि आप मार्च में १३ माह के एफएमपी में निवेश करती हैं तो यह अगले साल के अप्रैल माह में परिपक्व होगा अर्थात तीन वित्त वर्ष में। अत: आपको दोहरे इंडेक्सेशन का लाभ अवश्य प्राप्त होगा। किंतु यदि आपका एफएमपी अप्रैल २००९ में प्रारंभ हो रहा है तो फंड में निवेश दो वित्तीय वर्षों के लिए होगा और आपको दोहरे इंडेक्शन का लाभ प्राप्त नहीं होगा। अत: यह सलाह है कि १३ माह के एफएमपी में मार्च माह के दौरान निवेश करना उचित होगा।

डिविडेंड (लाभांश) ऑप्शन व ग्रोथ ऑप्शन का क्रूा अर्थ होता है। निम्न टैक्स दर के लिए क्या सदैव ग्रोथ ऑप्शन बेहतर रहता है? -ओमकार, जयपुर

—प्रत्येक म्यूचुअल फंड में ग्रोथ व डिविडेंड दो प्रकार के विकल्प उपलब्ध रहते हैं। ग्रोथ ऑप्शन में आपकी कैपिटल गेन का पुन: निवेश कर दिया जाता है। इस प्रकार से आपके एमएफ का निवेश लगातार बढ़ता रहता है। आपको इस योजना सेलाभ या हानि तभी प्राप्त होती है जब आप इससे निकासी करते हैं। इस पर लगने वाला टैक्स इस बात पर निर्भर करता है कि ग्रोथ योजना इक्विटी है या डेट। वहीं डिविडेंड ऑप्शन में जब किसी योजना से एएमसी को पर्याप्त लाभ प्राप्त होता है तो वह निवेशकों को लाभांश के रूप में मुनाफे को बराबर बांट देता है।

यह लाभांश कर मुक्त होता है। डिविडेंड योजना में अंतर यह होता है कि कंपनी पहले लाभांश वितरण कर का भुगतान करती है उसके बाद निवेशकों को लाभांश बांटती है। आप अपनी आवश्यकता के अनुसार योजना का चुनाव कर सकते हैं। यदि आप लगातार लाभ चाहते हैं तो डिविडेंड ऑप्शन बेहतर है और यदि आप लंबी अवधि १० से १५ साल का निवेश व अधिक रिटर्न चाहते हैं तो ग्रोथ ऑप्शन का चुनाव करें।

मैंने जनवरी २००८ में एक यूलिप प्लान खरीदा था जिसकी सालाना प्रीमियम १५,००० रुपये है। मैने प्रीमियम भुगतान की अनिवार्य अवधि पूरी कर ली है। इसके तहत मुझे ३ लाख रुपये का बीमा कवर मिला हुआ है। क्या मुझे इसमें अपना निवेश जारी रखना चाहिए? – अंकुर, रायपुर 

—आर्थिक जीवन में बीमा योजनाओं का स्थान काफी महत्वपूर्ण होता है। आपको यह जानना चाहिए की इस प्लान से आपके परिवार को कितनी सुरक्षा प्राप्त हो रही है। आपने अपने बीमा योजनाओं का कोई उल्लेख नहीं किया है। यदि आपने बेहतर बीमा प्लान ले रखा है तो मेरा यह मानना है कि यूलिप में निवेश रोका जा सकता है। अब आपने इस योजना का अनिवार्य हिस्सा पूरा कर लिया है अत: अब यदि आप इसमें से पैसा निकालते हैं या इस योजना को सरेंडर करते है तब भी आपके टैक्स छूटों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। वैसे यूलिप योजना १५ साल या उससे अधिक समय के लिए होती है।

यदि आपने कम समय में अधिक मुनाफा कमाने के उद्देश्य से इसमें निवेश किया है तो यह गलत निर्णय है। यदि आप इसमें लंबे समय तक बने रहेंगे तो यह आपको बेहतर रिटर्न देने में सक्षम है। इसके लिए आप किसी बेहतर वित्तीय योजनाकार से संपर्क करें।

मेरी उम्र 27 साल है और मेरी कमाई 20,000 रुपये प्रति माह है। अपने विभिन्न खर्चों के बाद में प्रति महीने 7,000 रुपये बचा लेता हूं। मैं म्यूचुअल फंडों में सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान के जरिये निवेश शुरू करना चाहता हूं। हालांकि, मैं 20 साल के लिए निवेश करना चाहता हूं लेकिन चिंता इस बात की है कि कहीं इक्विटी मेरी पूरी बचत का सफाया न कर दे। कृपया मार्गदर्शन करें और यह भी बताएं कि मुझे किन फंडों में निवेश करना चाहिए? -रूपेंद्र सिंह, दिल्ली

—इक्विटी में निवेश करने के लिहाज से म्यूचुअल फंड काफी सुविधाजनक हैं क्योंकि इनमें निवेश की शुरुआत छोटी राशि से भी की जा सकती है और साथ ही आपको डाइवर्सिफिकेशन का लाभ भी मिलता है। हालांकि, म्यूचुअल फंड किसी तरह के रिटर्न की गारंटी नहीं देते। लेकिन दीर्घावधि में बात की संभावना काफी कम हो जाती है कि आपकी सुरक्षित न रहे। अगर हम ऐतिहासिक तौर पर देखें तो कोई निवेशक जो पिछले 15 वर्षों से इक्विटी में निवेश कर रहा है, उसे नकारात्मक रिटर्न मिलने की संभावना नगण्य रही है। इस प्रकार, शायद ही कोई डाइवर्सिफायड इक्विटी फंड हो जिसने इतनी लंबी अवधि में ऋणात्मक रिटर्न दिया हो, वह भी सिप के माध्यम से। आप 15 साल के लिए निवेश करने जा रहे हैं, इसलिए आपको पूंजी की सुरक्षा को लेकर चिंतित नहीं होना चाहिए।

अपको विभिन्न इक्विटी योजनाओं में में निवेश करने के साथ-साथ्ज्ञ ऋण में निवेश कर अपने पोर्टफोलियो को संतुलित करना चाहिए। इस प्रकार आप अपने रिस्क को डाइवर्सिफाइ करते हैं। सिप के जरिये निवेश का लाभ यह है कि आपकी लागत औसत हो जाती है और साथ ही कंपाउंडिग का लाभ भी मिलता है जो धन-संचय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आप एचडीएफसी इक्विटी, आईसीआईसीआई फोकस्ड ब्लूचिपइक्विटी फंड, आईडीएफसी प्रीमियर इक्विटी और एचडीएफस्ी प्रूडेंस फंड में निवेश पर विचार कर सकते हैं। इस चयन से आप इक्विटी बाजार के विभिन्न श्रेणियों में निवेश कर पाएंगे साथ ही आपके पोर्टफोलियो भी कुछ हद तक गिरावट से सुरक्षित रहेगा।

मेरी उम्र 40 साल है और मेरा खुद का एक छोटा सा बिजनेस है। मैं 10 लाख रुपये बचा पाया हूं। मैं इन पैसों का निवेश 10-15 साल के लिए करना चाहता हूं जो मेरे लिए सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन फंड का काम करेगा। क्या आप कुछ शेयरों का सुझाव देंगे या निवेश का कोई दूसरा जरिया बताएं? -राजेंद्र तनवर, अंबाला सिटी

—सेवानिवृत्ति जैसे लंबी समयावधि के लक्ष्य के लिए इक्विटी एक बेहतरीन जरिया है। चक्रवृद्धि की वजह से निवेश का यह जरिया अच्छे धन-कोश बनाने के नजरिये से सबसे बढिय़ा है। हालांकि, अपने भविष्य के लिए अच्छी कंपनी का चयन करने के लिए आपको न केवल शोध करना होगा बल्कि आपको इस क्षेत्र की विशेषज्ञता भी चाहिए। कुछ ब्रोकरों की सलाह पर भी भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि उनकी दिलचस्पी आपके अल्पावधि के फंडों में अधिक होती है। इसलिए इक्विटी में निवेश के लिए प्रोफेशनल मैनेजमेंट का सहारा लेने की सलाह दी जाती है।

इक्विटी में सीधे निवेश के लिए आपके पास पोर्टफोलियो मैनेजमेंट स्कीम का विकलप है लेकिन ये काफी महंगे होते हैं और जिस तरह की प्रोफेशनल सलाह आप चाहते हैं उसका भी अभाव होता है। दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड म्यूचुअल फंड आपको अपनी जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश की समय-सीमा के हिसाब से विकल्प उपलब्ध कराता है। विभिन्न सेक्टरों की योजनाओं में निवेश से आपको डाइवर्सिफायड पोर्टफोलियो बनाने में मदद मिलती है। इसलिए, किसी शेयर में निवेश से पहले शोध का सहारा लीजिए। अगर आप सीधे इक्विटी में निवेश की सलाह से संतुष्ट नहीं हैं तो म्यूचुअल फंड का रास्ता अपनाइए।

http://business.bhaskar.com/article/for-twenty-years-what-do-i-invest-in-funds-2187834.html

मेरी उम्र 45 वर्ष और मैं वेतनभोगी हूं। मेरी दो बेटियां हैं जिनकी उम्र क्रमश: 11 साल और 18 महीने है। मुझे निवेश के ऐसे विकल्प के बारे में बताइए जिसमें जोखिम सीमित हो और निवेश सुरक्षित रहे। साथ ही बच्चे की पढ़ाई के लिए कोष बनाने के लिए मुझे कहां निवेश करना चाहिए?  -डी. एस. ढींगरा, चंडीगढ़

—बच्चों की अच्छी शिक्षा किसी भी माता-पिता का प्राथमिक ध्येय होता है। प्रत्येक वर्ष शिक्षा की लागत बढऩे के साथ ही यह जरूरी है कि इस उद्येश्य से ऐऐ परिसंपत्ति वर्ग का चयन किया जाए जो महंगाई को मात देते हुए अपेक्षित कोष जमा करने में मदद कर सके। हालांकि, परिसंपत्ति आवंटन के लिए लक्ष्य की समय-सीमा सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।

बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए आपके पास 5-15 साल का वक्त है। इक्विटी और रियल एस्टेट ऐसे परिसंपत्ति वर्ग हैं जो दीर्घावधि में अच्छा रिटर्न दे सकते हैं। रियल एस्टेट को बेचना आसान नहीं है साथ ही इसमें एकमुश्त बड़ी राशि का निवेश करना होता है। इसलिए, अपनी राशि का 70-75 प्रतिशत का आवंटन इक्विटी में करें।

अपनी अपनी बीमा योजनाओं के बारे में जानकारी नहीं दी है। मैं यह मान कर चलता हूं कि आपने पर्याप्त बीमा लिया हुआ होगा। आप कामकाजी है इसलिए इक्विटी में निवेश के लिए शोध करने का न तो वक्त आपके पास होगा और न ही अपेक्षित विशेषज्ञता। इसलिए आपके लिए म्यूचुअल फंडों को माध्यम बनाना अच्छा रहेगा।

अच्छे उाइवर्सिफायड इक्विटी फंडों जैसे आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फोकस्ड ब्लूचित इक्विटी, डीएसपीबीआर टॉप 100 इक्विटी और रिलायंस रेज्युलर सेविंज्स इक्विटी आदि के साथ एचडीएफसी प्रूडेंस जैसे बैलेंस्ड फंडों को चुनें। इनसे रिटर्न की निरंतरता तो बनी ही रहेगी, गिरावट की संभावना भी कम रहेगी।

अपने पोर्टफोलियो में आपको कुछ मिड कैप फंड जैसे डीएसपीबीआर स्मॉल एंड मिड कैप फंड या आईडीएफसी प्रीमियर इक्विटी को भी शामिल करना चाहिए ताकि पोर्टफोलियो पर अधिक रिटर्न पाया जा सके। ऐसे पोर्टफोलियो पर आप 12-15 प्रतिशत का रिटर्न पा सकेंगे। इसके अलावा आपको पीपीएफ जैसे निश्चित रिटर्न देने वाले उपकरणों में भी निवेश करना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए आप किसी सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर की मदद ले सकते हैं।

मुझे एक एजेंट ने भारतीय जीवन बीमा निगम का मैजिक प्लान लेने की सलाह दी। मेरी उम्र 35 साल और मेरी पत्नी की उम्र 31 साल है। एजेंट ने कहा कि मैं एक-एक लाख रुपये की 20 जीवन आनंद पॉलिसी ले लूं जो क्रमिक तौर पर परिपक्व हो और पॉलिसी मेरे 55वें साल से परिपक्व होनी शुरू हो जाएगी। एजेंट इसे ऑल इन वन बता रहा है जो बीमा, दुर्घटना और सेवानिवृत्ति आदि की जरूरतें पूरी करेगा। मैं आपका बड़ा शुक्रगुजार होउंगा अगर आप इस योजना के संदर्भ में मेरा मार्गदर्शन करें।  -राजीव अस्थाना, इंदौर

—जीवन आनेद पॉलिसी वास्तव में एंडोमेंट और व्होल लाइफ प्लान का मिश्रण है। परिपक्वता के बाद आपका कवर मृत्यु तक बना रहेगा और सम एश्योर्ड की राशि बेसिक सम एश्योर्ड के बराबर होगी। इसके अतिरिक्त अगर पॉलिसीधारक की मृत्यु दुर्घटना के वजह से होती है तो अतिरिक्त सम एश्योर्ड का भुगतान किया जाएगा।

ध्यान रखें कि प्राथमिक तौर पर यह एक एंडोमेंट योजना है जिसके शुल्क अधिक हैं। दुर्घटना और टर्म इंश्योरेंस के लाभ के लिए मोर्टेलिटी चार्ज देना होता है जो इसके प्रीमियम में शामिल होता है। हालांकि, इस पॉलिसी के ट्रेडिशनल होने की वजह से आप इसके वास्तविक शुल्क नहीं जान पाएंगे।

मैं हमेशा अपने क्लाइंट्स को सलाह देता हूं कि बीमा और निवेश को वे अलग-अलग रखें ताकि जब आपका निवेश अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन न कर रहा हो तो आप इसे पुनर्संतुलित कर पाएं। बीमा योजना में आप इस तरह का पुनर्संतुलन नहीं कर सकते। मेरी सलाह होगी कि आप पर्याप्त टर्म इंश्योरेंस लें और निवेश के लिए म्यूचुअल फंडों, पब्लिक प्रोविडेंट फंड आदि का चयन करें। इससे आप अपने निवेश पर अपेक्षित रिटर्न पा सकेंगे।

मैंने आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ का ३० लाख रुपये का टर्म प्लान (आई प्रोटेक्ट) लिया है। मेरी मेडिकल जांच भी कराई गई। मुझे पॉलिसी के दस्तावेज मिल चुके हैं। क्या मैंने सही निर्णय लिया है? -घनश्याम राय, दुर्ग

—टर्म इंश्योरेंस आपके आश्रितों को सस्ते में आर्थिक सुरक्षा उपलब्ध कराता है। डेथ क्लेम के दावों के अनुभव के हिसाब से कई बीमा कंपनियों ने मोर्टेलिटी रेट में कमी की है। ग्राहकों को और अधिक लाभ पहुंचाने के ख्याल से कई कंपनियों ने कम लागत पर ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस के खरीदारी की सुविधा उपलब्ध कराई है।

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल का आई-प्रोटेक्ट भी एक ऐसी टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी है जिसकी ऑनलाइन खरीदारी की जा सकती है। ऑनलाइन पॉलिसी खरीदते समय कुछ बातों पर गौर करना चाहिए। पहला, आपको सेवा देने के लिए कोई एजेंट बीच में नहीं होता। इसका मतलब हुआ कि पॉलिसी के नियम और शर्तें आपको खुद ही समझनी पड़ती है।

दूसरी बात यह है कि आपके परिवार वालों को डॉक्यूमेंटेशन और क्लेम प्रक्रिया की पूरी जानकारी होनी चाहिए। हालांकि, ऑनलाइन पॉलिसी की क्लेम प्रक्रिया का अभी कोई खास अनुभव किसी कंपनी को नहीं है, लेकिन अगर आपने उपरोक्त बातों पर विचार किया हुआ है तो आपकी पॉलिसी बिल्कुल फिट है।

मेरे पिता एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी हैं और उन्होंने पोस्ट ऑफिस के सीनियर सिटिजेन सेविंग स्कीम (पीओएससीएसएस) में दो साल पहले 7 लाख रुपये का निवेश किया था। अब बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले अधिक ब्याज को दखते हुए वह वहां से निकासी कर बैंकों के एफडी में निवेश करना चाहते हैं। क्या यह ठीक रहेगा?   -राहुल चंदौलिया, इंदौर
—पोस्ट ऑफिस का सीनियर सिटिजेन सेविंग स्कीम या पीओएससीएसएस वरिष्ठ नागरिकों के लिए पांच साल की एक योजना है जिस पर 9 प्रतिशत का ब्याज मिलता है। ब्याज से तिमाही आधार पर आय प्राप्त होती है। सात लाख रुपये पर आपके पिताजी को निश्चित रूप से 15,750 रुपये तिमाही प्राप्त हो रहा होगा। एक साल बाद आप मामूली पेनाल्टी देकर इस योजना से निकल सकते हैं।

आपके पिताजी ने निवेश का दो वर्ष पूरा कर लिया है इसलिए वह इस योजना से निकल सकते हैं। पीओएससीएसएस की तुलना में बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट अभी ज्यादा ब्याज दे रहे हैं क्योंकि फिलहाल ब्याज दरों में बढ़ोतरी के हालात हैं। वरिष्ठ नागरिकों को फिक्स्ड डिपॉजिट पर अधिक लाभ मिल रहा है। लेकिन याद रखिए यह ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा। ऐसे मामले में आपके पिताजी को अन्य विकल्पों की तलाश करनी होगी।

इन दोनों विकल्पों को देखते हुए हम आपको पीओएससीएसएस से निकासी कर फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश की सलाह नहीं देंगे। पोस्ट की योजना 5 साल की है जिसे और तीन साल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है और ब्याज दरें भी नहीं बदलती हैं।

गारंटीड रिटर्न वाले विकल्पों की कमी है इसलिए 8 साल के लिए निश्चित आय का यह एक अच्छा विकल्प है। अगर आपके पिताजी वर्तमान ब्याज दरों का लाभ उठाना ही चाहते हैं तो पीओएससीएसएस के अतिरिक्त बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करें तो अच्छा रहेगा।

नागरिक सुरक्षा इंडिविजुअल हेल्थ पॉलिसी कैसी है? क्या यह पॉलिसी लेकर निश्चिंत हुआ जा सकता है?  -रमेश आहूजा, जोधपुर
—नागरिक सुरक्षा इंडिविजुअल हेल्थ पॉलिसी में पर्सनल एक्सीडेंट कवर के साथ-साथ मेडिकल इंश्योरेंस भी है। यह प्रोडक्ट न केवल दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराता है बल्कि दुर्घटना होने पर हॉस्पिटैलाइजेशन के खर्चे भी कवर करता है। इस पॉलिसी केतहत 80 प्रतिशत कवरेज राशि पर्सनल एक्सीडेंट की होती है और 20 प्रतिशत एक्सीडेंट की वजह से हॉस्पिटैलाइज होने पर। अगर आप कंप्रिहेंसिव हेल्थ इंश्योरेंस लेना चाहते हैं तो यह उचित प्रोडक्ट नहीं होगा। इसके लिए आपको अपोलो म्यूनिख, स्टार हेल्थ और मैक्स बुपा की पॉलिसियों पर विचार करना चाहिए। हालांकि, दुर्घटना बीमा के लिए यह प्रोडक्ट अच्छा है।

मैं साल 2035 से पेंशन के तौर पर 20 वर्षों के लिए प्रति महीने 25,000 रुपये पाना चाहता हूं। कृपया मुझे कुछ अच्छी योजनाएं बताइए। योजना ऐसी हो जिसका प्रीमियम भी कम हो और डिविडेंडभी टैक्स फ्री हो।   -राजन भारती, जयपुर
—मुझे यह पता नहीं कि आपने 25,000 रुपये की गणना कैसे की है लेकिन मैं यह मान कर चल रहा हूं कि आपने काफी सोच-विचार के बाद यह राशि तय की होगी। इतनी मासिक राशि प्राप्त करने के अतिरिक्त यह भी महत्वपूर्ण है कि आप कितने साल तक जीवित रहते हैं। अगर हम महंगाई बढ़ोतरी की दर 6 प्रहजितशत मान कर चलें और आपके निवेश पर 8 प्रतिशत का रिटर्न मिले तो आपको 20 साल तक 25,000 रुपये की मासिक आय के लिए लगभग 60 लाख रुपये का कोष चाहिए होगा।

कोष बनाने के लिए आपको निवेश के ऐसे विकल्प चुनने होंगे जिन पर अधिक रिटर्न मिल सके। याद रखिए कि बीमा सुरक्षा के लिए लिया जाता है न कि निवेश के लिए। अगर आप इन दोनों को मिलाते हैं तो लागत बहुत अधिक बढ़ जाएगी। परिसंपत्ति आवंटन की नीति हमेशा से रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अच्छी मानी जाती रही है। आप म्यूचुअल फंडों में सिप के जरिये निवेश करने के साथ-साथ पीपीएफ, एनपीएस और अन्य उपकरणों में भी निवेश कर सकते हैं।
http://business.bhaskar.com/article/fd-scheme-would-be-better-to-replace-the-post-office-2257255.html

मैं पोस्ट ऑफिस के मंथली इनकम स्कीम (एमआईएस) में निवेश करना चाहता हूं। मैं अपनी मासिक जरूरतों के लिए नियमित आय चाहता हूं। कृपया बताएं कि क्या इस उद्येश्य से यह एक सही और सुरक्षित माध्यम रहेगा या नहीं?  -आकाश सक्सेना, दुर्ग

—पोस्ट ऑफिस की मासिक योजना पर सालाना 8 प्रतिशत का रिटर्न मिलता है जिसका भुगतान प्रति माह किया जाता है। यह योजना छह साल की होती है और फिक्स्ड रिटर्न पाने के उपलब्ध विकल्पों में अच्छा है। हालांकि, इस योजना में निवेश की अधिकतम सीमा तय है और प्राप्त होने वाले ब्याज पर कर लगाया जाता है। इस योजना में निवेश करने से पहले आप यह गणना कीजिए कि आपको खर्च के लिए प्रति महीने कितने पैसे चाहिए और फिर यह विश£ेषण करें कि पोस्ट ऑफिस का मंथली इनकम स्कीम उसे पूरा कर पाएगा या नहीं।

जहां कहीं फिक्स्ड रिटर्न की बात होती है वहां टैक्सेबिलिटी एक बड़ी भूमिक निभाता है। अगर किसी खास वर्ष में ब्याज से होने वाली आय पर कर लगाया जाता है तो कर-पश्चात मिलने वाला रिटर्न कम हो जाता है। अगर आप थोड़ा जोखिम उठा सकते हैं तो आपको म्यूचुअल फंडों के मंथली इनकम प्लान या एमआईपी पर विचार करना चाहिए। अपनी जरूरतें और निवेश के विकल्प की जानकारी के लिए आप अपने नजदीकी फाइनेंशियल प्लानर से संपर्क कर सकते हैं।

हाल ही में बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस ने एक टर्म इंश्योरेंस प्लान लांच किया है जिसका सम एश्योर्ड साल दर साल बढ़ता जाता है7 क्या ऐसी पॉलिसी लेने पर विचार किया जा सकता है? -हरमीत कौर, जालंधर
—बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस ने दो प्लान लांच किए हैं- प्रोटेक्टर और प्रोटेक्टर प्लस। ये दोनों पॉलिसियां ग्राहकों को विकल्प देती हैं कि वे बढ़ती जिम्मेदारियां और महंगाई को देखते हुए अपना सम एश्योर्ड बढ़ा सकते हैं। इसके लिए अतिरिक्त प्रीमियम भी नहीं देना है। दोनों पॉलिसियों के तहत प्रत्येक वर्ष सम एश्योर्ड में 5 प्रतिशत या 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी संभव है।

अन्य टर्म इंश्योरेंस पॉलिसियों की तुलना में इन पॉलिसियों के प्रीमियम अधिक हैं। ऐसा प्रति वर्ष सम एश्योर्ड में बढ़ोतरी की सुविधा की वजह से है। इस प्रकार अपनी सेवानिवृत्ति की उम्र तक आपका कवर सबसे अधिक होगा। हालांकि, जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाती है आपकी बीमा संबंधी जरूरतें घटती जाती हैं। इसके ठीक विपरीत उम्र बढऩे के साथ ही आपकी आय में इजाफा होता जाता है।

सेवानिवृत्ति के समय तक आपकी प्रमुख आर्थिक जिम्मेदारियां जैसे बच्चे की पढ़ाई आदि संपन्न होती जाती हैं और परिवार की सुरक्षा की जरूरत कम होती जाती है। उम्र बढऩे के साथ ही आपकी बीमा जरूरतें कम होती जाती है और एक समय में यह शून्य हो जाती है। बेहतर यह होगा कि वर्तमान में आप अधिक कवर वाला इंश्योरेंस लीजिए और बाद में उसका कवर घटाते जाइए। इस प्रकार आप प्रीमियम के पैसे भी बचा पाएंगे।

मैं 50 लाख रुपये सम एश्योर्ड का टर्म इंश्योरेंस प्लान लेना चाहता हूं और अगर भविष्य में जरूरत पड़ी तो सम एश्योर्ड में बढ़ोतरी भी कर सकता हूं। यद्यपि मुझे कई एजेंसियों से इस संदर्भ में कॉल आती है और उलझन इस बात की है कि टर्म इंश्योरेंस की खरीदारी मैं ऑनलाइन करूं या ऑफलाइन। इसके अतिरिक्त मेरी पत्नी का नाम आज भी वही है जो शादी से पहले था और मेरे पास मैरिज सर्टिफिकेट भी नहीं है। क्या नॉमिनी घोषित करने में या दावा करने के समय इससे कोई परेशानी तो नहीं होगी?  -राजन भारद्वाज, इंदौर
—उचित टर्म इंश्योरेंस का चयन करने में भी थोड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी कई सारी जीवन बीमा कंपनियों की ढेर सारी पॉलिसियां बाजार में उपलब्ध हैं। कभी कभार पॉलिसी खरीदने वाले सबसे कम प्रीमियम वाली पॉलिसी को तरजीह देते हैं और गलत प्रोडक्ट की खरीदारी कर लेते हैं। एक प्रकिया के तौर पर सबसे पहली अपनी जरूरतों को सूचीबद्ध कर लें।

फिर विभिन्न कंपनियों की पॉलिसियों का विश्लेषण करें। जिस कंपनी की पॉलिसी के फीचर्स आपकी जरूरतों से सबसे अधिक मेल खाते हों उसे तरजीह दें। ऑनलाइन टर्म कवर एक अच्छा विकल्प है लेकिन केवल कम प्रीमियम देखकर ही आकर्षित न हों। खास तौर से अगर आपकी जरूरतों के अनुसार पॉलिसी की पेशकश कर रही जीवन बीमा कंपनियों के प्रीमियम में ज्यादा अंतर हो तो इस बात पर खास तौर से गौर करें।

कंपनी के दावा निपटान का अनुपात पता करना न भूलें। अगर ऐसा लगता है कि आपके परिवार को सीधे तौर पर क्लेम सेट्लमेंट में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है तो ऑनलाइन पॉलिसी लेने की जगह एजेंट की सेवा लेते हुए ऑफलाइन टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदें। पत्नी को नॉमिनी बनाने में आपको कोई पेरेशानी नहीं होगी। आप अपनी मर्जी से नॉमिनी को बदल सकते हैं। जब आपके पास आवश्यक सभी दस्तावेज आ जाते हैं तो आप नॉमिनी का नाम बदलवा सकते हैं।

मेरा स्टेट बैंक ऑप इंडिया (एसबीआई) में बचत खाता है जिसका इस्तेमाल मैंने पिछले 10 महीने से नहीं किया है। इस खाते में पैसे भी नहीं हैं। क्या मुझे अपना यह खाता बंद करवा देना चाहिए या यह खुद ही बंद हो जाएगा? अगर मैं इस खाते को बंद नहीं करवाता हूं तो क्या परिणाम होगा?   -राम प्रकाश, पानीपत

—किसी भी बचत खाते में अगर न्यूनतम राशि रखते हुए उसका का इस्तेमाल एक निश्चित समय तक नहीं किया जाता है तो वह अक्रिय हो जाता है। लेकिन अगर आप न्यूनतम राशि अपने बचत खाते में बरकरार नहीं रखते हैं तो बैंक प्रत्येक तिमाही आपसे न्यूनतम बैंलेंस नहीं रखने के एवज में शुल्क वसूलता है।

अगर आप खाता बंद नहीं करवाते हैं तो यह शुल्क तब तक लगता लगता रहेगा जब तक कि बैंक उसे बंद नहीं करता है। हालांकि, इससे आपका बैंकिंग रिकॉर्ड प्रभावित हो सकता है और भविष्य में जब आप दूसरे बैंक में कभी खाता खुलवाने जाएंगे तो थोड़ी परेशानी हो सकती है। इसलिए, बेहतर यह होगा कि अगर आप खाते का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो उसे बंद ही करवा दें।

 मेरा भाई एक आईटी कंपनी में पिछले 3 साल से काम कर रहा है और अब वह एक खास कोर्स करना चाहता है जिसमें तकरीबन 50,000 रुपये खर्च होंगे। क्या वह पर्सनल लोन लेकर अपनी पढ़ाई कर सकता है?    -अवधेश चौहान, भोपाल

—पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड लोन सबसे महंगे कर्ज की श्रेणी में आते हैं। ये न केवल आपके व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करते हैं बल्कि इसका असर अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्यों जैसे बच्चों की पढ़ाई, सेवानिवृत्ति योजना पर भी पड़ता है। यद्यपि, फइनेंशियल प्लानिंग के जरिए आप शिक्षा सहित अपने सभी महत्वपूर्ण लक्ष्यों के लिए योजना बना सकते हैं और उस हिसाब से संसाधनों को आवंटित कर सकते हैं।

आपके पत्र से लगता है कि आपके भाई ने अभी तक ऐसी कोई योजना नहीं बनाई है। अपनी पढ़ाई के लिए उन्हें शिक्षा ऋण लेना चाहिए जो सस्ते होते हैं।

मैंने साल 2005 में एक घर खरीदा था और इसे 2011 में बेच दिया। इन पैसों से मैंने अपनी पत्नी के नाम से एक घर खरीद लिया है। क्या मुझे कैपिटल गेन टैक्स में छूट नहीं मिलेगी? कृपया मार्गदर्शन करें।    -नरोत्तम, पलवल

आयकर अधिनियम की धारा 54एफ के तहत किसी प्रकार के लांग टर्म कैपिटल गेन (आवासीय प्रॉपर्टी के मामले में 3 साल से अधिक) पूरी तरह छूट के योग्य होती है अगर कोई व्यक्ति बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग 1 या 2 साल के भीतर दूसरी प्रॉपर्टी खरीदने या तीन साल के भीतर दूसरा मकान बनवाने में करता है।

आपने अपनी प्रॉपर्टी तीन साल बाद बेची है इसलिए आप छूट के हकदार हैं लेकिन नियम के मुताबिक जिसके नाम की प्रॉपर्टी बिकी है उसी के नाम से दूसरी प्रॉपर्टी खरीदी या बनाई जानी चाहिए। आपने पत्नी के नाम मकान लिया है इसलिए लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का लाभ आप नहीं ले पाएंगे।

मैं जानना चाहता हूं कि भारत का कौन सा बैंक सबसे अधिक ब्याज देता है। मैं अपनी जमा पर ब्याज से प्रति महीने अधिकतम 15,000 रुपये प्राप्त करना चाहता हूं। क्या आप यह जानकारी देंगे कि भारत का कौन सा बैंक मेरी जमा पर सबसे अधिक रिटर्न दे सकता है?      -राजेंद्र, रायपुर

—राजेंद्रजी आपने अपेक्षित आय के लिए समयावधि का जिक्र अपने पत्र में नहीं किया है। बैंक केवल दीर्घावधि की जमाओं पर ही अधिक ब्याज दरों की पेशकश करते हैं। अधिकतम ब्याज दरें 7 से 10 साल की जमाओं पर मिलती हैं। लेकिन अगर आपका लक्ष्य तीन साल के लिए है तो हो सकता है ब्याज की रकम आपकी आवश्यकताओं को पूरी न कर सके।

इसके अतिरिक्त बैंक जमा से प्राप्त ब्याज पर लगने वाला कर भी कमाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फिक्स्ड डिपॉजिट से प्राप्त होने वाले 5,000 रुपये से अधिक सालाना ब्याज पर कर लगाया जाता है।

आयकर, आप जिस कर दायरे में आते हैं, उस हिसाब से लगाया जाता है। अगर आप इन महत्वपूर्ण कारकों पर गौर नहीं फरमाते हैं तो इससे निवेश की राशि बढ़ानी पड़ सकती है। मेरी सलाह होगी आप अपेक्षित आय के लिए निवेश के अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।

मैंने दो साल पहले अपने और अपनी मां के लिए दो लाख की मेडिक्लेम पॉलिसी (फैमिली फ्लोटर) ली थी। अब एक कंपनी ने मेरी दो लाख की मेडिक्लेम पॉलिसी कराई है। क्या मुझे पहले वाली पॉलिसी जारी रखनी चाहिए या फिर उसे खत्म कर देना चाहिए?   -स्वप्निल चौहान, इंदौर




—फैमिली फ्लोटर पॉलिसी से आपको कई फायदे हैं। अगर आप अपने माता पिता के लिए पॉलिसी लेनी चाहते हैं और उनकी उम्र ज्यादा है तो इससे भविष्य में मिलने वाला लाभ प्रभावित होगा। कभी-कभी कंपनियां क्लेम ज्यादा होने के कारण प्रीमियम बढ़ा देती हैं। अगर आपने अपने माता पिता के लिए फैमिली फ्लोटर पॉलिसी ली है और कुछ घटना हो जाती है तो इससे दूसरे लोगों के लिए ली गई समान पॉलिसी प्रभावित होती है।

अगर इस तरह की दिक्कतों से बचना चाहते हैं तो आपको माता पिता के लिए कोई दूसरी पॉलिसी लेनी चाहिए। अगर आप अभी विवाहित नहीं हैं और बाद में आप पत्नी और बच्चों का नाम उस पॉलिसी में जोडऩा चाहते हैं तो यह आपके लिए काफी खर्चीला साबित होता है। इस तरह के झंझटों से बचने के लिए माता पिता के लिए अलग से पॉलिसी लेनी चाहिए।

मैं ईटीएफ के माध्यम से सोने में निवेश करना चाहता हूं। कौन सी स्कीम अच्छी है जिसमें मैं एसआईपी शुरू कर सकूं?

  – राहुल प्रियदर्शी, रायपुर
जवाब- ईटीएफ की स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग होती है और स्टॉक की ही तरह इनकी ट्रेडिंग होती है। आप ट्रेडिंग आवर्स के दौरान इसमें खरीद और बिक्री कर सकते हैं। जिस कीमत पर आप खरीद बिक्री करते हैं वह स्कीम की एनएवी पर निर्भर करता है।

ईटीएफ में सोने की प्रत्यक्ष खरीदारी नहीं होती है, आपके निवेश के हिसाब से एएमसी आपको यूनिट प्रदान करता है। प्रत्येक यूनिट सोने की निश्चित मात्रा के बराबर होती है। ईटीएफ के माध्यम से सोना खरीदना आपके लिए कुछ सस्ता भी पड़ सकता है।

वॉल्यूम अच्छा रहने के कारण आपको इसमें पूरी तरलता भी मिलती है। गोल्ड ईटीएफ का स्ट्रक्चर एक जैसा होता है, इसलिए विभिन्न कंपनियों के रिटर्न में भी ज्यादा अंतर नहीं होता है। ईटीएफ में निवेश के लिए एसआईपी का विकल्प नहीं होता है। आईसीआईसीआई डायरेक्ट जैसी कुछ ब्रोकरेज कंपनियां यह सुविधा दे रही हैं लेकिन इसके लिए अलग से कीमत चुकानी पड़ती है।

मैं अगले साल घर खरीदना चाहता हूं। अपने हाउस लोन को कैसे कवर कर सकता हूं?   -सिमरनजीत सिंह, जालंधर
—होम लोन चुकाना अपने आप में एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। अगर दुर्भाग्य से आपके साथ कोई दुघर््ाटना घट जाती है और आपके परिजन लोन नहीं चुका पाते हैं तो तो बैंक आपका घर बेचकर लोन की रिकवरी कर लेता है। सबसे अच्छी बात तो यह है कि होम लोन चुकाने के लिए टर्म इंश्योंरेंस का सहारा लिया जाए। यह दो तरह का होता है।

पॉलिसी लेवल पर टर्म इंश्योरेंस घर के कुल लोन के बराबर होता है और शुरू से लेकर लोन चुकाए जाने तक उतना ही रहता है। दूसरा रिड्यूसिंग इंश्योरेंस होता है। यह आपके लोन रीपेमेंट के साथ कम होता जाता है। आप सबसे पहले अपनी जरूरत को देखें और फिर टर्म इंश्योरेंस करवा लें। टर्म इंश्योरेंस आपके लोन के अलावा भी आपकी जरूरतों को पूरा करने में मदद करता है।

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मैं एक टर्म इंश्योरेंस प्लान लेना चाहता हूं और उसमें राइडर जोडऩा चाहता हूं। क्या मुझे उसी कंपनी में राइडर जोडऩा चाहिए या फिर दूसरी कंपनी में। अगर मैं दूसरी कंपनी चुनता हूं तो मुझे कारण बताइये।   -मिहिर चौरसिया, नई दिल्ली
—जब आप लाइफ इंश्योरेंस लेते हैं तो उसमें मिलने वाली अतिरिक्त सुविधाओं को राइडर कहा जाता है। ये सुविधाएं मौत, दुर्घटना या गंभीर बीमारी के लिए होती हैं। विभिन्न कंपनियों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे राइडर में बहुत ही मामूली सा अंतर होता है। इनमें बस नाम ही बदलता है सुविधाएं वही रहती हैं।

यहां तक कि प्रीमियम में भी कोई खास अंतर नहीं होता है। आप लाइफ इंश्योरेंस में उसी कंपनी का राइडर ले सकते हैं जिस कंपनी से आपने पॉलिसी ले रखी है। उदाहरण के लिए आईसीआईसीआई लोम्बार्ड की कोई पॉलिसी लेते हैं तो आप कोटक लाइफ इंश्योरेंस का राइडर नहीं ले सकते हैं।

आप कौन सा राइडर ले सकते हैं, यह भी बीमा कंपनी पर निर्भर करता है। कोई भी प्लान लेने से पहले राडडर्स के रूप में मिलने वाले फायदों पर थोड़ा होमवर्क कर लें। कई बार (स्टैंडअलोन) हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी राइडर से ज्यादा फायदेमंद साबित होती है। इसलिए अपनी जरूरतों और उपलब्ध विकल्पों को देखने के बाद ही निर्णय लें।

मैं दुर्घटना या स्थायी विकलांगता की क्षतिपूर्ति वाला टर्म इंश्योरेंस लेना चाहता हूं। मेरी आयु २९ साल है और मैं ३५ लाख की कवरेज लेना चाहता हूं। मुझे अच्छा विकल्प बताएं। मैं यूलिप में नहीं जाना चाहता और टर्म इंश्योरेंस प्लान और म्यूचुअल फंड का कांबिनेशन लेना चाहता हूं। निवेश का कुछ हिस्सा चाइल्ड फंड में भी डालना चाहता हूं। इस संबंध में जानकारी दें।  -मनदीप सिंह, जालंधर

—आप अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या ऑफलाइन तरीके  से टर्म इंश्योरेंस खरीद सकते हैं। ऑनलाइन में बीमा एजेंट की कोई भूमिका नहीं होती है इसलिए यह थोड़ा सस्ता पड़ता है। कोटक, अवीवा लाइफ, आईसीआईसीआई और रेलीगेयर जैसी कुछ कंपनियां ऑनलाइन इंश्योरेंस की सुविधा देती हैं।

आप विभिन्न कंपनियों द्वारा लिए जाने वाले के प्रीमियम की तुलना करने के बाद अपनी सुविधा के हिसाब से निर्णय ले। आपका दूसरा सवाल बच्चों के लिए निवेश से जुड़ा है। म्यूचुअल फंडों द्वारा ऑफर किए जा रहे चाइल्ड फंड हाइब्रिड फंड होते हैं। निवेश का कितना हिस्सा इक्विटी में जाएगा और कितना डेट सिक्युरिटीज में, यह अलग-अलग फंड पर निर्भर करता है। ऐसे फंड आपके लिए तरलता के जोखिम को भी कम करते हैं। कुछ फंड में लॉक-इन विकल्प का भी चयन कर सकते हैं।

इससे बीच में पैसे खर्च हो जाने का भय नहीं रहेगा और आपके बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहेगा। शुरूआत में फंड का निवेश इक्विटी में किया जा सकता है और जैसे-जैसे आप लक्ष्य के करीब पहुंचें, डेट में निवेश बढ़ाते जाएं। आप अपने बच्चे के लिए पीपीएफ खाता खोलने पर भी विचार कर सकते हैं क्योंकि परिपक्वता के बाद यह आपके बच्चे को अच्छी रकम देता है।

सेक्टोरल फंड क्या होते हैं? क्या इनमें जोखिम अधिक होता है?   -सौरव, इंदौर
जैसा कि नाम से ही मालूम होता है, सेक्टर फंड ऐसे फंड होते हैं जो किसी खास सेक्टर में निवेश करते हैं। इनमें डायवर्सिफिकेशन कम होता है। या तो ये एक ही सेक्टर में निवेश करते हैं या फिर 2-3 प्रमुख सेक्टरों में। म्यूचुअल फंडों में सेक्टर फंड सबसे अधिक जोखिम भरे होते हैं।

समय-समय पर कुछ सेक्टरों ने बेहतरीन रिटर्न दिए हैं लेकिन अंत में जहां तक निवेशकों की बात है तो कमाने वालों से अधिक संख्या गंवाने वालों की रही है। मेरा सुझाव है कि आप सेक्टर फंडों को अपने पोर्टफोलियो का मुख्य हिस्सा न बनाएं।

फंड हाउस और इक्विटी स्कीम की रेटिंग को कैसे समझा जाए? एक निवेशक के तौर पर हमें क्या करना चाहिए?   -हरीश कुमार, दिल्ली
रेटिंग अलग होने का प्रमुख कारण होता है स्रोतों का अलग होना। कुछ स्रोत क्वांटिटेटिव तरीका अपनाते हैं तो कुछ क्वालिटेटिव। समय-सीमा भी अलग होती है। कोई तीन साल के प्रदर्शन के आधार पर रेटिंग करता है तो कोई पांच साल के प्रदर्शन के आधार पर।

क्वालिटेटिव तरीका भी अलग है। कोई अल्फा को तरजीह देता है तो कोई किसी और पैमाने को। निवेशकों के लिए इस समस्या के दो समाधान हो सकते हैं। या तो वे अपने तरीके से शोध करें या किसी एक विश्वसनीय स्रोत पर भरोसा करें।

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मैंने हाल ही में एमबीए पास किया है और अक्टूबर में अपनी पहली नौकरी ज्वाइन करने जा रहा हूं। मेरी दिलचस्पी म्यूचुअल फंडों में है लेकिन मुझे इसके बारे में ज्यादा कुछ नहीं पता। मुझे बस इतना पता है कि निवेश के डाइवर्सिफिकेशन के लिए यह सबसे बढिय़ा है। मैं सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान के जरिये निवेश करना चाहता हूं। कृपया बताएं कि मैं निवेश पर किस प्रकार 15-20 प्रतिशत का रिटर्न प्राप्त कर सकता हूं?     -पुरुषोत्तम साहनी, रायपुर
—यह जान कर अच्छा लगा कि आप एक युवा निवेशक हैं और दीर्घावधि में अपने पैसों में बढ़ोतरी करने की दिशा में काम कर रहे हैं। एक अच्छी बात यह है कि आप अपने करियर की शुरुआत के साथ ही निवेश की शुरुआत करने जा रहे हैं, इससे आपको अपने वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा।

दीर्घावधि में धन-कोष बनाने के लिहाज से सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान या सिप सबसे बढिय़ा जरिया है। चक्रवृद्धि की वजह से आपके निवेशित धन में समय के साथ कई गुना बढ़ोतरी होती है। हालांकि, आपको निवेश के मामले में अनुशासन का पालन करना होगा ताकि बुरी बाजार परिस्थितियों में भी आपका निवेश जारी रहे।

बीते दिनों में सिप ने 12-15 प्रतिशत के दायरे में रिटर्न दिया है। ऐसे फंड प्रमुख रूप से लार्ज-कैप की श्रेणी के थे। हालांकि, लार्ज-कैप के साथ मिड-कैप फंडों को मिला कर आप अपने सिप पोर्टफोलियो से 15-17 प्रतिशत का रिटर्न अर्जित कर सकते हैं।

आपको अपने फंड पोर्टफोलियो को मॉनिटर करने की जरूरत होगी ताकि अगर किसी फंड का प्रदर्शन अपनेक्षा के अनुरूप नहीं रहता है तो आप उसकी जगह दूसरे अच्छे फंड को शामिल कर सकें। ये सार बातें बाद में आती हैं। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने उन वित्तीय लक्ष्यों की पहचान करें जिसके लिए आप निवेश करने की सोच रहे हैं।

सिप एक जरिया मात्र है जो आपको अंतिम पड़ाव तक पहुंचने में मदद करता है। इसलिए पहले अपने लक्ष्यों को पहचानें और उस हिसाब से धन का निवेश करें। सबसे बढिय़ा रहेगा कि आप परिसंपत्ति आवंटन की नीति अपनाएं। इससे आप अपेक्षाकृत अच्छा रिटर्न प्राप्त कर पाएंगे और जोखिम भी ज्यादा नहीं उठाना होगा। जयादा विश£ेषण के लिए आपको किसी फाइनेंशियल प्लानर से मिलना चाहिए।

मेरी उम्र 62 साल है और मैं सरकारी सेवा से रिटायर हुआ हूं। मैंने एक छोटा करोबार शुरू किया है। मेरी सालाना अय चार लाख रुपये है और मेरी कोई देनदारी या जिम्मेदारी भी नहीं है। मैं दस लाख रुपये का निवेश कर मासिक आय प्राप्त करा चाहता हूं। मैंने वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) और पोस्ट ऑफिस के एमआईएस में निवेश किया हुआ है। दूसरे अन्य किन विकल्पों से मुझे गारंटीड आय प्राप्त हो सकती है। मेरे नाम से एक घर है जिसमें मै रहता हूं।      -राजपाल जाधव, जालंधर

—आपने जिन योजनाओं में निवेश किया है उसके अतिरिक्त शायद ही कोई ऐसे विकल्प बचते हैं। हालांकि, सेवानिवृत्ति के बाद महंगाई पर विचार करना जरूरी है। आपका निवेश महंगाई दर से ज्यादा गति से बढऩा चाहिए ताकि आपको मिलने वालवास्तविक रिटर्न अच्छा खासा हो। सेवानिवृत्ति के बाद अगर हम जीवन प्रत्याशा 20-25 साल मान कर चलें तो आपको फिक्स्ड इनकम के अतिरिक्त अन्य विकल्पों पर भी विचार करना चाहिए।

एक परिसंपत्ति वर्ग के रूप में इक्विटी आपको अपेक्षित रिटर्न देता है साथ ही यह महंगाई को मात देने में भी सक्षम है। हालांकि, इक्विटी में सीधे निवेश करने में जोखिम अधिक है साथ ही अच्छे डाइवर्सिफिकेशन के लिए पूंजी भी अधिक होनी चाहिए। म्यूचुअल फंड आपको डाइवर्सिफिकेशन का लाभ देते हैं और इसके लिए अधिक पूंजी की दरकार भी नहीं होती है।

आपको अपनी पूंजी का 50% डिविडेंड यील्ड, बैलेंस्ड फंड और लार्ज कैप में निवेश कर एक अच्छा पोर्टफोलियो बनाना चाहिए। यह आपको निरंतर एक अच्छा रिटर्न दे सकता है। निवेश की समयावधि पांच वर्षों की रखें और समय-समय पर इसकी समीक्षा करें। शेष्ी बचे 50 प्रतिशत का निवेश आप ऐसे एमआईपी में कर सकते हैं तो नियमित रूप से लाभांश देते हैं। ऐसी योजनाएं 5-25 प्रतिशत का निवेश इक्विटी में करती है और नियमित अंतराल पर डिविडेंड देती हैं।

अगर आपकी आय कम होती है तो जरूरत पडऩे पर आप रिवर्स मॉर्गेज का सहारा भी ले सकते हैं। इसके जरिये आप आजीवन एक निश्चित मासिक आय प्राप्त कर सकते हैं। विस्तृत विश£ेषण के लिए फाइनेंशियल प्लानर से संपर्क करें।

क्वांट फंड क्या हैं और यह किस प्रकार लाभ देते हैं। क्या मेरे जैसे खुदरा निवेशक क्वांट फंडों में निवेश पर विचार कर सकते हैं? मैंने रिलायंस क्वांट फंड के बारे में थोड़ा-बहुत पढ़ा है। क्या इसमें लंबे समय तक निवेश करना ठीक रहेगा?   -आंचल श्रीवास्तव, जोधपुर

—क्वांट फंड ऐसे फंड होते हैं तो क्वांटिटेटिव एनालिसिस के आधार पर अपने पोर्टफोलियो में स्टॉक को शामिल करते हैं। ऐसे फंडों का प्रबंधन करने वाले फंड प्रबंधक गणितीय तरीके आधार पर शेयरों को चुन कर पोर्टफोलियो में शामिल करते हैं। निवेश का यह मॉडल गणितीय और सांख्यिकीय मानदंडों पर आधारित है। रिलायंस क्वांट फंड भी यही नीति अपनाता है। मेरी सलाह होगी कि आप अपने निवेश को सरल रखें और अपने पोर्टफोलियो का निर्माण अच्छी म्यूचुअल फंड योजनाओं से करें।

मैं और मेरे पति बिजनेस भास्कर के नियमित पाठक हैं। मेरी उम्र 28 साल, मेरे पति की 31 साल और मेरी बेटी की उम्र 5 साल है। वर्तमान में हमारे पास न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी का एक लाख रुपये का मेडिक्लेम है।


इसके अतिरिक्त हमारे पास न तो कोई बीमा पॉलिसी है और न ही निवेश। हम अपनी बेटी के लिए कुछ करना चाहते हैं। 16 साल बाद हमें उसकी पढ़ाई-लिखाई और शादी के लिए पैसे चाहिए होंगे। हम 3,500 रुपये प्रति माह की बचत कर सकते हैं। भविष्य में बचत की इस राशि में इजाफा हो सकता है। कृपया सलाह दें कि अपनी बेटी के भविष्य के लिए हमें कहां निवेश करना चाहिए।   – राखी अहिरकर, इंदौर

—बच्चे के भविष्य की योजना प्रत्येक माता-पिता का प्राथमिक लक्ष्य होता है। शिक्षा की बढ़ती लागत और अन्य खर्चों की वजह से चिल्ड्रेन प्लानिंग पहले से करना और निवेश के लिए सही उपकरणों का चयन करना जरूरी है। बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए कोष बनाने के लिए अभी आपके पास 11 साल शेष हैं। सबसे पहले आपको बच्चे के पाल-पोषण को सुरक्षित बनाना चाहिए ताकि किसी अप्रत्याशित दुर्घटना की दशा में यह प्रभावित न हो। सब कुछ आपकी योजना के अनुसार चले इसके लिए पर्याप्त सम एश्योर्ड का टर्म इंश्योरेंस कवर लीजिए। अप्रत्याशित घटना की दशा में यह परिवार के खर्च का ख्याल रखेगा।

अपने हेल्थ इंश्योरेंस कवर की राशि भी बढ़ाएं क्योंकि वर्तमान कवर पर्याप्त नहीं है। अपने शहर के अच्छे अस्पतालों के खर्च के आधार पर हेल्थ इंश्योरेंस कवर की राशि पर विचार करें। इससे सुनिश्चित होगा कि किसी कारणवश अस्पताल में भर्ती होने की दशा में आपकी बचत जस की तस बनी रहेगी और वहां से पैसे नहीं निकालने पड़ेंगे। याद रखिए, ये दोनों आवश्यक सुरक्षा कवर हैं जो आपातकालीन परिस्थितियों में आपकी बच्ची का भविष्य सुरक्षित रख  सकते हैं।

अब बात करते हैं शिक्षा के लिए कोष बनाने की। दीर्घावधि में शिक्षा के लिए कोष बनाने के लिए आपको ऐसे एसेट क्लास का चयन करना चाहिए जो महंगाई को मात देते हुए अच्छा रिटर्न अर्जित कर सके। मौजूदा सभी परिसंपत्ति वर्गों में अगर ऐतिहासिक प्रदर्शन की बात करें तो इक्विटी अपेक्षाओं पर खरा उतरा है। सीधे तौर पर शेयरों में निवेश के लिए शोध और विशेषज्ञता की जरूरत होती है इसलिए म्यूचुअल फंडों का एक पोर्टफोलियो बनाइए और उनमें सिप के जरिये निवेश कीजिए।

आप एचडीएफसी टॉप 200, एचडीएफस्ी प्रूडेंस, आईडीएफसी प्रीमियर इक्विटी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फोकस्ड ब्लू चिप इक्विटी, डीएसपी बीआर टॉप 100 इक्विटी और डीएसपी बीआर मिड एंड स्मॉल कैप में निवेश पर विचार कर सकते हैं। एक निश्चित अंतराल पर अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा कीजिए और अगर कुछ योजनाओं का प्रदर्शन आशा के अनुरूप नहीं रहता है तो पुनर्संतुलित करें।

जैसे-जैसे आप अपने लक्ष्य के करीब पहुंचते हैं, धीरे-धीरे अपने निवेश को डेट में स्विच करना शुरू कर दीजिए। इससे आप इक्विटी बाजार के अस्थिरता की जोखिम से बचे रहेंगे। यद्यपि इस नीति से आप अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकते हैं। बच्चे की फ्यूचर प्लानिंग के विस्तृत और नियमित सलाह के लिए आपको किसी फाइनेंशियल प्लानर से संपर्क करना चाहिए।

मेरी उम्र 30 साल है। मैं अपने लिए ऐसा जीवन बीमा लेना चाहता हूं जो मेरे 70 साल के होने तक मेरे परिवार को रिस्क कवर उपलब्ध कराता रहे और जिसका प्रीमियम भी कम हो। साथ ही अगर मेरे साथ कोई अनहोनी होती है तो मेरे परिवार को क्लेम करने और भुगतान मिलने में कोई दिक्कत नहीं हो। मुझे कितने सम एश्योर्ड का और कौन सी पॉलिसी लेनी चाहिए?  – शिशिर चावड़ा, ई-मेल के जरिये

—जीवन के किसी भी पड़ाव पर मृत्यु का जोखिम कवर करने के उद्येश्य से टर्म प्लान सबसे उपयुक्त जरिया है। आपके उम्र में यह अपेक्षाकृत सस्ता है और आप इसका लाभ अपेक्षित उम्र तक उठा सकते हैं। वर्तमान में टर्म प्लान खरीदने के दो विकल्प हैं- ऑनलाइन या ऑफलाइन किसी एजेंट के जरिये। ऑनलाइन टर्म प्लान खरीदना सस्ता पड़ता है क्योंकि बीच में कोई एजेंट शामिल नहीं होता है। आवेदन करने से लेकर दावा करने तक आप सीधे कंपनी से संपर्क करते हैं।

अगर आपको ऐसा लगता है कि आपके न रहने की दशा में आपके परिवार को एजेंट के सेवाओं की जरूरत पड़ेगी तो आप ऑफलाइन पॉलिसी ही लीजिए। आप कोटक लाइफ इंश्योरेंस, आईसीआईसीआई प्रू लाइफ इंश्योरेंस और बिड़ला सन लाइफ की ऑफलाइन पॉलिसियों पर विचार कर सकते हैं। ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस के लिए आप एगॉन रेलिगेयर, आईसीआई प्रू लाइफ, कोटक लाइफ और अवीवा लाइफ इंश्योरेंस पर विचार कर सकते हैं।

अवीवा आई लाइफ सबसे सस्ती ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी है लेकिन विभिन्न मानदंडों के आधार पर तुलना करने के बाद ही निर्णय लीजिए क्योंकि इन पॉलिसियों के दावा निपटान का मामला अभी सामने नहीं आया है। विभिन्न बीमा कंपनियां आम तौर पर इस उम्र में आपकी सालाना आय का 20 से 22 गुणा कवर देते हैं।

मेरी उम्र 31 साल है और मैं बिजनेस भास्कर का नियमित पाठक हूं। मुझे समाधान कॉलम खास तौर से पसंद है। मेरी मासिक कमाई 13,500 रुपये है और मैं इसमें से 6,000 रुपये प्रति माह बचा लेता हूं। मैं चाहता हूं कि जब मैं 50वें वर्ष में कदम रखूं तब तक मुझे इस बचत पर सबसे अधिक रिटर्न मिले। मुझे क्या करना चाहिए?   -निलेश गुंडेगांवकर, ई-मेल के जरिये

—सेवानिवृत्ति की योजना प्राथमिक लक्ष्यों में से एक है और अधिकांश लोग इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। मेडिकल सुविधाओं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढऩे से जीवन प्रत्याशा बढ़ी है और अधिक समय तक जीने का जोखिम भी बढ़ा है। सेवानिवृत्ति के बाद के जीवन में असंतुष्टि न हो इसके लिए शुरुआत में ही सेवानिवृत्ति की योजना बना कर चलना ठीक रहता है।

खास तौर से तब जब आपकी बचत ही आपका एकमात्र सहारा होती है।
अगर हम यह मान कर चलें कि आप सेवानिवृत्ति के बाद 25 साल तक जीवित रहेंगे और महंगाई के साथ ही वर्तमान खर्चों में बढ़ोतरी होगी तो आपको अपेक्षित खर्च के लिए आपको लगभग 70 लाख रुपये चाहिए होंगे।

20 साल में ऐसा कोष बनाने के लिए आपको अपने निवेश पर 12 प्रतिशत का रिटर्न मिलना चाहिए और आपको प्रति माह 2,000 रुपये के निवेश से शुरुआत करनी होगी। एक परिसंपत्ति वर्ग के तौर पर इक्विटी दीर्घावधि में सबसे अच्छा रिटर्न अर्जित करता आया है और इक्विटी में निवेश के लिए आपको म्यूचुअल फंड को माध्यम बनाते हुए सिप के जरिये निवेश करना चाहिए।

आदर्श तौर पर आपको अपने निवेश पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट का अनुपात 80:20 का रखना चाहिए। इस तरीके से आप महंगाई को मात देते हुए अपेक्षाकृत अधिक रिटर्न अर्जित कर पाएंगे। डेट एलोकेशन के लिए आप अपने निवेश में पब्लिक प्रोविडेंट फंड को शामिल करें जो आपको तीन लाभ देता है- कर बचत, कर-मुक्त रिटर्न और कर-मुक्त परिपक्वता राशि।

हालांकि, आर्थिक हालात बदलते हैं और उसी हिसाब से जरूरतें भी। अपने अन्य लक्ष्यों पर भी गौर कीजिए और उस हिसाब से निवेश कीजिए। वेतन या खर्च में बढ़ोतरी होने पर आपने निवेश को पुनर्संतुलित करें। मुझे भरोसा है कि इस नीति के जरिये आप अपने सेवानिवृत्ति का लक्ष्य आसानी से प्राप्त कर पाएंगे।

मेरी उम्र 35 साल है और मैं न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) में प्रति माह 500 रुपये का निवेश कर सकता हूंं। अगर मैं 60 साल की उम्र तक लगातार 500 रुपये प्रति माह का निवेश करता रहूं तो मुझे कितनी पेंशन मिल सकती है?   -आशीष कुमार माथुर, ई-मेल के जरिये

—एनपीएस की शुरुआत सरकार ने साल 2009 में की थी। इस पेंशन योजना के अंतर्गत आप एक निश्चित राशि जमा करते हैं। यह सुरक्षित, लचीला और पोर्टेबल योजना है जिसका उद्येश्य देश की वर्तमान पेंशन प्रणाली को बदलना और सेवानिवृत्ति के बाद आय की सुरक्षा उपलब्ध कराना है। इस योजना की संरचना मार्केट लिंक्ड रिटर्न पर आधारित है।

एनपीएस के फंड के प्रबंधन के लिए छह फंड प्रबंधक हैं। आपके पास ििवकल्प होता है कि आप किसी एक फंड प्रबंधक को चुनें या विभिन्न फंड प्रबंधकों के बीच एक खास अनुपात में आपने निवेश को बांट दें।

आप जब चाहें अपना फंड प्रबंधक बदल सकते हैं। इस योजना की एक ही सीमा है और वह है कि आप इक्विटी में 50 प्रतिशत से अधिक का निवेश नहीं कर सकते। हालांकि, यह एक अच्छा विकल्प है और डायरेक्ट टैक्स कोड में इस योजना के लाभों में इजाफा होने की संभावना है।

आप 500 रुपये प्रति माह का निवेश करना चाहते हैं और हम मान कर चलें कि आपको इस पर 15 प्रतिशत का रिटर्न मिलता है तो सेवानिवृत्ति के समय आपका लगभग 13 लाख रुपये का कोष बन जाएगा। इस रकम से आप अगले 20 वर्षों तक 70,000 रुपये सालाना का पेंशन प्राप्त कर सकते हैं अगर आपके कोष में महंगाई की तुलना में ज्यादा ग्रोथ होती है।

मेरी सलाह होगी की आप पहले यह तय करें कि सेवानिवृत्ति के लिए आपको कितने पैसों की जरूरत होगी। इसके लिए अपनी वर्तमान आमदनी और खर्चों में एक निश्चित दर से होने वाली बढ़ोतरी को नजरअंदाज न करें। इस प्रकार आप एक निश्चित आंकड़े पर पहुंच पाएंगे कि आपको कितनी बचत करनी चाहिए साथ ही आप निवेश के लिए उचित विकल्प का चयन कर पाएंगे।

मैं पिछले 3 साल से आपके अखबार का नियमित पाठक हूं और फाइनेंशियल प्लानिंग को लेकर मेरे कुछ प्रश्र हैं। मेरी उम्र 31 साल है और मेरी दो बेटियां हैं। वर्तमान में मेरे पास एक लाख रुपये नकद है और इसके अतिरिक्त कुछ निवेश है। मैं एचडीएफसी टॉप 200 में 2,000 रुपये प्रति माह, आईडीएफसी में 2,000 रुपये प्रति महीना, एचडीएफसी लाइफ के संपूर्ण समृद्धि इंश्योरेंस प्लान में 2,000 रुपये प्रति माह (10 साल के लिए), बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस प्लैटिनम प्रीमियर प्लान में 2,500 रुपये प्रति माह (दस साल के लिए), बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस विजन प्लान में 3,132 रुपये प्रति माह (२२ साल के लिए) और बिड़ला सन लाइफ के सरल वेल्थ प्लान में 1,०३७ रुपये का प्रीमियम प्रति माह दे रहा हूं। ये सभी निवेश और पॉलिसियां मेरी पत्नी के नाम से हैं। मेरे पास अब तक कोई टर्म इंश्योरेंस प्लान नहीं है और न ही मैंने अपने या अपने परिवार के लिए कोई मेडिक्लेम पॉलिसी ही ली है। कृपया सलाह दें कि उपरोक्त पॉलिसियां और निवेा सेवानिवृत्ति और अन्य वित्तीय जरूरतों के लिए काफी हैं या नहीं? मैं 3,000 से 5,000 रुपये प्रति माह का निवेश कर सकता हूं लेकिन उलझन इस बात की है कि अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए मैं कौन सी पॉलिसी लूं? मैं पिछले 10-12 साल से तंबाकू और श्राब का सेवन कर रहा हूं लेकिन अब मैंने इसे छोडऩे का इलाज करवाना शुरू कर दिया है। अब मैं यह जानना चाहता हूं कि अन्य कौन सा निवेश या पॉलिसी खरीदूं? कृपया इंदौर के किसी अच्छे फाइनेंशियल प्लानर के बारे में बताएं जिससे मिल कर मैं अपनी सारी उलझनें दूर कर सकूं। 

-विशाल सदावर्ते, इंदौर

—ऐसा लगता है कि वित्तीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जीवन बीमा पॉलिसियों पर आपका भरोसा कुछ ज्यादा ही है। मालूम होता है कि आपका कोई अभिन्न मित्र बिड़ला सन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी में काम करता है। इसके अलावा यह भी आश्चर्य की बात है कि आखिर सारी पॉलिसियां आपकी पत्नी के नाम ही क्यों हैं? इसका कारण मैं नहीं समझ पाया।

मैं समाधान कॉलम के माध्यम से हमेशा कहता आया हूं कि निवेश और बीमा को हमेशा ही अलग रखना चाहिए। बीमा का उद्येश्य बीमित व्यक्ति के साथ किसी तरह की दुर्घटना घअने की दशा में परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। इस लक्ष्य के लिए टर्म इंश्योरेंस सबसे बढिय़ा प्रोडक्ट है। निवेश के लिए आपके पास विभिन्न विकल्प हैं जिसका चयन आप अपनी लक्ष्य प्राप्ति के लिए जोखिम उठाने की क्षमता आर समय-सीमा के आधार पर कर सकते हैं।

जीवन के वित्तीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए फाइनेंशियल प्लानिंग एक सही तरीका है। यह आपके वर्तमान संसाधनों को देखते हुए उचित प्रोडक्ट चुननें और अपेक्षित रिटर्न पाने में आपकी मदद करता है। सबसे पहले आपको पर्याप्त जीवन और स्वास्थ्य बीमा लेकर अपने परिवार को सुरक्षित बनाना चाहिए। अपनी वित्तीय स्थिति का विश£ेषण कीजिए और पर्याप्त कवर लीजिए।

आपकी जीवन बीमा आपकी सालाना कमाई का कम से कम 10 गुना होना चाहिए। आप तंबाकू और शराब का सेवन करते हैं इसलिए आपको प्रेफर्ड रेट्स मिलेंगे। लेकिन ऐसा नहीं है इसकी वजह से आप टर्म इंश्योरेंस नहीं ले सकते हैं। आपका हेल्थ इंश्योरेंस कवर आपके शहर के अच्छे अस्पतालों के खर्चे के आधार पर लिया जाना चाहिए।

इन दोनों में कमाई बढऩे के साथ ही बढ़ोतरी कीजिए। इसके साथ-साथ एक आपातकालीन कोष बनाइए जो भविष्य में किसी अप्रत्याशित परिस्थिति में काम आएगा। आदर्श तौर पर आपातकालीन फंड आपके 4-6 महीने की कमाई के बराबर होना चाहिए।
जहां तक आपकी वर्तमान पॉलिसियों की बात है तो विजन और संपूर्ण समृद्धि एचडीएफसी लाइफ के ट्रेडिशनल प्लान है जबकि सरल वेल्थ और पैटिनम प्रीमियर आदि यूलिप पॉलिसियां हैं।

मैं इनमें से किसी का समर्थन नहीं करता क्योंकि ट्रेडिशनल प्लान पर रिटर्न काफी कम मिलते हैं और यूलिप प्लान काफी खर्चीले हैं। प्लैटिनम प्रीमियर जैसे प्लान की बिक्री जिसमें एनएवी की गारंटी दी जाती है गलत तरीके से खूब बेची गई है। मेरा सुझाव होगा कि आप अपने पॉलिसियों की समीक्षा करें और जिनका प्रदर्शन ठीक नहीं है उनसे बाहर हो लें। बचत का इस्तेमाल टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदने के लिए करें।

अपने पोर्टफोलियो के डाइवर्सिफिकेशन के लिए हमेशा विभिन्न उपकरणों में निवेश करें। सेवानिवृत्ति आर बच्चों की फ्यूचर प्लानिंग जैसे दीर्घावधि के लक्ष्यों के लिए म्यूचुअल फंडों में सिप के माध्यम से निवेश करें। इससे आपको डाइवर्सिफिकेशन, प्रोफेशनल मैनेजमेंट, लिक्विडिटी और रूपी कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलेगा।

सिप के जरिये न केवल आप अपना जोखिम कम कर पाएंगे बल्कि अच्छी दर से आपके पैसों मेंए चक्रवृद्धि भी होगी। आप एचडीएफसी इक्विटी, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फोकस्ड ब्लू चिप इक्विटी, डीएसपी बीआर टॉप 100 इक्विटी, एचडीएफसी प्रूडेंस, डीएसपीबीआर स्मॉल एंड मिड कैप और आईडीएफसी प्रीमियर इक्विटी में से चयन कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त पब्लिक प्रोविडेंट फंड में भी निवेश करें। अल्पावधि (1-2 साल) के लक्ष्यों के लिए  आपको डेट में निवेश करना चाहिए। इसके लिए म्यूचुअल फंडों के एफएमपी और एमआईपी का चयन आप कर सकते हैं। अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी और डेट 80:20 के अनुपात में रखें। समय-समय पर अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें और खराब प्रदर्शन करने वाले प्रोडक्ट को जरूरत के अनुसार छांट दें।

जैसे-जैसे आप अपने लक्ष्य के करीब होते हैं, अपने इक्विटी निवेश को कम जोखिम वाले डेट उपकरणों में स्विच करना शुरू कर दें। इससे आपका मुनाफा सुरक्षित रहेगा। प्रोडक्ट की विशेष जानकारी के लिए किसी फाइनेंशियल प्लानर से मिलें। इंदौर में फाइनेंशियल प्लानर के लिए एफपीएसबीइंडिया डॉट ओआरजी वेबसाइट का सहारा ले सकते हैं। यहां देश भर के फाइनेंशियल प्लानर की सूची मिल जाएगी।

मैंने एक निजी बीमा कंपनी से हेल्थ इंश्योरेंस प्लान लिया हुआ है। किसी कारण से मुझे हॉस्पिटलाइज होना पड़ा था और 23 घंटे बाद मुझे दे दी गई। जब मैंने क्लेम किया तो कंपनी ने मेरा क्लेम निरस्त कर दिया। उनका कहना था कि नियमत: किसी इलाज के क्लेम के लिए 24 घंटे के लिए अस्पताल में भर्ती होना जरूरी है। इस नियम का पालन आखिर कितनी सख्ती से किया जाता है? क्या मुझे इलाज के पैसों का रीम्बर्समेंट नहीं मिलेगा?  -राजेश त्रिवेदी, रायपुर
—प्रत्येक हेल्थ इंश्योरेंस कंपनी इलाज के खर्च के क्लेम के लिए न्यूनतम 24 घंटे अस्पताल में भर्ती होने के नियम का पालन करती है। हालांकि, इस नियम को लेकर कई उलझने हैं। पहला, कोई भी हॉस्पिटलाइजेशन जिसमें रोगी को 24 घंटे के लिए भर्ती होना होता है इन पेशेंट ट्रीटमेंट के तहत कवर होता है। इससे कम समय वाले इलाज जैसे डेंटल और अधिकांश डे-केयर प्रक्रियाओं के लिए आउटपेशेंट ट्रीटमेंट दिया जाता है।

उदाहरण के तौर पर मेडिकल तकनीक के उन्नत होने से मोतियाबिंद का इलाज 24 घंटे से कम समय में हो जाता है। लेकिन अगर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में इसे कवर किया जाता है तो भले इसका इलाज २४ घंटे से कम समय हो, क्लेम का भुगतान किया जाता है।

इस प्रकार, हॉस्पिटलाइज होने की जरूरत ज्यादा महत्वपूर्ण न कि आप कितने समय के लिए हॉस्पिटलाइज होते हैं। किन बीमारियों के इलाज के लिए भर्ती होना जरूरी है इससे जुड़े नियम एवं शर्तों कर जानकारी पहले ही दे दी जाती है। इसलिए पॉलिसी दस्तावेज को गौर से पढऩा चाहिए।

मैंने हाल ही में निवेश के क्षेत्र में कदम रखा है और मैं मासिक निवेश करना चाहता हूं। विभिन्न एडवाइजर भांति-भांति के सलाह देते हैं। कुछ कहते हैं कि मंथली इनकम प्लान अच्छा है तो कुछ कहते हैं इक्विटी में निवेश करो। कुछ ने तो मौजूदा समय में गिल्ट फंडों में निवेश की सलाह दी है। मेरी उलझन और बढ़ गई है। कृपया मेरा मार्गदर्शन करें।  -समीर, जोधपुर

—आप वैसी परिस्थिति में हैं जहां निवेशक अपने पहले निवेश की शुरुआत गलत सलाह के अनुसार करता है और उसका सारा उत्साह भंग हो जाता है। निवेश का सबसे सही तरीका है कि आप निवेश का निर्णय अपने लक्ष्यों के अनुसार लें। इससे आपको समय-सीमा और अपेक्षित रिटर्न का आकलन करने में सहूलियत होगी। एक बार जब अनुमानित रिटर्न की गणना हो जाती है जो प्रोडक्ट का चयन कर आप अपनी जरूरतें पूरी कर सकते हैं। पहली बार निवेश करने जा रहे निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंडों को माध्यम बनाना सबसे अच्छा विकल्प है।

अगर आप दीर्घावधि, यानी 7 से 10 साल के लिए निवेश करने जा रहे हैं तो डाइवर्सिफायड लार्ज कैप फंड जैसे डीएसपीबीआर टॉप 100, एचडीएफसी इक्विटी, बिड़ला सन लाइफ फ्रंटलाइन इक्विटी और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल फोकस्ड ब्लू चिप इक्विटी का चयन कर सकते हैं। ये फंड लगातार अच्छा रिटर्न देते आए हैं।

अपने निवेश पोर्टफोलियो में कुछ बैलेंस्ड फंड जैसे एचडीएफसी प्रूडेंस, एचडीएफसी बैलेंस्ड और डीएसपीबीआर बैलेंस्ड फंड को शामिल करें ताकि डेट में भी कुछ निवेश का लाभ प्राप्त हो। जब आप म्यूचुअल फंडों में निवेश करना सीख जाते हैं और उससे होने वाले लाभ की जानकारी मिल जाती है तो आप कुछ मिड कैप फंडों को भी पोर्टफोलियो में शामिल कर सकते हैं।

इससे पोर्टफोलियो का रिटर्न बढ़ेगा। हालांकि, अग्रर आप दो-तीन सालके लिए निवेश करना चाहते हैं तो मंथली इनकम प्लान या एमआईपी एक अच्छा विकल्प है। बिड़ला सन लाइफ एमआईपी, डीएसपीबीआर सेविंग्स मैनेजर, एचडीएफसी एमआईपी और रिलायंस एमआईपी कुछ अच्छे फंड हैं जिनके रिटर्न अच्छे रहे हैं।

गिल्ट फंड विशुद्ध रूप से डेट फंड हैं जिसके साथ ब्याज दर जोखिम जुड़ा होता है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो गिल्ट फंडों के रिटर्न घट जाते और जब ब्याज दरों में गिरावट का दौर शुरू होता है तो इनके रिटर्न बढ़ जाते हैं।

इसके अलावा दीर्घावधि में गिल्ट फंडों ने 10 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया है। इसलिए डेट में निवेश करने वालों के लिए यह एक अच्छा विकल्प है।इस प्रकार किसी भी श्रेणी में किया जाने वाला निवेश आपके निवेश की समय-सीमा और लक्ष्य के आधार पर तय किया जाता है। अगर अब भी कुछ सवाल आपके मन में उठ रहे हैं तो किसी सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर से संपर्क करें।

गिल्ट फंड क्या होते हैं? क्या गिल्ट फंडों में निवेश करने का यह समय उपयुक्त है? मैं जिन एडवाइजर्स से मिला हूं सभी ने गिल्ट फंडों में निवेश की सलाह दी है। आपकी क्या राय है?  -राधेश्याम ठाकुर, दिल्ली

—गिल्ट फंड म्यूचुअल फंड योजनाएं ही हैं जो विभिन्न प्रकार के मध्यावधि और दीर्घावधि गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में में निवेश करने के अतिरिक्त उच्च गुणवत्ता वाले कॉरपोरेट डेट में निवेश करते हैं। ये गवर्नमेंट सिक्योरिटीज भारत सरकार के लिए भरतीय रिजर्व बैंक जारी करता है इसलिए इनकी सॉवरिन गारंटी होती है। इन गवर्नमेंट सिक्योरिटीज का कारोबार स्टॉक एक्सचेंजों पर किया जाता है और दैनिक आधार पर इन कीमतों में घट-बढ़ होती है। इन सिक्योरिटीज को जी-सेक भी कहते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी किए जाने वाले इन जी-सेक में कोई डिफॉल्ट रिस्क नहीं होता है। इनमें केवल ब्याज दर का जोखिम होता है। इसलिए जब ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है तो जी-सेक में गिरावट देखने को मिलती है और इस प्रकार रिटर्न भी कम मिलता है। हालांकि, जब ब्याज दरों में गिरावट का दौर शुरू होता है तो कीमतों में बढ़ोतरी के साथ-साथ रिटर्न में भी इजाफा होता है। मौजूदा दौर ब्याज दरों में बढ़ोतरी का है। यही वजह है कि जी-सेक की कीमतें घट रही हैं।

जब अगले दो-तीन महीनों में यह चक्र बदलेगा तो जी-सेक की कीमतें बढऩी शुरू होगी और गिल्ट फंड अच्छा रिटर्न देना शुरू करेंगे। इसलिए अगर आपके निवेश की समय-सीमा दो से तीन साल की है तो गिल्ट फंड निवेश का एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। इसके अतिरिक्त, हम आपको बताना चाहेंगे कि दीर्घावधि में गिल्ट फंडों ने 10 फीसदी से अधिक का रिटर्न दिया है। इसलिए, डेट में निवेश के लिए गिल्ट फंड अभी एक बेहतर विकल्प है।

मेरी उम्र 35 वर्ष है और मैं एक सरकारी कंपनी में काम करता हूं। मेरे दो बच्चे हैं जिनकी उम्र दो और चार साल है। मेरा वेतन 35,000 रुपये प्रति माह है। मैंने भारतीय जीवन बीमा निगम के चाइल्ड प्लान, आईसीआई प्रूडेंशियल के स्मार्ट किड और अवीवा लाइफ इंश्योरेंस के चाइल्ड स्कॉलर में अपने बच्चे के भविष्य के लिए निवेश कर रहा हूं। मैंने इक्विटी में किसी तरह का निवेश अब तक नहीं किया है। मेरा एक पब्लिक प्रोविडेंट अकाउंट (पीपीएफ) है जिसमें मैं सालाना 20,000 रुपये का निवेश कर रहा हूं। कृपया सलाह दें कि मेरे निवेश का निर्णय सही है या नहीं?   -राजवीर सिंह, लुधियाना
—किसी भी व्यक्ति के वित्तीय लक्ष्य में बच्चों के भविष्य के लिए योजना बनाना महत्वपूर्ण होता है। शिक्षा की बढ़ती लागत और बच्चों की बढ़ती जरूरतों की वजह से परिवार का बजट प्रभावित हो सकता है। इसलिए, यह आवश्यक है कि बच्चों के भविष्य के लिए पहले से योजना बना कर चली जाए साथ ही प्रोडक्ट के सही मिश्रण का चयन किया जाए।

आपने भी वही गलती की है जो अधिकांश लोग करते हैं। संभवत: आपको विभिन्न जीवन बीमा कंपनियों के एजेंटों ने बहकाया है। चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान काफी खर्चीले होते हैं और जब इसके फंड का प्रदर्शन बुरा होता है तो आपके पास इसे बदलने का कोई विकल्प भी नहीं होता है। ऐसे चाइल्ड इंश्योरेंस प्लान का एक आकर्षण होता है प्रीमियम वेवर और इनकम बेनिफिट राइडर। हालांकि, अगर सारे फीचर्स देखें तो ये आपको अपेक्षित लाभ शायद ही दे पाएं।

सबसे पहले आपको अपने परिवार को आर्थिक रूप से सुरक्षित करना चाहिए और इसके लिए टर्म इंश्योरेंस सबसे बढिय़ा प्रोडक्ट है। आपकी आय को देखते हुए मेरी सलाह होगी कि आप पचास लाख रुपये का जीवन बीमा लें। आप टर्म इंश्योरेंस की खरीदारी ऑनलाइन और ऑफलाइन (एजेंट के जरिये) कर सकते हैं। दीर्घावधि के बचत के नजरिये से पब्लिक प्रोविडेंट फंड भी एक अच्छा विकल्प है। इसे जारी रखि और आमदनी बढऩे पर इसमें बचत की राशि भी बढ़ाएं।

दीर्घावधि में धन संचित करने के लिए आपको ऐसे उपकरणों में निवेश करना चाहिए जो महंगाई को मात देते हुए अच्छा रिटर्न अर्जित कर सकें। सभी परिसंपत्ति वर्गों में इक्विटी इस जरूरत को पूरी करता है। चूंकि आप नौकरीपेशा हैं इसलिए म्यूचुअल फंडों में सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान यानी सिप के जरिये मासिक निवेश करें।

इससे न केवल निवेश से जुड़ा जोखिम कम होगा बल्कि वैसे समय में ज्यादा लाभ होगा जब बाजार अस्थिर होते हैं। हालांकि, कितनी राशि का निवेश किया जाना चाहिए इसके लिए अपनी जरूरतों के आधार पर गणना करें। विस्तृत सलाह के लिए आप किसी फाइनेंशियल प्लानर की मदद ले सकते हैं।      

हाल ही में मैंने समाधान कॉलम में विशेषज्ञ की सलाह देखी थी जिसमें भारतीय जीवन बीमा निगम के जीवन सरल पॉलिसी के बारे में कहा गया था कि इस प्रोडक्ट पर उन्हें चार से पांच प्रतिशत की दर से रिटर्न मिलेगा। मैं यह जानना चाहता चाहता हूं कि जब कोई भी जीवन बीमा कंपनी 6 प्रतिशत से कम रिटर्न नहीं दे सकती तो इसका मतलब हुआ कि उन्हें छह से दस प्रतिशत के बीच रिटर्न घोषित करना होगा। तब फिर आप 4 से 5 प्रतिशत रिटर्न मिलने की बात कैसे कह रहे हैं? कृपया स्पष्ट करें।  -मुरारी, ई-मेल के जरिये
—मुरारीजी सबसे पहले मैं यह बताना चाहूंगा कि मैंने जिस रिटर्न का जिक्र करता हूं वह निवेशकों को मिलने वाला नेट यील्ड है न कि इलस्ट्रेशन में दिखाया गया रिटर्न। अगर आप भारतीय जीवन बीमा निगम की वेबसाइट पर जीवन सरल का इलस्ट्रेशन देखेंगे और उसके आधार पर नेट यील्ड की गणना करेंगे तो छह फीसदी पर यह लगभग 4.2 प्रतिशत आता है और 10 प्रतिशत की गणना के आधार पर यह लगभग 8 प्रतिशत आता है। जहां तक मैं जानता हूं बीमा कंपनियों का इंवेस्टमेंट यील्ड लगभग छह से आठ प्रतिशत के बीच है।

इसलिए, अगर बीमा कंपनी की यील्ड छह प्रतिशत है तो ग्राहकों को 4.2 प्रतिशत और अगर बीमा कंपनी 10 प्रतिशत की कमाई करती है तो पॉलिसीधारकों का यील्ड 8 प्रतिशत होता है। यहां जो अंतर आपको दिखता है वह वास्तव में ग्राहकों के लिए लागत होती है। भारतीय जीवन बीमा निगम की वेबसाइट पर स्पष्ट लिखा है – गैर-गारंटीड लाभों की गणना यह मान कर की गई है कि वे निवेश के अनुमानित रेट ऑफ रिटर्न के साथ स्थिर रहेंगे। अनुमानित रेट ऑफ रिटर्न 6 और 10 प्रतिशत माना गया है।

दूसरे शब्दों में लाभ का इलस्ट्रेशन यह मानते हुए तैयार किया गया है कि एलआईसी जो रेट ऑफ रिटर्न पूरी पॉलिसी अवधि के दौरान अर्जित करेगी वह 6 प्रतिशत प्रति वर्ष या 10 प्रतिशत प्रति वर्ष बना रहेगा। अनुमानिट रेट ऑफ रिटर्न की गारंटी नहीं है। लॉयल्टी एडिशन भविष्य के लाभों पर निर्भर करेगा और यह गारंटीड नहीं है।

इसका मतलब हुआ कि आपकी परिपक्वता राशि कंपनी द्वारा अनुमानित राशि से बिल्कुल अलग हो सकती है क्योंकि निवेश पर मिलने वाला रिटर्न कम या अधिक हो सकता है और लॉयल्टी एडिशन का भुगतान कंपनी द्वारा अर्जित लाभों के अनुसार किया जाता है। किसी भी परिस्थिति में एलआईसी इस प्रोडक्ट पर किसी तरह के रिटर्न की गारंटी नहीं देती है। इसलिए, किसी खास प्रोडक्ट के रिटर्न का अनुमान उस प्रोडक्ट के निवेश के स्वभाव पर आधारित होता है।

ट्रेडिशनल प्रोडक्ट के मामले में कंपनी द्वारा घोषित पिछले बोनस रिकॉर्ड को देखें तो अनुमान बीमा कंपनी के इंवेस्टमेंट यील्ड से अधिक नहीं हो सकता। अंत में मैं यह बताना चाहूंगा कि 6 प्रतिशत और 10 प्रतिशत के रिटर्न के आधार पर तैयार किया जाने वाला इलस्ट्रेशन बीमा नियामक के दिशानिर्देशों के अनुसार किया जाता है और यह अनिवार्य नहीं है कि बीमा कंपनियां न्यूनतम 6 प्रतिशत का रिटर्न दें ही।

आपने देखा ही होगा कि जब बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण ने बीमा कंपनियों को यूनिट लिंक्ड पेंशन प्लान पर 4.5 प्रतिशत का गारंटीड रिटर्न देने का दिशानिर्देश जारी किया था तो क्या हुआ था। भारतीय जीवन बीमा निगम और कुछ निजीजीवन बीमा कंपनियों को छोड़ दें तो और कोई भी जीवन बीमा कंपनी यूनिट लिंक्ड पेंशन प्लान लेकर नहीं आई थी।

अब बीमा नियामक इस अनिवार्य रिटर्न को समाप्त करने पर विचार कर रहा है। इसलिए, बीमा कंपनियों के लिए 6 प्रतिशत का रिटर्न देना संभव नहीं है जब वह 4.5′ का रिटर्न अर्जित करना कठिन समझते हैं। एक आम आदमी के लिए इस गुत्थी को समझना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि इसके लिए डेट मार्केट के बारे में जानकारी जरूरी है। लेकिन एक एडवाइजर या एजेंट के लिए ग्राहकों को सही सलाह और जानकारी देना जरूरी होता है।

कृपया ध्यान रखें कि सलाह व्यक्तिगत लक्ष्यों के आधार पर होती है और अगर आप बढ़ती महंगाई दर को ध्यान में रखते हुए एंडोमेंट प्रोडक्ट के रिटर्न की गणना करते हैं तो यह उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता है। मुझे उम्मीद है कि इन उदाहरणों के जरिये आपको समझने में आसानी हुई होगी कि सलाह में ऐसे प्रोडक्ट के लिए 4-5 प्रतिशत के रिटर्न की बात क्यों कहता हूं।

मैंने साल 2005 में एक घर खरीदा था और इसे 2011 में बेच दिया। इन पैसों से मैंने अपनी पत्नी के नाम से एक खरीद लिया है। क्या मुझे कैपिटल गेन टैक्स में छूट मिलेगी? कृपया मार्गदर्शन करें।  -अनिरुद्ध, रायपुर

—आयकर अधिनियम की धारा 54एफ के तहत किसी प्रकार के लांग टर्म कैपिटल गेन (आवासीय प्रॉपर्टी के मामले में 3 साल से अधिक) पूरी तरह छूट के योग्य होती है अगर कोई व्यक्ति बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग एक या दो साल के भीतर दूसरी प्रॉपर्टी खरीदने या तीन साल के भीतर दूसरा मकान बनवाने में करता है।

आप छूट के हकदार हैं लेकिन नियम के मुताबिक जिसके नाम की प्रॉपर्टी बिकी है उसी के नाम से दूसरी प्रॉपर्टी खरीदी या बनाई जानी चाहिए। आपने पत्नी के नाम मकान लिया है इसलिए लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स का लाभ आप नहीं ले पाएंगे।

मैंने क्लेम सेट्लमेंट के बारे में आपके अखबार में एक लेख पड़ा था। मेरी उम्र 39 साल है और मैं 40 लाख रुपये सम एश्योर्ड का प्रीफर्ड टर्म इंश्योरेंस प्लान कोटक लाइफ इंश्योरेंस से लेना चाहता हूं। इसका प्रीमियम 14,500 रुपये बैठ रहा है। क्या इस टर्म प्लान का प्रीमियम सही है? कृपया यह भी बताएं कि कोटक का क्लेम सेट्लमेंट रेश्यो कैसा है? इस कंपनी से टर्म प्लान लेना सही रहेगा या नहीं?   अभिषेक चंद्र शर्मा, भोपाल

आप कोटक प्रीफर्ड टर्म प्लान ले सकते हैं। यह बाजार में उपलब्ध सबसे सस्ती ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी है। जहां तक क्लेम सेट्लमेंट के आंकड़ों की बात है तो आप इस बारे में बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण की वेबसाइट से जानकारी हासिल कर सकते हैं। इस वेबसाइट पर आपको जीवन बीमा कंपनियों से संबंधित तमाम आंकड़े मिल जाएंगे। किसी भी जीवन बीमा कंपनी  टर्म इंश्योरेंस प्लान अच्छा होता है और कोई भी कंपनी वास्तविक क्लेम को खारिज नहीं करती है बशर्ते आपने पॉलिसी लेते समय अपने स्वास्थ्य और फैमिली हिस्ट्री की सही जानकारी दिए हों। प्रपोजल फॉर्म में सही जानकारी देने पर क्लेम के समय मुश्किलों का सामना परिवार के लोगों को नहीं करना होता है।

मेरी उम्र 80 साल है और मैं एक रिटायर्ड ऑफिसर हूं। मेरी एक बेटी जिसकी उम्र 45 साल है, अविवाहित है। मुझे ऐसे किस बीमा पॉलिसी या म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए जिससे पांच साल बाद प्रति महीने उसे कम से कम 6,000 रुपये प्रति महीने मिले? कृपया इंदौर के किसी अच्छे सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर के बारे में बताएं। कृपया मुझे डे-ट्रेडिंग और टेक्रिकल चार्ट और उसके विश£ेषण के बारे में भी बताएं।  पी. के. चौहान, इंदौर
अगर हम आपके पुत्री की जीवन प्रत्याशा 80 साल मान कर चलें तो आपको पांच साल बाद उन्हें प्रति महीने 6,000 रुपये की आय 30 साल तक उपलब्ध कराने के लिए प्रति महीने २१,५०० रुपये अगले पांच साल तक जमा करने की जरूरत होगी। वैकल्पिक तौर पर आप एकमुश्त 10 लाख रुपये का निवेश कर भी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।

आपको एचडीएफसी प्रूडेंस या फ्रैंकलिन इंडिया डायनामिक पीई फंड जैसे म्यूचुअल फंडों में निवेश करना चाहिए। यह बेहतर रहेगा कि आप अपने सवाल का विस्तार से उत्तर जानने के लिए किसी सर्टिफायड फाइनेंशियल प्लानर से संपर्क करें। इंदौर स्थित सर्टिफायड फज्ञइनेंशियल प्लानर का पता और फोन नंबर जानने के लिए आप 222.द्घश्चह्यड्ढद्बठ्ठस्रद्बड्ड.शह्म्द्द की वेबसाइट देख सकते हैं। जहां तक डे-ट्रेडिंग और तकनीकी विश£ेषण की बात है तो हम किसी को भी इसकी सलाह नहीं देते हैं। हम योजनाबद्ध तरीके से आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति के तरीके को सबसे अच्छा समझते हैं।

मेरे पास बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का यूनिट गेन यूलिप है। इसे मैंने साल 2007 में लिया था और इसका प्रीमियम 10,000 रुपये है। कृपया बताएं कि अन्य यूलिप की तुलना में यह कैसा है? मुझे इसको सरेंडर करना चाहिए या प्रीमियम देना जारी रखना चाहिए? कृपया उचित सलाह दें।  कैलाश, रायपुर

यूलिप को सरेंडर या जारी रखने की सलाह इस बात पर पूरी तरह निर्भर करती है कि आपके फाइनेंशियल, जिम्मेदारियां, देनदारियां, लक्ष्य क्या हैं। आपने इनमें से कोई भी जानकारी नहीं दी है इसलिए मैं न तो इसे जारी रखने की सलाह दे सकता हूं और न ही इसे सरेंडर करने की। लेकिन अगर कोई ऐसे पूछे तो हम निवेश और बीमा को मिश्रित करने की सलाह कभी नहीं देते हैं। पर्याप्त बीमा कवर लेने के लिए टर्म इंश्योरेंस लें और निवेश के लिए अपनी जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार अन्य उपलब्ध प्रोडक्ट में से अपने लायक प्रोडक्ट चुनें।

ऐसा कहा जाता है कि दीर्घावधि में इक्विटी किसी अन्य परिसंपत्ति वर्ग की तुलना में बेहतर रिटर्न देते हैं। लेकिन यहां दीर्घावधि का क्या मतलब है? अगर मेरे निवेश की समयावधि दो साल है तो मुझे कहां निवेश करना चाहिए?     हंसिका, चंडीगढ़

दो साल की अवधि लंबी समयावधि की श्रेणी में नहीं आती है। जहां तक इक्विटी में दीर्घावधि के निवेश की बात की जाती है तो इसका मतलब होता है 5 साल से अधिक अवधि के लिए निवेश करना। अगर आप पांच साल की अवधि के लिए भी अपने निवेश को लक्ष्य के साथ जोड़ते हैं तो मेरी सलाह होगी कि आप बैलेंस्ड प्रोडक्ट चुनें। दो साल की समय-सीमा के लिए आप अभी बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट का चयन कर सकते हैं। बैंकों के फिक्स्ड डिपॉजिट पर अभी आकर्षक ब्याज मिल रहा है। अगर आप उच्च कर वर्ग में आते हैं तो आपको म्यूचुअल फंडों के फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान में निवेश करना चाहिए।

मैं पिछले तीन साल से चार फंडों में सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (सिप) के जरिये निवेश कर रहा हूं। बाजार में आई हालिया गिरावट की वजह से मैं चिंतित हूं क्योंकि मेरे निवेश का मूल्य काफी घट चुका है। ऐसी परिस्थिति में मुझे क्या करना चाहिए? कृपया सलाह दें।
अवधेश मिश्र, जोधपुर

सिस्टेमेटिंक इंवेस्टमेंट प्लानशेयर बाजार में निवेश करने का एक अच्छा जरिया है जहां की गतिविधियों के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। नियमित निवेश के जरिये आपको लागत औसत करने में मदद मिलत है। जब बाजार में गिरावट होती है तो नेट एसेट वैल्यू या एनएवी में गिरावट आने की वजह से आप अधिक यूनिट प्राप्त कर पाते हैं और जब बाजार में बढ़त होती है तो एनएवी में होने वाी बढ़ोतरी का लाभ आपको मिलता है। बाजार में हाल में आई गिरावट वास्तव में आपको निवेश का एक अवसर उपलब्ध कराता है। मेरी सलाह होगी कि आप न तो अपना कोई सिप भुनाएं और नही किसी सिप को बंद करें। आपके निवेश का बाजार मूल्य बाजार के उतार-चढ़ाव के साथ ही घटेग और बढ़ेगा, इसलिए निवेश का मूल्य कम होने से चिंतित न हों। दीर्घावधिके निवेश के लाभ के लिए अपने सिप को जारी रखिए।

मैं अपने पिता से होम लोन लेना चाहता हूं। क्या यह वैध होगा और अगर हां तो क्या मुझे होम लोन के तहत मिलने वाली कटौतियों का लाभ उसी प्रकार मिलेगा जैसे किस होम लोन संस्थान से लोन लेने पर मिलता है?
राजकुमार, भोपाल
हां, आप अपने माता-पिता या भाई या किसी रिश्तेदार से लोन ले सकते हैं। आप अपनी पत्नी या पति या दोस्त से भी घर के लिए लोन ले सकते हैं। हालांकि, आपको  कर का लाभ केवल ब्याज के भुगतान पर मिलेगा जो धारा 24 के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपये सालाना है। धरा 80सी के अंतर्गत मूलधन के भुगतान पर आपको कर में छूट नहीं मिलेगी। ब्याज का लाभ पाने के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। आपको लोन वैध तरीके से लेना होगा और इसके लिए पूरा दस्तावेज तैयार करना होगा। यह सुनिश्चित कर लें कि कर्जदाता और आपका नाम, कर्ज की राशि और ब्याज की दर स्पष्ट रूप से उसमें लिखा गया हो। जब आप पुनर्भुगतान करते हैं तो इसके लिए चेक को माध्यम बनाइए। कर्जदाता से प्रत्येक वर्ष एक स्टेटमेंट लें जिसमें चुकाए गए ब्याज का उल्लेख हो।

गोल्ड सेविंग फंडों का एक बड़ा लाभ यह है कि इसमें सिस्टेमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान के जरिये निवेश किया जा सकता है और यह सुविधा गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों (ईटीएफ) में नहीं है। एक तरफ जहां प्रत्येक महीने अनुशासित तरीके से ईटीएफ में निवेश करना कठिन होता है वैसे में औसत का लाभ उठाने के ख्याल से क्या गोल्ड सेविंग फंड एक अच्छा विकल्प साबित हो सकता है?
फिरोज अनवर, जयपुर
अगर गोल्ड ईटीएफ से गोल्ड सेविंग फंड की तुलना करें तो यह अपेक्षाकृत अधिक खर्चीला है क्योंकि गोल्ड सेविंग फंड वास्तव में फंड ऑफ फंड हैं जो गोल्ड ईटीएफ में निवेश करते हैं न कि सीधे गोल्ड में। इसकी वजह से गोल्ड सेविंग फंडों को दो जगहों पर खर्च करना होता है- एक तो एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में और दूसरा फंड को प्रबंधित करने वाले परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी में। आम तौर पर गोल्ड सेविंग फंडों का खर्च ईटीएफ की तुलना में 0.5 प्रतिशत अधिक होता है। अगर आप दीर्घावधि के गोल्ड रिटर्न पर नजर डालें तो यह लगभग 9 प्रतिशत रहा है। 0.5 प्रतिशत का सालाना फर्क रिटर्न में अच्छा अंतर ला सकता है। इसलिए, हमेशा सलाह यह दी जाती है कि गोल्ड सेविंग फंडों की जगह ईटीएफ में निवेश करें। हालांकि, अगर आपको एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों के जरिये निवेश करने में संदेह है तो आप गोल्ड फंडों में निवेश कर सकते हैं लेकिन समय-समय पर इसकी समीक्षा जरूर करें। इसके अलावा औसत का लाभ ज्यादा अस्थिर बाजारों जैसे शेयर बाजार में मिलता है। सोने में अस्थिरता कम होती है इसलिए सिप का लाभ भी सीमित होता है। यह भी एक वजह है कि हम सोने में ईटीएफ के जरिये निवेश की सलाह देते हैं।

मेरे पास भारतीय जीवन बीमा निगम की तीन पॉलिसी- कोमल जीवन, जीवन सरल और गोल्ड जीवन है। मैंने 3 साल का प्रीमियम जमा करवा दिया है। अब, मैं तीनों पॉलिसी पेड-अप करवाना चाहती हूं। पेड-अप करवाने से मुझ़ क्या लाभ होगा?  महिमा, लुधियाना

पॉलिसी पेड-अप कराने का मतलब होता है कि आपने प्रीमियम देना तो बंद कर दिया लेकिन बीमा कंपनी से अपने पैसे नहीं ले रहे। ऐसे मामले में बीमा कंपनी सम एश्योर्ड, परिपक्वता पर मिलने वाले लाभ आदि उसी अनुपात में कम कर देते हैं। पॉलिसी पेड-करवाने से आपके लिए घाटे का सौदा नहीं है।

उदाहरण के लिए, अगर आपकी पॉलिसी 10 वर्षों की है जिसका सम एश्योर्ड 2 लाख रुपये है और आप इस पॉलिसी का प्रीमियम 5 साल तक दे चुके हैं और आप इस पॉलिसी को पेड-अप करवाते हैं तो आपका सम एश्योर्ड घट कर एक लाख रुपये हो जाएगा साथ ही अन्य लाभ भी 50 प्रतिशत कम हो जाएंगे क्योंकि आपने कुल देय प्रीमियम का 50 फीसदी ही दिया है।

ऐसा लगता है कि आप इस वास्तविकता को समझ रही हैं कि धन कोष बनाने और निवेश के लिए बीमा सर्वोत्तम जरिया नहीं है। पॉलिसी पेड-अप करवाने का आपको अप्रत्यक्ष तौर पर लाभ होगा। आप भविष्य में दिए जाने वाले प्रीमियम का निवेश किसी बेहतर उपकरण में कर पाएंगे।

जब मैंने म्यूचुअल फंड में निवेश शुरू करने के लिए एक म्यूचुअल फंड एजेंट से संपर्क किया तो उसने कहा कि आप सबसे पहले ‘अपने ग्राहक को जानें’ (केवाईसी) की औपचारिकता पूरी कीजिए। मैंने कहा कि केवाईसी तो मेरा बैंक ने पहले ही करवा रखा है। लेकिन उसने कहा कि इसके बावजूद मुझे केवाईसी करवाना होगा। क्या बचत खाता, क्रेडिट कार्ड और म्यूचुअल फंडों के केवाईसी अलग-अलग होते हैं? क्या म्यूचुअल फंड का केवाईसी कराने के लिए दोबारा से सारे दस्तावेज देने होंगे? अगर हां तो क्या ये वही दस्तावेज होंगे जो मैंने बैंक को दिया था?    अभिषेक चौहान, भोपाल

केवाईसी अब प्रत्येक वित्तीय लेन-देन के लिए जरूरी हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) और अन्य नियामकों ने फाइनेंशियल इंटरमीडियरी को केवाईसी के लिए निश्चित दिशादिर्नेश प्रस्तावित किए हैं, यह ग्राहक से संबंध जोडऩे से पहला कराना जरूरी है। यद्यपि, किसी भी इकाई के साथ केवाईसी की औपचारिकता पूरी करने के लिए जरूरी दस्तावेज एक जैसे ही होते हैं।

अभी तक एकल केवाईसी की प्रक्रिया लागू नहीं हुई है। इसलिए, म्यूचुअल फंडों में निवेश से पहले आपको केवाइर्सी करना ही होगा। केवाईसी के लिए जरूरी दस्तावेजों में फोटो, आइडेंटिटी प्रूफ (पैन कार्ड) और मान्य एड्रेस प्रूफ देना होगा। इसके अतिरिक्त अगर कोई और जरूरी दस्तावेज की जरूरत होती है तो वह आवेदन फॉर्म में लिखा रहता है।

मैं जीवन बीमा पॉलिसी को गिरवी रखते हुए होम लोन लेना चाहता हूं। मैंने टर्म इंश्योरेंस पॉलिसी ऑनलाइन खरीदी थी। इसके अलावा मेरे पास एंडोमेंट पॉलिसी भी है। क्या ऑनलाइन टर्म इंश्योरेंस प्लान को गिरवी रखते हुए लोन लिया जा सकता है?   राकेश गोस्वामी, रायपुर

बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान जो होम लोन देते हैं, आम तौर पर जीवन बीमा पॉलिसियों को गिरवी के तौर पर रखते हैं। इसमें एंडोमेंट पॉलिसी को तरजीह दी जाती है क्योंकि उसमें निवेश का हिस्सा बड़ा होता है। चूंकि, एंडोमेंट पॉलिसी के कोष में समय के साथ बढ़ोतरी होती है इसलिए अगर उधार लेने वाला व्यङ्क्षक्त डिफॉल्ट करता है तो जीवन बीमा पॉलिसी से राशि ले ली जाती है।

इसके अतिरिक्त अगर उधार लेने वाले की मृत्यु हो जाती है तो इस पॉलिसी से कर्ज के शेष पैसे ले लिए जाते हैं। जहां तक टर्म इंश्योरेंस की बात है तो इसमें कोई निवेश नहीं होता और सम एश्योर्ड का भुगतान तभी किया जाता है जब पॉलिसीधारक की मृत्यु हो जाती है।

कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थानों की दिलचस्पी केवल उधार लेने वाले व्यक्ति की अकाल मृत्यु में ही नहीं होती बल्कि वह यह भी देखते हैं कि उधार लेने वाले व्यक्ति के जीवित रहने पर उसे पॉलिसी से कितना लाभ होगा। यही वजह है कि टर्म इंश्योरेंस को वित्तीय संस्थान गिरवी नहीं रखते।

हाल ही में सुनने में आया है कि अब म्यूचुअल फंडों में निवेश करने पर निवेशकों को सालाना कुछ शुल्क देना होगा। कुछ साल पहले एंट्री लोड तो समाप्त कर दिया गया था फिर अब लगाया जाने वाला यह शुल्क कैसा है? कृपया म्यूचुअल फंड पर लगने वाले इस ट्रांजैक्शन शुल्क की जानकारी दें?    – राकेश, अंबाला सिटी
सेबी ने मौजूदा ग्राहकों द्वारा किए जाने वाले 10,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर 100 रुपये का ट्रांजैक्शन फीस लेने की अनुमति म्यूचुअल फंडों को दे दी है। एजेंट जब नए ग्राहकों को लाते हैं तो 10,000 रुपये से अधिक के सब्सक्रिप्शन पर उन्हें 150 रुपये मिलेंगे। परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियां यह राशि सब्सक्रिप्शन के पैसों से काटेगी और बाद में वितरकों को ट्रांजैक्शन शुल्क के रूप में भुगतान करेगी।

उदाहरण के तौर पर अगर एक वर्तमान ग्राहक एकमुश्त राशि का निवेश एक ही फंड में साल में चार बार (१०,०००-१०,००० रुपये) करता है तो उसे 100 रुपये का शुल्क चार बार देना होगा। लेकिन अगर ऐसा ही कोई नया निवेशक करता है तो उसे पहली बार 150 रुपये और बाद के ट्रांजैक्शन पर 100 रुपये प्रति सब्सक्रिप्शन देने होंगे। सिप के मामले में यही राशि वितरक तीन-चार किश्तों में वसूलेंगे।